Journalist Snooping

पेगासस: यह आम सर्विलांस नहीं, जेब में जासूस लेकर चलने से भी आगे की बात है

टेक्नोलॉजी को वापस नहीं लिया जा सकता. लेकिन इसे मुक्त बाज़ार में अनियंत्रित, क़ानूनी उद्योग के रूप में काम करने की इजाज़त देने की ज़रूरत नहीं है. इस पर क़ानून की लगाम होनी चाहिए. तकनीक रह सकती है, लेकिन उद्योग का रहना ज़रूरी नहीं है.

मोदी सरकार पेगासस जासूसी के दुष्प्रभावों को कब तक नज़रअंदाज़ कर सकती है?

पत्रकारिता संस्थान अपने संसाधनों के चलते सीमित होते है, इसलिए राष्ट्रीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर केवल वास्तविक जांच से ही पेगासस के उपयोग की सही स्तर का पता चलेगा.

500 से अधिक कार्यकर्ताओं, वकीलों ने सीजेआई को पत्र लिखा- केंद्र से पूछें पेगासस खरीदा या नहीं

द वायर सहित एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम ने सिलसिलेवार रिपोर्ट्स में बताया है कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से ज़्यादा पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं समेत 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग हुई या वे संभावित निशाने पर थे.

पेगासस प्रोजेक्ट: डीएनए के पूर्व पत्रकार दीपक गिडवानी की क्यों हुई जासूसी?

वीडियो: डीएनए के पूर्व विशेष संवाददाता और स्वतंत्र पत्रकार दीपक गिडवानी का फ़ोन नंबर पेगासस की जासूसी वाली संभावित सूची में शामिल है. इस मुद्दे पर दीपक गिडवानी से द वायर की बातचीत.

पेगासस प्रोजेक्ट: पंजाबी अख़बार ‘रोज़ाना पहरेदार’ के एडिटर की क्यों हुई जासूसी

वीडियो: पेगासस जासूसी मामले में पंजाबी भाषी अख़बार ‘रोज़ाना पहरेदार’ के एडिटर-इन-चीफ जसपाल सिंह हेरां का नाम भी शामिल है. जसपाल सिंह से इस मामले पर द वायर की बातचीत.

सर्विलांस तकनीक की बिक्री, लेनदेन और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगाए सरकारें: सामाजिक संगठन

डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वाले एक्सेस नाउ और सौ के क़रीब नागरिक समाज संगठनों व स्वतंत्र विशेषज्ञों का कहना है कि वे एनएसओ ग्रुप के स्पायवेयर द्वारा विश्वभर में बड़े पैमाने पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन संबंधी खुलासों से चिंतित हैं और सरकारों को इसे नियंत्रित करने के लिए क़दम उठाने चाहिए.

पेगासस पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वरिष्ठ पत्रकार, पूछा- सरकार बताए स्पायवेयर प्रयोग किया या नहीं

एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया कंसोर्टियम, जिसमें द वायर भी शामिल है, ने सिलसिलेवार रिपोर्ट्स में बताया है कि देश के केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, एक मौजूदा जज, कई कारोबारियों व कार्यकर्ताओं सहित 300 से अधिक भारतीय फोन नंबर उस लीक डेटाबेस में शामिल थे, जिनकी पेगासस से हैकिंग की गई या वे संभावित निशाने पर थे.

संभावित जासूसी सूची में थे ईडी, पीएमओ, नीति आयोग के अधिकारियों व केजरीवाल के सहयोगी के नंबर

पेगासस प्रोजेक्ट: लीक हुई सूची में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले और एयरसेल-मैक्सिस जैसे हाईप्रोफाइल मामले संभालने वाले प्रवर्तन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी राजेश्वर सिंह, उनकी पत्नी और उनकी दो बहनों के नंबर भी शामिल हैं.

निगरानी सूची में जेट एयरवेज़, स्पाइसजेट समेत सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के अफसरों के नाम शामिल

पेगासस प्रोजेक्ट: लीक हुए दस्तावेज़ दर्शाते हैं कि पेगासस के ज़रिये संभावित निगरानी के दायरे में रिलायंस की दो कंपनियों, अडाणी समूह के अधिकारी, गेल इंडिया के पूर्व प्रमुख, म्युचुअल फंड से जुड़े लोगों और एयरसेल के प्रमोटर सी. शिवशंकरन के नंबर भी शामिल थे.

एनएसओ ग्रुप जैसी कंपनियों को बंद या प्रतिबंधित किया जाए: अमेरिकी सांसद

अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी चार सांसदों ने एक बयान जारी कर कहा कि अब बहुत हो चुका है, एनएसओ ग्रुप के सॉफ्टवेयर के दुरुपयोग के संबंध में हालिया खुलासे इस विश्वास को पुष्ट करते हैं कि इसे नियंत्रण में लाया जाना चाहिए.

पेगासस जासूसी और भारतीय लोकतंत्र के इम्तिहान की घड़ी

जब सरकारें यह दिखावा करती हैं कि वे बड़े पैमाने पर हो रही ग़ैर क़ानूनी हैकिंग के बारे में कुछ नहीं जानती हैं, तब वे वास्तव में लोकतंत्र की हैकिंग कर रही होती हैं. इसे रोकने के लिए एक एंटीवायरस की सख़्त ज़रूरत होती है. हमें लगातार बोलते रहना होगा और अपनी आवाज़ सरकारों को सुनानी होगी.

राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के बढ़े बजट पर कांग्रेस का सवाल- क्या पेगासस खरीद थी वजह

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय की बीते कई सालों की बजट राशि की तुलना करते हुए कहा कि साल 2017-2018 में साइबर सुरक्षा अनुसंधान और विकास नाम की एक नई श्रेणी जोड़ते हुए अनुदान आवंटन पिछले साल के 33 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 333 करोड़ रुपये किया गया. कथित तौर पर उसी साल पेगासस जासूसी शुरू हुई.

आधी रात को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद सर्विलांस सूची में डाला गया था सीबीआई निदेशक का नंबर

पेगासस प्रोजेक्ट: पेगासस के ज़रिये सर्विलांस संबंधित लीक हुई सूची में अक्टूबर 2018 में सीबीआई बनाम सीबीआई विवाद का प्रमुख हिस्सा रहे आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के भी नंबर शामिल हैं. संभावित सर्विलांस की सूची में वर्मा के साथ उनकी पत्नी, बेटी व दामाद समेत परिवार के आठ लोगों के नंबर मिले हैं.

केंद्र का जासूसी के आरोपों की जांच से इनकार, केंद्रीय मंत्री ने रिपोर्ट को ‘अतिरंजित’ बताया

पेगासस प्रोजेक्ट के तहत कई रिपोर्ट की श्रृंखला में द वायर समेत 16 मीडिया संगठनों द्वारा बताया गया है कि इज़रायल के एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पायवेयर के ज़रिये निगरानी के लिए पत्रकारों, नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कुछ सरकारी अधिकारी व कारोबारियों को संभावित टारगेट के तौर पर चुना गया था.

संभावित सर्विलांस के निशाने पर थे अनिल अंबानी और दासो एविएशन के भारतीय प्रतिनिधि

पेगासस प्रोजेक्ट: द वायर और इसके सहयोगियों द्वारा लीक हुए डेटाबेस की जांच में इज़रायली कंपनी एनएसओ ग्रुप की ग्राहक अज्ञात भारतीय एजेंसी द्वारा निगरानी के संभावित टारगेट के तौर पर अनिल अंबानी और उनके रिलायंस समूह के एक अधिकारी द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले फोन नंबर भी मिले हैं.