किसी इंसान पर जूता फेंकना तिरस्कार का चरम है. चमड़े का वह प्रहार किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि समानता के उस विचार पर लक्षित था, जो संविधान की आत्मा है. ऐसा लगा जैसे मनु का भूत राष्ट्र को फुसफुसाकर याद दिला रहा हो कि जातिगत पदानुक्रम आज भी जीवित है, भले ही आकाश धर्मनिरपेक्षता के रंग में रंगा हो.
सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई पर हुए हमले के विरोध में ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन और अंधेरी न्यायालय के वकीलों ने मुंबई में प्रदर्शन किया. एआईएलयू ने इसे न्यायपालिका पर आरएसएस-प्रेरित विचारधारा का हमला बताया और सीजेआई के ख़िलाफ़ जातीय पूर्वाग्रह का आरोप लगाया.
बेंगलुरु के पूर्व पुलिस आयुक्त रहे और अब भाजपा नेता भास्कर राव ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर वकील राकेश किशोर द्वारा जूता फेंकने का ज़िक्र करते हुए कहा था कि भले ही यह क़ानूनी रूप से और बेहद ग़लत हो, मैं इस उम्र में नतीजों की परवाह किए बिना, एक रुख अपनाने और उस पर चलने के साहस की प्रशंसा करता हूं. आलोचना के बाद उन्होंने इसके लिए माफ़ी मांग ली.
हिंदुत्व समर्थक सोशल मीडिया हैंडल लगातार सीजेआई बीआर गवई पर ‘एंटी-हिंदू’ होने के आरोप लगा रहे हैं, जातिवादी तस्वीरें साझा कर रहे हैं और यहां तक कि सीजेआई पर हुए हमले की निंदा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना कर रहे हैं. एक एआई वीडियो में तो सीजेआई के गले में मिट्टी का घड़ा टंगा दिखाया गया है. यह वही प्रतीक है जो सदियों से दलितों को अपमानित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.
अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. ने अटॉर्नी जनरल से उस अधिवक्ता के खिलाफ़ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की अनुमति मांगी है, जिसने सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की थी. कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट अधिनियम, 1971 की धारा 15 के तहत अवमानना केस के लिए अटॉर्नी जनरल से अनुमति लेना आवश्यक है.
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील राकेश किशोर ने कहा कि उन्हें अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है. उन्होंने दावा किया कि यह कदम ईश्वर की प्रेरणा से उठाया. किशोर ने गवई पर ‘सनातन धर्म’ के अपमान का आरोप लगाया है.
विपक्षी नेताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई पर हमले के प्रयास की कड़ी निंदा की है. इस घटना को अभूतपूर्व, शर्मनाक और घृणित बताते हुए कहा कि दक्षिणपंथ द्वारा फैलाया गया सांप्रदायिक और जातिवादी ज़हर इस हद तक पहुंच गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश, जो दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, को भी खुलेआम निशाना बनाया जा रहा है.
सुप्रीम कोर्ट में देश के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश महज़ एक सनकी हरकत नहीं, बल्कि हफ्तों से चल रहे दक्षिणपंथी अभियान का नतीजा मालूम पड़ता है. अजीत भारती जैसे हिंदू दक्षिणपंथी यूट्यूब क्रिएटर और अन्य लगातार सीजेआई गवई के ख़िलाफ़ नफ़रत फैला रहे थे.