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यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर के मठ से 10 बच्चों को छुड़ाया गया, चार के यौन शोषण की पुष्टि

मामला मुज़फ़्फ़रनगर के शुक्रताल के गौड़ीय मठ का है, जहां बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार की शिकायत पर पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने दस नाबालिगों को मुक्त कराया था. बच्चों ने आश्रम के प्रबंधक भक्ति भूषण महाराज पर शराब पिलाने के बाद अश्लील वीडियो दिखाकर यौन शोषण करने के आरोप लगाए हैं.

Muzaffarnagar

मुजफ्फरनगरः उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में गौड़ीय मठ से 10 बच्चों को मुक्त कराया गया था. इन बच्चों ने मठ के प्रबंधक भक्ति भूषण गोविंद महाराज पर यौन उत्पीड़न, अमानवीय व्यवहार करने और जबरन मजदूरी करने के आरोप लगाए हैं.

जिला बाल कल्याण समिति ने इस मामले की जांच के लिए गुरुवार को जांच शुरू की.

अमर उजाला की खबर के अनुसार, मुक्त कराए बच्चों की मेडिकल जांच में चार बच्चों का यौन शोषण किए जाने की पुष्टि हुई है.

आश्रम के मालिक भक्ति भूषण गोविंद महाराज के खिलाफ आईपीसी की धारा 377 और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

जिलाधिकारी  सेल्वा कुमारी जे ने बताया कि यह गंभीर मामला है. बच्चों के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज कराकर चिकित्सीय परीक्षण कराया गया है. इस संबंध में आरोपी मठ संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है.

मालूम हो कि चाइल्ड लाइन के नंबर पर मठ में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार होने की शिकायत मिलने पर सात जुलाई को पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने इन दस बच्चों को मुक्त कराया था.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, गौड़िया मठ आश्रम से मुक्त कराए गए इन बच्चों की उम्र सात से 16 साल के बीच है और ये त्रिपुरा, मिजोरम और असम के हैं.

चाइल्ड हेल्पलाइन के सदस्यों के मुताबिक, इन बच्चों को शिक्षा प्रदान कराने के उद्देश्य से आश्रम लाया गया था लेकिन उन्हें आश्रम परिसर में उन्हें बर्तन साफ करने, गोबर उठाने, झाडू़ लगाने, खाने पकाने और जानवरों की देखरेख करने जैसे काम में लगा दिया.

मुजफ्फरनगर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कमलेश वर्मा ने बताया कि इन बच्चों ने आश्रम के प्रबंधक पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप लगाए थे.

वर्मा ने गुरुवार को कहा था कि इस संबंध में जल्द ही एक रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी.

सात बच्चों ने भक्ति भूषण गोविंद महाराज पर शराब पिलाकर अश्लील वीडियो दिखाकर यौन शोषण करने के आरोप लगाए हैं. बात न मानने पर भूखा रखने और पिटाई करने के भी आरोप लगाए गए है. चार बच्चों ने चोटों के निशान भी दिखाए.

वहीं, आश्रम के मालिक का कहना है कि यह आरोप गलत हैं और स्थानीय लोगों का उनके खिलाफ षडयंत्र का हिस्सा है क्योंकि स्थानीय लोग इस बात से गुस्से में था कि जमीन का एक बड़ा भाग आश्रम को दान में दिया गया था.

उन्होंने कहा, ‘आश्रम परिसर में सीसीटीव कैमरे लगे हैं, जिनकी जांच की जा सकती है. ये बच्चे यहां लंबे समय से रह रहे थे, अब स्थानीय लोगों ने इन बच्चों को ये सब कहने के लिए कहा है क्योंकि जमीन का एक हिस्सा आश्रम को दान में मिलने के बाद कुछ लोग गुस्से में थे और हम लोगों के लिए परेशानी खड़ा कर रहे हैं.’