Maharashtra

(प्रतीकात्मक तस्वीर: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र और गुजरात में कोविड-19 से ठीक होने वालों में फंगल इंफेक्शन, कई लोगों की आंख की रोशनी गई

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि राज्य में फंगल इंफेक्शन यानी म्यूकोरमाइकोसिस के 200 मरीज़ों का इलाज चल रहा है, जिनमें से आठ की आंख की रोशनी चली गई है, जबकि गुजरात में ऐसे मरीज़ों की संख्या 100 से अधिक है और सात मरीज़ों की आंख की रोशनी जा चुकी है.

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे. (फोटो: फेसबुक)

महाराष्ट्र: टीके की कमी के बीच स्वास्थ्य मंत्री के गृह ज़िले को मिली अतिरिक्त खुराक

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बीते 31 मार्च को जब केंद्र से महाराष्ट्र को मिली 26.77 लाख वैक्सीन की खुराक को सभी ज़िलों में बांटा गया था, तब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे के गृह ज़िले जालना को उसके लिए आवंटित सत्रह हज़ार खुराक के साथ 60 हज़ार अतिरिक्त खुराक मिली थी.

(फोटो: पीटीआई)

मराठा आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने 50 फीसदी से अधिक आरक्षण को असंवैधानिक घोषित किया

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों और दाखिले में मराठा समुदाय को आरक्षण देने संबंधी महाराष्ट्र के कानून को खारिज किया और इसे असंवैधानिक करार दिया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत पर तय करने के 1992 के इंदिरा साहनी फैसले (इसे मंडल फैसला भी कहा जाता है) को बड़ी पीठ के पास भेजने से इनकार किया.

अनिल अंबानी (फोटो: रॉयटर्स)

महाराष्ट्र: लॉकडाउन में अनिल अंबानी के टहलने का वीडियो आने के बाद गोल्फ कोर्स बंद कराया गया

महाराष्ट्र में कोविड-19 पाबंदियों के दौरान उद्योगपति अनिल अंबानी महाबलेश्वर के एक गोल्फ कोर्स में टहलते हुए नज़र आए थे. वह अपनी पत्नी टीना अंबानी एवं बच्चों के साथ वहां पहुंचे हुए थे. महाबलेश्वर प्रशासन ने कहा कि मामले को सत्यापित कर एक नोटिस जारी किया गया है, जिसके बाद गोल्फ कोर्स बंद कर दिया गया है.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड टीकाकरण: आम आदमी की ज़िंदगी के प्रति भारत सरकार इतनी बेपरवाह क्यों है

टीकाकरण अगर सफल होना है तो उसे मुफ़्त होना ही होगा, यह हर टीकाकरण अभियान का अनुभव है, तो भारत में ही क्यों लोगों को टीके के लिए पैसा देना पड़ेगा? महामारी की रोकथाम के लिए टीका जीवन रक्षक है, फिर भारत सरकार के लिए एक करदाता के जीवन का महत्त्व इतना कम क्यों है कि वह इसके लिए ख़र्च नहीं करना चाहती?

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

अदालत ने केंद्र से पूछा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र को मांग से अधिक पर दिल्ली को कम ऑक्सीजन क्यों

केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार अदालत के सवाल पर हलफ़नामा देगी और मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र को अधिक ऑक्सीजन देने का कारण बताएगी. इस बीच केंद्र ने राज्यों से शुक्रवार को कहा कि वे उपलब्ध ऑक्सीजन को महत्वपूर्ण वस्तु की तरह लें और निजी अस्पतालों समेत सभी अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत की समीक्षा करवाएं.

प्राइम हॉस्पिटल में लगी आग. (फोटो: पीटीआई)

महाराष्ट्र: ठाणे के निजी अस्पताल में आग लगने के बाद चार मरीज़ों की मौत

घटना ठाणे के समीप मुंब्रा इलाके में स्थित प्राइम क्रिटिकेयर हॉस्पिटल की है, जहां बुधवार तड़के आग लग गई. बताया गया है कि अस्पताल में कोई कोरोना संक्रमित मरीज़ नहीं था. स्थानीय विधायक जितेंद्र अव्हाड ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

महाराष्ट्र: एक एंबुलेंस में 22 शवों को भरकर श्मशान ले जाने का मामला सामने आया

महाराष्ट्र के बीड ज़िले के अंबाजोगाई में स्थित स्वामी रामानंद तीर्थ ग्रामीण राजकीय मेडिकल कॉलेज का मामला. मेडिकल कॉलेज के डीन ने कहा कि अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त एंबुलेंस नहीं हैं, जिसके कारण ऐसा हुआ. जिला प्रशासन को तीन एंबुलेंस मुहैया कराने के लिए पत्र लिखा गया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: राॅयटर्स)

