बिहार में कई पिछड़ी जातियां हैं, जिनकी जनसंख्या अच्छी ख़ासी है लेकिन उन्हें उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. ये समुदाय अनुसूचित जाति का दर्जा और आरक्षण पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. कांग्रेस इस दलित केंद्रित राजनीति का धुरी बनना चाहती है. उसने रविदास समुदाय के नेता को प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया है. लेकिन क्या वह इन बिखरी जातियों को एकजुट कर पाएगी?
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद ने अपने तीन विधायकों को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है. तीनों विधायकों के जदयू में शामिल होने की संभावना है.
भीमराव आंबेडकर के दोनों पोते प्रकाश आंबेडकर और आनंद आंबेडकर ने उनके नाम बदलने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे भाजपा की वोट बैंक की राजनीति करार दिया है.