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कोविड-19: केंद्र ने अदालत को बताया, रासायनिक कीटाणुनाशक का छिड़काव मनुष्य के लिए हानिकारक

सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल एक जनहित याचिका में कोविड-19 के मद्देनज़र लोगों को कीटाणुमुक्त करने के लिए रासायनिक सुरंगों के इस्तेमाल और इसके उत्पादन रोक लगाने की मांग की गई है. इस पर अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि जब कीटाणुनाशकों का छिड़काव हानिकारक है तो इस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया.

कीटाणुनाशक सुरंगों से गुजरते लोग. (फोटो: पीटीआई)

कीटाणुनाशक सुरंगों से गुजरते लोग. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से पूछा कि उसने कोविड-19 के मद्देनजर लोगों को कीटाणुमुक्त करने के लिए रासायनिक सुरंगों (Disinfectant Tunnels) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया गया?

शीर्ष अदालत ने यह सवाल इस बात को ध्यान में रखते हुए पूछा कि रासायनिक कीटाणुनाशकों का छिड़काव शारीरिक और मानसिक रूप से हानिकारक है.

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोरोना वायरस के मद्देनजर कीटाणुनाशक सुरंगों का उपयोग करने की सिफारिश नहीं की गई है और यह मनुष्यों के लिए चिकित्सकीय और मनोवैज्ञानिक रूप से हानिकारक है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से सुरक्षा के मद्देनजर मनुष्यों के कीटाणुशोधन के लिए पराबैंगनी रोशनी के उपयोग को लेकर कोई सलाह या दिशानिर्देश जारी नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि किसी भी रासायनिक कीटाणुनाशक का छिड़काव मनुष्यों के लिए शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से हानिकारक है.

पीठ ने तब मेहता से पूछा कि जब कीटाणुनाशक सुरंगों का उपयोग खराब है तो केंद्र इस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगा रहा है.

मेहता ने कहा कि इस संबंध में उचित निर्देश जारी किए जाएंगे.

शीर्ष अदालत कानून के छात्र गुरसिमरन सिंह नरूला की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कीटाणुनाशक सुरंगों के इस्तेमाल, उत्पादन, इन्हें लगाने और इनके प्रचार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई थी.

कोरोना वायरस के मद्देनजर इन सुरंगों में इंसानों को रोगाणुमुक्त करने के लिए कार्बनिक कीटाणुनाशकों का छिड़काव किया जाता है अथवा उसका धुआं दिया जाता है.

याचिका में कहा गया, ‘कोविड-19 को रोकने की आड़ में कई स्वच्छता और कीटाणुनाशक उपकरण सामने आए हैं जो इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी होने का गलत दावा करते हैं.’

याचिका में कहा गया, ‘इनमें रोगाणु मारने वाली सुरंगें (Disinfectant Tunnels) शामिल हैं और इनमें रोगाणुमुक्त करने की धारणा के साथ उन पर पराबैंगनी किरणें डाली जाती है.’

याचिका में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस प्रकार के सुरंगों के खतरनाक प्रभाव के बारे में आगाह किया है.

केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्य का विषय हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों को लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की है और भारत सरकार की भूमिका आवश्यक मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करने तक सीमित है.

उसने कहा कि 9 जून को स्वास्थ्य सेवा के महानिदेशक की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति की बैठक हुई थी, जिसमें कीटाणुनाशक सुरंगों, विभिन्न रसायनों और कीटाणुनाशक के छिड़काव के ऐसे उपयोग के प्रभाव की समीक्षा की गई.

केंद्र ने कहा कि समिति ने दोहराया है कि कीटाणुनाशक का व्यक्तियों पर छिड़काव की सिफारिश नहीं की जाती है क्योंकि यह संक्रमित व्यक्ति की बूंदों या संपर्क के माध्यम से वायरस फैलाने की क्षमता को कम नहीं करेगा.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के उपसचिव द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि समिति ने आगे कहा कि स्वास्थ्य देखभाल और गैर-स्वास्थ्य देखभाल दोनों मामलों में कीटाणुनाशक का छिड़काव करने की सिफारिश नहीं की जाती है.

हलफनामे में आगे कहा गया, ‘यह भी देखा गया कि बंद जगहों में कोविड-19 के लिए कीटाणुनाशकों के नियमित प्रयोग की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि कीटाणु कार्बनिक पदार्थों को हटाने में प्रभावी नहीं हो सकते हैं.’

समिति ने कहा है कि सड़क या बाजारों जैसे बाहरी जगहों पर भी कोविड-19 वायरस को खत्म करने में के लिए छिड़काव की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि गंदगी और मलबे में कीटाणुनाशक निष्क्रिय हो जाता है. इसके साथ ही बाहर भी रोगाणनाशकों का छिड़काव मनुष्यों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है.

केंद्र ने कहा कि उसने मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया था, जहां यह बताया गया था कि व्यक्तियों पर रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है और उन्हें रासायनिक सुरंगों से गुजारा जा रहा है.