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गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की सलाह देने वाले जज ने कहा, मोर ब्रह्मचारी है, इसलिए राष्ट्रीय पक्षी

हिंगोनिया गोशाला मामले पर फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के जज महेश चंद्र शर्मा ने यह भी सुझाव दिया कि गोहत्या पर आजीवन कारावास की सज़ा दी जाए.

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जयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते जस्टिस शर्मा. (फोटो साभार: सीएनएन न्यूज 18)

बुधवार को ही रिटायर हुए न्यायाधीश शर्मा ने न्यूज चैनल सीएनएन न्यूज 18 से बातचीत में कहा, ‘हमने मोर को राष्ट्रीय पक्षी क्यों घोषित किया है. मोर आजीवन ब्रह्मचारी रहता है. इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुग कर गर्भवती होती है. मोर कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता. मोर पंख को भगवान कृष्ण ने इसलिए लगाया क्योंकि वह ब्रह्मचारी है. साधु संत भी इसलिए मोर पंख का इस्तेमाल करते हैं. मंदिरों में इसलिए मोर पंख लगाया जाता है. ठीक इसी तरह गाय के अंदर भी इतने गुण हैं कि उसे राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए.’

शर्मा ने कहा, ‘भगवान कृष्ण जब धरती पर आए तो उन्होंने आने से पहले वृंदावन में गाय को उतारा, गोवर्धन में गाय को उतारा…उन्हें पता था कि हमारा जो वैद्य होगा, जो डॉक्टर होगा वह गाय ही होगी. गाय के दूध से सब प्रकार की बीमारियां समाप्त होती हैं…सात्विक प्रवृत्ति बढ़ती है, धार्मिकता बढ़ती है. यह गाय के दूध के महत्व की बात है. मैंने अपने फैसले में गाय के बारे में ऋगवेद, सामवेद, यदुर्वेद, रामायण, गीता और महाभारत का जिक्र करते हुए लिखा है कि गाय का आदमी के लिए क्या महत्व है.’

शर्मा ने कहा, ‘गाय मरने के बाद भी काम आती है. गाय का गोबर भी काम आता है. गाय का मूत्र भी काम आता है. गाय का दूध, हड्डियां भी काम आती हैं. तांत्रिक प्रयोग के लिए भी गाय काम में आती है.’