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कोरोना: मानवाधिकार संस्था ने कहा, राजनीतिक बंदियों समेत अन्य क़ैदियों को रिहा करना चाहिए

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने ख़ासकर उन लोगों को जिन्हें ज़्यादा ख़तरा है, जैसे- गर्भवती महिलाएं, मधुमेह पीड़ित, बुजुर्ग कैदी, छोटे-मोटे अपराध में बंद कैदी और ऐसे लोग जो अपनी सज़ा करीब-करीब पूरी कर चुके हैं, उन्हें भी रिहा करने की सिफ़ारिश की है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र की मानावाधिकार संस्था ने दुनिया के देशों से अनुरोध किया है कि राजनीतिक बंदियों समेत बिना समुचित कानूनी आधार के हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया किया जाए.

संस्था ने कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए कैदियों पर करीबी नज़र रखने और क्षमता से अधिक कैदियों वाली जेलों में इनकी संख्या घटाने पर जोर दिया है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविले ने कहा कि हाल में कि कुछ देशों ने अलग-अलग संख्या में कैदियों को रिहा करने की बात कही थी.

कोलविले ने खास कर उन लोगों को जिन्हें ज्यादा खतरा है, जैसे कि गर्भवती महिलाएं, मधुमेह से पीड़ित लोग, बुजुर्ग कैदी, छोटे-मोटे अपराध के लिए जेलों में बंद कैदी और ऐसे लोग जो अपनी सज़ा करीब-करीब पूरी कर चुके हैं या ऐसे लोग जिन्हें समाज में आसानी से वापस भेजा जा सकता है, उन्हें रिहा करने की सिफारिश की है.

कोलविले ने कहा, ‘हम राष्ट्रों से राजनीतिक बंदियों सहित बिना समुचित प्रमाण के हिरासत में लिए गए लोगों और गंभीर स्थिति में रह रहे लोगों को रिहा करने का अनुरोध करते हैं.’

महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सोमवार को कहा था, ‘संयुक्त राष्ट्र प्रमुख का मानना है कि कोविड-19 संक्रमण के दौर में सदस्य देश कैदियों पर करीबी नज़र रखें.’

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक कश्मीर में बंदियों की रिहाई के बारे में पूछे गए एक सवाल का दुजारिक जवाब दे रहे थे.

इसके पहले कोलविले ने कहा, यूएन संस्था तमाम देशों से आग्रह करती है कि कोविड-19 के फैलाव को रोकने के लिए जेलों में कैदियों के बीच दूरी बने रहे, इसे सुनिश्चित करें.

उन्होंने बताया कि ईरान ने लगभग एक लाख बंदियों को जेलों से रिहा किया जो कि कैदियों की कुल संख्या का 40 प्रतिशत है. इंडोनेशिया ने भी ड्रग सेवन समेत छोटे-मोटे अपराधों के लिए जेलों में बंद 30 हज़ार कैदियों को रिहा करने की घोषणा की.

उन्होंने कहा, ‘भारत और तुर्की भी इस बात पर गौर कर रहे होंगे या कैदियों की एक बड़ी संख्या को रिहा करने के प्रक्रिया शुरू कर चुके होंगे.’

बता दें कि कोरोना वायरस के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने भारत की जेलों में भी कैदियों की संख्या को कम करने के लिए राज्यों से उन कैदियों को पैरोल या अंतरिम जमानत पर रिहा करने के लिए विचार करने को कहा था जो अधिकतम 7 साल की सजा काट रहे हैं.

छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए राज्य की विभिन्न जेलों से अब तक 584 कैदियों को पैरोल और अंतरिम जमानत पर तथा सजा पूरी करने पर रिहा किया है.

वहीं कर्नाटक सरकार ने भी जेलों में भीड़ को कम करने के लिए विभिन्न जेलों से 606 विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत और 230 दो‌षियों को पैरोल दे दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)