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राहत पैकेज की घोषणा के दो हफ्ते बाद भी करीब दो करोड़ लोगों को पीएम किसान का पैसा नहीं मिला

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज के तहत घोषणा की थी कि 8.69 करोड़ किसानों को पीएम-किसान का 2000 रुपया तत्काल प्रभाव से दिया जाएगा. हालांकि अभी तक 7.1 करोड़ किसानों को ही इसका लाभ मिला है.

(फोटो: पीटीआई)

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नई दिल्ली: कोरोना वायरस के कारण उपजे संकट से राहत देने के लिए पिछले महीने 26 मार्च को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना पैकेज की घोषणा की थी. इसके तहत साल 2020-21 के पीएम-किसान की पहली किस्त ‘तत्काल प्रभाव’ से 8.69 करोड़ किसानों को दी जानी थी.

हालांकि इस पैकेज की घोषणा के दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी अभी तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा किसानों को पीएम किसान की पहली किस्त के रूप में 2,000 रुपये नहीं मिले हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा द वायर के कबीर अग्रवाल को मुहैया कराई गई आंकड़ों के मुताबिक 11 अप्रैल 2020 तक में 7.1 करोड़ किसानों को ही पहली किस्त का लाभ मिला है.

इसका मतलब ये हुआ कि 1.59 करोड़ किसानों को अभी तक पीएम-किसान की पहली किस्त मिलनी बाकी है. मंत्रालय ने कहा कि 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा किए जाने के बाद से 15,400 करोड़ की पीएम-किसान राशि का भुगतान किया जा चुका है.

इसमें से 1,675 करोड़ रुपये पिछले साल के हैं और 13,726 करोड़ रुपये साल 2020-21 के हैं.

जब निर्मला सीतारमण ने राहत पैकेज की घोषणा की थी तभी द वायर ने अपनी रिपोर्ट में इस ओर ध्यान दिलाया था कि पीएम-किसान का ये 2,000 रुपया कोई अलग से आवंटित राशि का हिस्सा नहीं है. बल्कि तय नियम के मुताबिक अप्रैल के पहले हफ्ते में इस राशि को वैसे भी किसानों के खाते में भेजा जाना था.

पीएम-किसान योजना के तहत एक साल में तीन किस्तों के जरिए 2,000-2,000 रुपये किसानों के खाते में डालने का प्रावधान है.

हालांकि पहले के मुकाबले इस बार काफी तेजी से किसानों के खाते में पैसे डाले गए हैं, अन्यथा पहले के उदाहरण दर्शाते हैं कि अभी भी बड़ी संख्या में किसानों की पिछली किस्तें बकाया है. हालांकि पीएम-किसान के तहत लाभार्थियों की वास्तविक संख्या 8.69 करोड़ नहीं है.

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पीएम किसान के तहत देश में कुल 14.5 करोड़ अनुमानित लाभार्थी हैं. इसमें से राज्यों ने अभी तक कुल 9.89 करोड़ किसानों की ही जानकारी केंद्र को भेजी है. इसमें से भी अभी तक कुल 9.22 करोड़ किसानों की जानकारियों का मूल्यांकन किया जा चुका है.