राजनीति

कमज़ोर तबके की आवाज़ नहीं उठा सकती तो सदन में रहने का अधिकार नहीं: मायावती

बसपा प्रमुख मायावती इस्तीफा देने की बात करते हुए सदन से बाहर चली गईं. उनके समर्थन में कांग्रेस सदस्यों ने भी वॉकआउट किया.

New Delhi: BSP supremo Mayawati interacts with the media at Parliament house on the first day of the monsoon session in New Delhi on Tuesday. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_21_2015_000064B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सरकार की विफलताओं पर उसे संसद में घेरने की पूर्वयोजना के तहत आज विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला. राज्यसभा में बसपा प्रमुख मायावती ने सहारनपुर में दलितों के खिलाफ अत्याचार का मुद्दा उठाया और उस हिंसा को दलितों पर साजिशन हमला बताया.

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि वह समाज के जिस वर्ग से संबंध रखती हैं, अगर उन्हें उसी वर्ग की समस्याएं सदन में नहीं उठाने दी जातीं तो उन्हें उच्च सदन में रहने का कोई अधिकार नहीं है और मैं राज्यसभा से इस्तीफा दे दूंगी. इसके बाद मायावती राज्यसभा से बाहर चली गईं. उनके समर्थन में कांग्रेस के सभी सदस्यों ने भी सदन से वॉकआउट किया.

सदन से बाहर आकर पत्रकारों से भी उन्होंने कहा कि सहारनपुर में हिंसा के बाद वे इजाजत लेकर वहां गई थीं. उन्हें हेलीकॉप्टर से जाने की अनुमति नहीं दी गई. बाद में वे सड़क मार्ग से सहारनपुर गईं. मायावती ने आरोप लगाया कि दलितों पर अत्याचार के बाद हमें शब्बीरबुर जाने से रोका गया था.

गौवध को लेकर कथित तौर पर पीट पीट कर हत्या की हालिया घटनाओं, किसानों और अन्य मुद्दों को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण आज राज्यसभा की बैठक 11 बज कर 25 मिनट पर दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई.

विपक्ष ने सरकार पर दलितों, किसानों, अल्पसंख्यकों और कमजोर वर्ग के लोगों से जुड़े मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया जिसे खारिज करते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि वह हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है.

सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सरकार कहती है कि उसे जनादेश मिला है. उन्होंने कहा यह जनादेश सरकार को देश चलाने के लिए, दलितों, अल्पसंख्यकों, किसानों और कमजोर वर्गों के लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए मिला है, न कि इनका उत्पीड़न करने के लिए मिला है.

लोकसभा दिनभर के लिए स्थगित

संसद के मानसून सत्र के दूसरे दिन आज लोकसभा में विपक्षी सदस्यों द्वारा विभिन्न विषयों को लेकर किए गए हंगामे के कारण सदन की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब सवा 11 बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई.

सुबह सदन की बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमले, हिमाचल प्रदेश के शिमला और उाराखंड में बस दुर्घटनाओं, पूर्वोत्तर राज्यों में बाढ़ की विभीषिका समेत देश में पिछले कुछ महीनों में घटी विभिन्न घटनाओं के साथ ब्रिटेन के मैनचेस्टर में हुए एक हादसे, अफगानिस्तान के काबुल स्थित डिप्लोमेटिक एन्क्लेव पर आतंकी हमले आदि विदेश की दुर्घटनाओं का उल्लेख किया और सदन ने कुछ पल मौन रखकर इन आपदाओं और घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि दी.

इसके बाद जैसे ही अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराने का निर्देश दिया तो कांग्रेस, वाम दल, तृणमूल कांग्रेस समेत कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्य अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करने लगे.

कांग्रेस सदस्यों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था गौमाता तो बहाना है, कर्जमाफी से ध्यान हटाना है. कांग्रेस और वामदलों के सदस्यों को किसान संबंधी मुद्दे को उठाते हुए देखा गया. तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी कुछ कहना चाह रहे थे लेकिन भारी हंगामे के बीच उनकी बात सुनी नहीं जा सकी.

राजद सदस्य जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे थे. इस बीच विपक्षी सदस्य अपनी मांगों के समर्थन में अध्यक्ष के आसन के पास आकर नारेबाजी करने लगे. उधर कर्नाटक के भाजपा सांसद भी राज्य के ईमानदार अधिकारियों को संरक्षण देने की मांग कर रहे थे जहां कांग्रेस की सरकार है. शोर-शराबा थमता नहीं देख अध्यक्ष ने सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.