कश्मीर में सेना की हिरासत में नागरिकों की मौत संबंधी ‘कारवां’ की रिपोर्ट सरकार ने हटाने को कहा

‘कारवां’ पत्रिका को आईटी अधिनियम के तहत मिले एक नोटिस में कहा गया है कि अगर वह 24 घंटे के भीतर अपनी वेबसाइट से जम्मू कश्मीर में सेना द्वारा आम नागरिकों की कथित हत्या से संबंधित लेख नहीं हटाती है, तो पूरी वेबसाइट हटा दी जाएगी. पत्रिका ने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है.

सैनिक को 1.5 करोड़ रुपये का मुआवज़ा नहीं देने पर वायुसेना और सेना को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त वायुसैनिक को 2002 में एक सैन्य अस्पताल में ख़ून चढ़ाने के बाद एड्स संक्रमित होने के कारण 1.5 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवज़ा देने का निर्देश दिया था. उनकी चिकित्सा स्थिति के कारण उन्हें सेवा से हटा दिया गया था. उन्हें व्यक्तिगत कलंक का भी सामना करना पड़ा, जिसके कारण उनका तलाक़ हो गया था.

भारतीय सेना का धर्मनिरपेक्ष और अराजनीतिक होना ही इसकी ताकत है: शीर्ष सैन्य अधिकारी

पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने एक समारोह में सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि अराजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर टिके रहना और इस तथ्य को पहचानना ज़रूरी है कि इन मोर्चों पर कोई भी समझौता या इनके पालन में कमी सेना के लिए हानिकारक होगी.

जम्मू कश्मीर: महबूबा को सेना की हिरासत में मारे गए नागरिकों के परिजनों से मिलने से रोका गया

जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में बीते 21 दिसंबर को आतंकी हमले में 4 जवानों की मौत के बाद सेना ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया था. बाद में इनमें से 3 लोगों के शव मिले थे. पीडीपी नेताओं ने कहा कि मुफ्ती को पार्टी के अन्य सहयोगियों को पुलिस ने पीड़ितों के परिवारों से मिलने के लिए टोपा पीर गांव की ओर जाने की अनुमति नहीं दी.

जम्मू-कश्मीर: सेना की हिरासत में नागरिकों की मौत पर राजनाथ सिंह बोले- जो हुआ, वो ग़लत था

पुंछ ज़िले में 21 दिसंबर को आतंकी हमले में 4 जवानों की मौत के बाद सेना ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया था. बाद में इनमें से 3 लोगों के शव मिले, जबकि 5 घायलावस्था में अस्पताल में भर्ती हैं. पीड़ितों के परिजनों ने बताया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनसे मुलाक़ात की और न्याय का आश्वासन दिया है.

जम्मू कश्मीर: सेना की हिरासत में रहे लोग बोले- लाठियों/लोहे की रॉड से पीटा, घावों पर मिर्च डाली

जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में बीते 21 दिसंबर को एक आतंकी हमले में 4 जवानों की मौत के बाद सेना ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए उठाया था. बाद में इनमें से 3 लोगों के शव उस जगह के नज़दीक पाए गए थे, जहां आतंकवादियों ने सेना पर हमला किया था. पांच अन्य को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें एक नाबालिग भी है.

जम्मू कश्मीर: सरपंच ने पुष्टि की, मारे गए नागरिक वीडियो में जवानों की प्रताड़ना सहते दिख रहे हैं

जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में बीते 21 दिसंबर को एक आतंकी हमले में 4 जवानों की मौत के बाद सेना ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए उठाया था. बाद में 3 लोगों के शव उस जगह के नज़दीक पाए गए थे, जहां आतंकवादियों ने सेना पर हमला किया था. एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें सेना के जवान नागरिकों को यातनाएं देते देखे जा सकते हैं.

ज़मीनी हक़ीक़त ने जम्मू-कश्मीर में केंद्र की शांति की ‘फ़र्ज़ी कहानी’ को झुठला दिया है: महबूबा

जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में आतंकी हमले में 4 जवानों के शहीद होने के बाद पूछताछ के लिए सेना द्वारा उठाए गए तीन नागरिकों की मौत की घटना पर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रचारित सामान्य स्थिति को बनाए रखने के लिए यहां के निर्दोष लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है.

जम्मू कश्मीर: तीन नागरिकों की हत्या के मामले में सेना ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए

जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में बीते 21 दिसंबर को एक आतंकी हमले में 4 जवानों की मौत के बाद सेना ने कुछ लोगों को पूछताछ के लिए उठाया था. बाद में इनमें से 3 लोगों के शव पाए गए थे. इनके परिवारों ने सेना की हिरासत में मौत का आरोप लगाया है. अब सेना ने इस मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया है.

जम्मू कश्मीर: सेना की हिरासत में तीन नागरिकों की प्रताड़ना के बाद मौत से लोगों में ग़ुस्सा

आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर के पुंछ ज़िले में बीते 21 दिसंबर को सेना के जवानों पर हमला किया था, जिसमें 4 जवान शहीद हो गए थे. स्थानीय लोगों का दावा है कि इस सिलसिले में सेना के जवानों ने बीते 22 दिसंबर को कम से कम आठ नागरिकों को पूछताछ के लिए उठाया था. इनमें से 3 उस जगह के नज़दीक मृत पाए गए थे, जहां आतंकवादियों ने सेना पर हमला किया था.

नौसेना में एक भी महिला अधिकारी को स्थायी कमीशन नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जताया

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि ऐसा नहीं हो सकता कि 17 मार्च 2020 को हमारे फैसले के बाद एक भी महिला को पदोन्नति के लिए योग्य नहीं पाया गया. अदालत कैप्टन के पद पर पदोन्नति की मांग करने वाले छह अधिकारियों द्वारा दायर एक आवेदन पर सुनवाई कर रही थी.

26/11 की घटनाओं को हमारी स्मृतियों से ओझल नहीं होना चाहिए

भारत पाकिस्तान में आतंकवाद को मिलने वाले सरकारी समर्थन को लेकर दबाव बनाने के लिए कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है. फिर भी पाकिस्तान की सरकारें लश्कर-ए-तैयबा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में असमर्थ रही हैं.

1 2 3 27