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उन्नाव रेप केसः सीबीआई ने की पूर्व डीएम और तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफ़ारिश

उन्नाव ज़िले के बांगरमऊ से भाजपा विधायक रहे कुलदीप सेंगर को जून 2017 में एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में उम्रक़ैद की सज़ा हुई है. सीबीआई ने 2017 में मामला दर्ज करने में लापरवाही बरतने के लिए उन्नाव की पूर्व जिलाधिकारी और तीन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई करने को कहा है.

Lucknow: BJP MLA from Unnao Kuldip Singh Sengar, accused in a rape case, surrounded by media persons outside the office of the Senior Superintendent of Police in Lucknow on Wednesday night. PTI Photo by Nand Kumar(PTI4_12_2018_000001B)

कुलदीप सेंगर. (फोटो: पीटीआई)

लखनऊः केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर चार अधिकारियों पर उचित कार्रवाई करने की सिफारिश की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने 2017 में सेंगर के खिलाफ बलात्कार के आरोप में एफआईआर दर्ज न करने के लिए उन्नाव की पूर्व जिलाधिकारी और तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा है.

सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि इस पत्र को अगस्त के दूसरे हफ्ते में सरकार के पास भेजा गया था लेकिन अभी तक इस पर कोई जवाब नहीं मिला है.

बता दें कि बलात्कार की यह घटना जून 2017 में हुई थी लेकिन पुलिस ने पीड़िता द्वारा लखनऊ में मुख्यमंत्री के आवास के पास आत्महत्या करने के प्रयास के चार दिन बाद 12 अप्रैल 2018 को एफआईआर दर्ज की थी.

इस मामले में सीबीआई ने उन्नाव की तत्कालीन जिलाधिकारी अदिति सिंह, पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुष्पांजलि और नेहा पांडेय के खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा है.

इन तीनों महिला अधिकारियों के अलावा सीबीआई ने उन्नाव के तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक अष्टभुजा प्रसाद सिंह को भी मामले में लापरवाही का दोषी पाया है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए सरकार को पत्र लिखा है.

2009 बैच की आईएएस अधिकारी अदिति सिंह 24 जनवरी 2017 से 26 अक्टूबर 2017 तक उन्नाव की डीएम थीं.

सीबीआई ने जांच में पाया कि बलात्कार पीड़िता ने अदिति सिंह से कई बार शिकायत की. पीड़िता ने कई बार उन्हें पत्र लिखे लेकिन डीएम ने उसके पत्र पर कोई कार्रवाई नहीं की.

2006 बैच की आईपीएस अधिकारी पुष्पांजलि सिंह उन्नाव में 27 अक्तूबर 2017 से 30 अप्रैल 2018 तक तत्कालीन एसपी थीं. इन पर भी पीड़िता की शिकायत पर कोई कार्रवाई न करने और मामले को दबाने का आरोप है.

2009 बैच की आईपीएस अधिकारी नेहा पांडेय उन्नाव में दो फरवरी 2016 से 26 अक्तूबर 2017 तक एसपी थीं.

सीबीआई ने जांच में पाया कि नेहा पांडेय ने भी अपने पद पर रहते हुए पीड़िता की कोई मदद नहीं की. वह बार-बार उन्हें पत्र लिखती रही और वह उसके पत्रों को नजरअंदाज करती रहीं.

सीबीआई अधिकारी का कहना है, ‘हमने पीड़िता और उनके परिवार द्वारा पुलिस से संपर्क करने पर शिकायत दर्ज नहीं करने के लिए चारों अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा है. इस पत्र को अगस्त के दूसरे हफ्ते में सरकार को भेजा गया था लेकिन अभी तक उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से हमें किसी तरह का जवाब नहीं मिला है.’

सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने फरवरी में राज्य सरकार को एक पत्र भेजा था लेकिन इस पत्र में अधिकारियों के नाम का खुलासा नहीं किया गया था.

इसके जवाब में सरकार ने सीबीआई से आरोपी अधिकारियों के नाम मांगे थे. इसके बाद सीबीआई ने सारी जानकारी जुटाकर पिछले महीने सरकार को दोबारा पत्र लिखा था.

बता दें कि आरोप है कि कुलदीप सेंगर ने चार जून 2017 को पीड़िता का बलात्कार किया था. उस समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी.

दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने उन्नाव बलात्कार मामले में दोषी ठहराए गए  सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.