मोदी 2.0 के पहले साल में लोकतंत्र को ही क्वारंटीन कर दिया गया है

लोकतंत्र के प्रति मोदी सरकार का निरादर भाव काफी गहरा और व्यापक है और यह हर उस संस्था तक फैल चुका है, जिसका काम कार्यपालिका की शक्ति पर अंकुश लगाकर उसे नियंत्रण में रखना है.

क्या नीतीश कुमार फिर एनडीए से अलग होने की तैयारी कर रहे हैं?

उचित प्रतिनिधित्व न मिलने के कारण नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से जदयू के इनकार और बिहार राज्य कैबिनेट विस्तार में किसी भाजपा नेता को जगह न देने के सियासी घटनाक्रम को दोनों पार्टियों के बीच बढ़ती खटास के तौर पर देखा जा रहा है.

मोदी 2.0: नई बोतल में पुरानी शराब?

यह देखना दिलचस्प होगा कि नरेंद्र मोदी सारी सत्ता व अधिकार अपनी मुट्ठी में क़ैद रखने की अपने पिछले कार्यकाल की रीति-नीति बदलने में कोई दिलचस्पी रखते हैं या नहीं?