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माने​सर प्लांट हिंसा: 117 मज़दूरों को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी हरियाणा सरकार

साल 2012 में मारुति के मानेसर संयंत्र में हुई हिंसा मामले में अदालत ने 13 मज़दूरों को उम्रक़ैद और 117 को बरी करने का फैसला सुनाया था.

Police officials walk outside the Maruti Suzuki's plant in Manesar, located in the northern Indian state of Haryana, July 19, 2012. Police were searching on Thursday for 3,000 people they want to detain after one person was killed and scores injured in a riot at the Maruti Suzuki factory in Manesar. Hundreds of police have secured the plant, arresting 88 people after property was smashed and parts of the factory set on fire during Wednesday's violence, police said. REUTERS/Ahmad Masood (INDIA - Tags: BUSINESS CIVIL UNREST MILITARY TRANSPORT)

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

चंडीगढ़: हरियाणा सरकार गुरुग्राम की निचली अदालत द्वारा 2012 में मारुति सुजुकी कंपनी के मानेसर संयंत्र में एक एचआर (मानव संसाधन) अधिकारी की मौत के मामले में 117 पूर्व कर्मचारियों को बरी करने के फैसले को चुनौती देगी.

इस साल मार्च में गुरुग्राम की निचली अदालत ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के 31 कर्मचारियों को उस हिंसा के लिए दोषी क़रार दिया था जिसमें 100 से अधिक दूसरे कर्मचारी घायल हुए थे.

उपरोक्त 31 कर्मचारियों में से 13 को हत्या का भी दोषी क़रार दिया गया था. अदालत ने कंपनी के 117 कर्मचारियों को बरी कर दिया था.

हरियाणा के महाधिवक्ता बलदेव राज महाजन ने बृहस्पतिवार को कहा कि फैसले के ख़िलाफ़ अपील तैयार कर ली गई है. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की छुट्टियां ख़त्म होते ही अपील वहां दायर कर दी जाएगी.

महाजन ने कहा, हमने (बरी करने से संबंधित) निचली अदालत के फैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर करने का फैसला किया है.

बरी करने के फैसले को चुनौती देने के अलावा राज्य सरकार दंगा करने, घुसपैठ करने, नुकसान पहुंचाने और दूसरे संबंधित अपराधों के लिए दोषी क़रार दिए गए 18 कर्मचारियों की सज़ा बढ़ाने की भी मांग करेगी. उन्हें तीन से पांच साल की जेल की सज़ाएं मिली हैं.

एक कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर अगस्त, 2012 में मानेसर संयंत्र में हिंसा शुरू हो गई थी. इस दौरान गुस्साए कर्मचारियों ने वहां उपद्रव मचाया, कारखाने के एक हिस्से में आग लगा दी, वरिष्ठ मानव संसाधन प्रबंधक एके देव को जलाकर मार दिया और 100 अन्य को बुरी तरह पीटा.

कुल 148 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया और उन पर देव की हत्या का मामला दर्ज किया गया.

बीते 19 मार्च को फैसला सुनाते हुए अदालत ने 13 मज़दूरों पर हत्या, हत्या की कोशिश और सबूतों से छेड़छाड़ और आपराधिक षड्यंत्र रचने का दोषी पाते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी.

बाकी बचे 18 मज़दूरों में से चार को पांच साल कारावास की सज़ा मिली है और 14 मज़दूरों को 2500 रुपये प्रति मज़दूर के मुचलके पर कोर्ट ने रिहा करने का फैसला सुनाया गया था.

जिन 13 मज़दूरों को उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई उनमें राम मेहर, संदीप ढिल्लन, राम बिलास, सरबजीत सिंह, पवन कुमार, सोहन कुमार, प्रदीप गुर्जर, योगेश कुमार, अजमेर सिंह, जिया लाल, अमरजीत, प्रदीप कुमार और धनराज भांबी शामिल हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)