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यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर में लॉकडाउन के कारण ढाबा बंद होने से परेशान शख़्स ने की आत्महत्या

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के चरथावल थाने के तहत आने वाले कुटेसरा गांव में एक युवती ने शादी के दो बाद ससुराल में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है.

(फोटो साभार: India Rail Info)

(फोटो साभार: India Rail Info)

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में 48 वर्षीय ढाबा मालिक ने मंसूरपुर रेलवे स्टेशन के समीप एक ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली. उधर, जिले के कुटेसरा गांव में एक नवविवाहिता ने शादी के दो दिन बाद कथित तौर पर आत्महत्या कर ली.

पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि मृतक श्याम कुमार के परिवार ने बताया कि वह कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए लॉकडाउन के दौरान अपना ढाबा बंद होने के कारण कथित तौर पर परेशान थे.

पुलिस ने बताया कि उन्होंने बुधवार को एक मालगाड़ी के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली.

एक अन्य घटना में कोतवाली पुलिस थाने के तहत आने वाले पिन्ना गांव के समीप रजवाहे के पास बुधवार को एक शव बरामद हुआ.

पुलिस ने बताया कि अभी शव की पहचान नहीं की गई है और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है. मामले की छानबीन की जा रही है.

इस बीच एक अन्य घटना में जिले के चरथावल पुलिस थाने के तहत आने वाले कुटेसरा गांव में 21 वर्षीय नवविवाहिता ने खुदकुशी कर ली.

पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि नेहा बुधवार शाम को अपने कमरे में पंखे से लटकी हुई पाई और उसने सुसाइड नोट में कहा कि उसके ससुराल वाले निर्दोष हैं और उसकी मौत के जिम्मेदार नहीं हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया और मामले की जांच चल रही है.

नेहा की 29 जून को सचिन (22) से शादी हुई थी.

पुलिस ने बताया कि घटना का पता तब चला जब वह अपने कमरे से बाहर नहीं निकली और उसके ससुराल वाले उसे देखने कमरे में गए तो उन्होंने उसे पंखे से लटका पाया.

बता दें कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगातार कोरोना वायरस और लॉकडाउन से बनी परिस्थितियों में आत्महत्या की खबरें आ रही हैं. बांदा जिले में लॉकडाउन के दौरान 19 से 20 लोगों के आत्महत्या करने की खबरें आ चुकी हैं.

बीते 25 जून को बांदा और चित्रकूट जिलों अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों ने आत्महत्या कर ली थी.

बीते 23 जून को बांदा जिले की नगर कोतवाली क्षेत्र के पडुई गांव में एक युवती ने अपने घर के शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

23 वर्षीय युवती सरोज ने स्नातक की पढ़ाई की हुई थी. उनकी मां यशोदा और भाई विक्रम गुजरात में मजदूरी करने गए हैं और वहां से नहीं आ पाए हैं. बबेरू में उसके रिश्ते की बात चल रही थी, लेकिन मां और भाई की वापसी न हो पाने पर रिश्ते को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था.

बीते 19 जून को बांदा जिले के चिल्ला ही महेड़ गांव में एक 17 वर्षीय लड़की ने घर में जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी. बीते पांच जून को मुज़फ्फरनगर जिले में लॉकडाउन की वजह से आर्थिक तंगी से परेशान एक गन्ना किसान ने आत्महत्या की थी. उनकी पहचान 50 वर्षीय ओमपाल सिंह के रूप में हुई थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)