महाराष्ट्र: अस्पताल में कोविड-19 के चार मरीज़ों की मौत, ऑक्सीजन की कमी का आरोप

महाराष्ट्र के ठाणे स्थित वेदांता अस्पताल का मामला. मृतकों के परिजन ने ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण क़रार दिया. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री एवं राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड ने ऑक्सीजन की कमी से मौत की बात से इनकार करते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. भाजपा नेता किरीट सोमैया ने कहा कि आग या ऑक्सीजन की वजह से सात ऐसी घटनाएं हुईं, जिसमें 150 कोविड मरीजों की मौत हो गई.

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कोविड-19: महाराष्ट्र में तीन दिनों के भीतर दो हादसे, लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन?

वीडियो: कोरोना वायरस के भीषण संक्रमण से जूझ रहे महाराष्ट्र में बीते 23 अप्रैल को एक और बड़ा हादसा हो गया. पालघर जिले में विरार के विजय वल्लभ कोविड अस्पताल में आग लग गई, जिसमें 14 मरीजों की मौत हो गई. इससे दो दिन पहले 21 अप्रैल को नासिक के कोविड-19 अस्पताल में ऑक्सीजन लीक हो जाने के बाद 24 लोगों जान चली गई थी.

(फोटो: रॉयटर्स)

कोविड-19 टीकाकरण के तीसरे चरण पहले कई राज्यों ने टीके के दाम और वितरण को लेकर सवाल उठाए

कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा शासित चार राज्यों ने केंद्र पर टीका निर्माताओं से मिले टीकों के स्टॉक पर क़ब्ज़ा करने का आरोप लगाते हुए इस बात पर संदेह जताया कि वे एक मई से 18-45 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण की शुरुआत कर पाएंगे. केंद्र सरकार ने टीकाकरण के तीसरे चरण के तहत एक मई से 18 साल से ऊपर सभी लोगों को कोविड टीका लगवाने की अनुमति दे दी है.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: राॅयटर्स)

महाराष्ट्र: शराब के तौर पर सैनेटाइज़र पीने से यवतमाल में छह लोगों की मौत

पूर्वी महाराष्ट्र में यवतमाल ज़िले के वाणी गांव का मामला. जिन लोगों की मौत हुई वे सभी मज़दूर बताए जा रहे हैं. यवतमाल ज़िला मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

नासिक अस्पताल में स्टोरेज यूनिट से लीक होती गैस. (फोटो: पीटीआई)

नासिक ऑक्सीजन हादसे पर कोर्ट ने कहा, सभ्य समाज में ऐसा कैसे हो सकता है

बीते 21 अप्रैल को नासिक में एक सरकारी कोविड-19 अस्पताल में भंडारण संयंत्र से ऑक्सीजन के रिसाव के बाद इस गैस की आपूर्ति बाधित होने से 22 कोरोना संक्रमितों की मौत हो गई थी. मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए थे.

अनिल देशमुख. (फोटो साभारः MahaDGIPR)

सीबीआई ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री के ख़िलाफ़ रिश्वतखोरी मामले में केस दर्ज किया

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच का अनुरोध करते हुए आपराधिक जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि देशमुख ने निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वझे समेत अन्य अधिकारियों को मुंबई के बार एवं रेस्तरां से प्रति माह 100 करोड़ रुपये की वसूली करने को कहा था. अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई को देशमुख ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर जांच शुरू करने के लिए पर्याप्त सामग्री मिली है.

Mumbai: A medic administers the first dose of Covishield vaccine to 87-year-old Dr. Asha Singhal, after the virtual launch of COVID-19 vaccination drive by Prime Minister Narendra Modi, at South Mumbai Nair Hospital in Mumbai, Saturday, Jan. 16, 2021. (PTI Photo)(PTI01 16 2021 000138B)(PTI01 16 2021 000224B)

सरकार बुज़ुर्गों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकती, घर पर टीकाकरण पर पुनर्विचार करे केंद्र: कोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट में दर्ज एक जनहित याचिका में 75 वर्ष से अधिक उम्र, विशेष रूप से सक्षम और बिस्तर या व्हीलचेयर पर रहने के लिए बाध्य लोगों को घर जाकर कोरोना वायरस रोधी टीका लगाने का आग्रह किया गया था. केंद्र ने कई कारणों का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया.