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वीडियोकॉन के चेयरमैन वेणुगोपाल धूत के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

सीबीआई ने तेल मंत्रालय की शिकायत के बाद एफ़आईआर दर्ज की है. जांच में पता चला कि 2008 में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज़ की सब्सीडियरी वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग लिमिटेड ने मोज़ाम्बिक में एक अमेरिकी कंपनी से तेल और गैस ब्लॉक में ग़लत तरीके से 10 फ़ीसदी भागीदारी हासिल की.

वेणुगोपाल धूत. (फोटो साभार: ट्विटर)

वेणुगोपाल धूत. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्लीः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने वीडियोकॉन समूह के अध्यक्ष वेणुगोपाल धूत के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार को लेकर मामला दर्ज किया है.

अधिकारियों ने बताया कि धूत पर मोज़ाम्बिक में अपनी तेल एवं गैस परिसंपत्तियों को वित्त प्रदान करने में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) नीत बैंकों के एक समूह के अज्ञात अधिकारियों की मिलीभगत के साथ भ्रष्टाचार करने के आरोप हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धूत के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक षडयंत्र के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा सीबीआई ने बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है.

सीबीआई द्वारा इससे पहले पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, ओनएजीसी विदेश, ऑयल इंडिया लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम रिसोर्सेज लिमिटेड और बैंकों के समूह के अज्ञात अधिकारियों की शुरुआती जांच के पूरा होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है.

जांच एजेंसी ने तेल मंत्रालय की एक शिकायत पर शुरुआती छानबीन के बाद प्राथमिकी दर्ज की है.

छानबीन में यह पाया गया कि 2008 में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) की सब्सीडियरी कंपनी वीडियोकॉन हाइड्रोकार्बन होल्डिंग लिमिटेड (वीएचएचएल) ने मोज़ाम्बिक में अमेरिकी कंपनी अनादारको से रोउमा क्षेत्र 1 ब्लॉक में तेल एवं गैस ब्लॉक में 10 प्रतिशत भागीदारी रुचि हासिल की थी.

मोज़ाम्बिक स्थित परिसंपत्ति को बाद में ओएनजीसी विदेश लिमिटेड और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जनवरी 2014 में खरीद लिया था.

अप्रैल 2012 में एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के एक समूह ने मोज़ाम्बिक, ब्राजील और इंडोनेशिया में अपने तेल एवं गैस परिसंपत्तियों के विकास के लिये ‘स्टैंडबाय लेटर ऑफ क्रेडिट’ (एसबीएलसी) सुविधा दी. साथ ही इस संबंध में वित्त आवंटन की अन्य जरूरतों को भी पूरी किया.

बैंकों के इस समूह में आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक भी शामिल थे.

हालांकि इस ऋण के एक हिस्से को ‘री-फायनेंस’ किया गया, जिसमें स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (एससीबी), लंदन का 40 करोड़ डॉलर का बकाया भी शामिल है.

लगभग 10 महीने बाद वीआईएल ने बैंकों के समूह से कहा कि एससीबी का ऋण बढ़ गया है, उसने इसका भुगतान करने का अनुरोध किया और तेल एवं गैस परिसंपत्ति का प्रभार संभाल लिया.

समूह ने बढ़ी हुई रकम को बगैर जांच किए कथित तौर पर मंजूरी प्रदान कर दी.

एजेंसी ने आरोप लगाया, ‘तथ्यों एवं प्रथम दृष्टया परिस्थितियों से यह प्रदर्शित होता है कि एसबीआई के नेतृत्व में ऋण दाता बैंकों के अज्ञात अधिकारियों ने वेणुगोपाल धूत के साथ साजिश रच कर वीएचएचएल को एससीबी से सुविधा का लाभ उठाना जारी रखने दिया. इस तरह से वीडियोकॉन को गलत तरीके से फायदा हुआ तथा भारतीय सार्वजनिक उपक्रम बैंकों को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाया गया.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)