प्रदर्शनकारी बांग्लादेश में सरकारी नौकरियों के लिए समान अवसर की मांग कर रहे हैं, जहां मुक्ति संग्राम के सेनानियों, अल्पसंख्यकों और आदिवासी समुदायों के लिए विशेष आरक्षण की व्यवस्था है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस आरक्षण प्रणाली के कारण योग्य उम्मीदवारों को बड़ी संख्या में सरकारी रोज़गार से वंचित किया जा रहा है.
पिछले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फिलीस्तीन का झंडा लहराने पर कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया, हिरासत में लिया गया और उनसे पूछताछ की गई. श्रीनगर में मुहर्रम जुलूस में फिलीस्तीन के समर्थन और इज़रायल विरोधी नारे लगाने पर यूएपीए के तहत भी मामला दर्ज किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में कॉमन कॉज़ और सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच के दायरे में आने वाली कई कंपनियों ने सत्तारूढ़ दल को चुनावी बॉन्ड के माध्यम से बड़ी रकम चंदे में दी, जिसका उद्देश्य उनके ख़िलाफ़ जारी जांच के नतीजों को प्रभावित करना था. याचिका पर 22 जुलाई को सुनवाई होगी.
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को निर्देश दिया है कि वह हर परीक्षा केंद्र और शहर के हिसाब से सभी अभ्यर्थियों के अंक जारी करे.
असम पुलिस ने कछार ज़िले में 16 जुलाई को एक मुठभेड़ में तीन उग्रवादियों को मारने का दावा किया था. इनमें से एक 35 वर्षीय जोशुआ भी थे. उनके परिजनों ने मुठभेड़ को फर्ज़ी क़रार देते हुए कहा है कि वह मणिपुर के फेरज़ावल ज़िले के सेनवोन गांव के निवासी थे और अदरक, चावल तथा सब्जियों की खेती करते थे.
चंडीगढ़ से असम जाने वाली चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन के डिब्बे उत्तर प्रदेश के गोंडा शहर से 30 किलोमीटर दूर झिलाही और मोतीगंज रेलवे स्टेशनों के बीच पटरी से उतर गए. ट्रेन के लोको पायलट ने दावा किया है कि उन्हें ट्रेन के पटरी से उतरने के ठीक पहले एक विस्फोट की आवाज सुनाई दी थी.
लेखकों के वैश्विक संगठन पेन इंटरनेशल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति को सौंपी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में तमाम लेखकों, पत्रकारों, शिक्षाविदों और सरकार के अन्य आलोचकों की मनमाने ढंग से गिरफ़्तारियां करके उनका क़ानूनी उत्पीड़न किया जा रहा है और बिना मुक़दमों के लंबे समय तक हिरासत में रखा जा रहा है.
घटना सिद्धार्थनगर ज़िले की है. पुजारी ने पुलिस को बताया कि दोनों मुस्लिम युवकों का उसके साथ पहले से विवाद चल रहा था, इसलिए उन्हें झूठे आपराधिक मामले में फंसाने के लिए ख़ुद ही मंदिर की प्रतिमा तोड़कर पुलिस से शिकायत कर दी.
असम पुलिस ने कछार ज़िले में 16 जुलाई को मुठभेड़ में तीन उग्रवादियों को मारने का दावा किया था. अब पूर्वोत्तर के हमार जनजाति के शीर्ष संगठन हमार इनपुई ने घटना की निंदा करते हुए इन्हें 'न्यायेतर हत्याएं' करार दिया है, जहां गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर ही उन्हें मुठभेड़ में मार गिराया गया.
मुज़फ़्फ़रनगर के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि इस फ़ैसले के पीछे का कारण यह सुनिश्चित करना है कि कांवड़ियों के बीच किसी भी प्रकार का कोई भ्रम न हो. गौरतलब है कि बीते दिनों मुज़फ़्फ़रनगर के भाजपा विधायक ने कहा था कि मुसलमानों को कांवड़ यात्रा में अपनी दुकानों का नाम हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर नहीं रखना चाहिए.
स्वयंभू बाबा नारायण साकार हरि उर्फ भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ में इस महीने की शुरुआत में 121 लोगों की मौत हो गई थी, जिसे उन्होंने उनके संगठन को बदनाम करने के लिए रची गई साज़िश बताया है.
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में इस साल कुल 17,308 छात्र नौवीं कक्षा में दूसरी बार फेल हो गए हैं, जिसके चलते अब आम आदमी पार्टी सरकार उन्हें नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओपन स्कूल में शिफ्ट कर आगे की पढ़ाई जारी रखने पर मजबूर कर रही है. सरकार के इस कदम की शिक्षाविदों और अभिभावकों ने की निंदा की है.
जम्मू कश्मीर के पुलिस प्रमुख डीजीपी आरआर स्वैन ने दावा किया है कि कश्मीर के मुख्यधारा के नेताओं के आतंकवाद से जुड़े होने के 'पर्याप्त सबूत' हैं. इसके विरोध में कश्मीर के राजनीतिक दलों ने उन पर एक विशेष राजनीतिक विचारधारा और राजनीतिक दल के लिए काम करने का आरोप लगाया है.
सितंबर-नवंबर 2022 में जबलपुर में हुई अग्निपथ की परीक्षा पर अभ्यर्थियों ने धांधली का आरोप लगाया है. हाल ही में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सेना को निर्देश दिया है कि इस भर्ती के दौरान चयनित हुए सभी उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों का ख़ुलासा किया जाए.
इस साल मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत लगभग 8 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को दो महीने के भीतर राशन कार्ड जारी करने का आदेश दिया था. शीर्ष अदालत ने देरी पर नाराज़गी जताते हुए पूछा कि आखिर चार महीनों में सत्यापन की प्रक्रिया को पूरा क्यों नहीं किया जा सका?