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केंद्र और बिहार में ‘बंदी’ सरकारें, जिन्होंने नोटबंदी, आर्थिक व रोज़गार बंदी की: सोनिया गांधी

बिहार चुनाव राउंडअप: विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को 71 सीटों पर होगा मतदान. तेजस्वी यादव ने जताई महागठबंधन को दो तिहाई बहुमत मिलने की उम्मीद. जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बिहार की जनता जाति आधारित गोलबंदी से निकल चुकी है.

सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

सोनिया गांधी. (फोटो: पीटीआई)

पटना/नई दिल्ली/सकरा/ महनार/ महुआ/अरवल/नोखा: कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बिहार विधानासभा चुनाव में राज्य के मतदाओं से महागठबंधन को समर्थन देने की अपील करते हुए मंगलवार को कहा कि प्रदेश में बदलाव की बयार चल रही है और लोगों की आवाज राजद, कांग्रेस एवं वाम दलों के गठबंधन के साथ है.

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि केंद्र और बिहार में फिलहाल ‘बंदी सरकारें’ हैं जिन्होंने नोटबंदी, तालाबंदी, व्यापार बंदी, आर्थिक बंदी, खेत-खलिहान बंदी और रोटी-रोजगारबंदी की है.

सोनिया ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘आज बिहार में सत्ता और उसके अहंकार में डूबी सरकार अपने रास्ते से भटक गई है. न उनकी करनी अच्छी है, न कथनी. मज़दूर आज मजबूर है. किसान आज परेशान है. नौजवान आज निराश है.’

उन्होंने यह दावा भी किया, ‘अर्थव्यवस्था की नाज़ुक स्थिति लोगों के जीवन पर भारी पड़ रही है. धरती के बेटों पर आज गंभीर संकट है. दलितों और महादलितों को बदहाली के कगार पर लाकर छोड़ दिया गया है. समाज के पिछड़े वर्ग भी इसी बदहाली के शिकार हैं.’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘बिहार की जनता की आवाज कांग्रेस महागठबंधन के साथ है. यही है आज बिहार की पुकार.’

उन्होंने दावा किया, ‘दिल्ली और बिहार की सरकारें, ‘बंदी सरकारें’ हैं – नोटबंदी, तालाबंदी, व्यापारबंदी, आर्थिक बंदी, खेत-खलिहान बंदी, रोटी-रोजगार बंदी. इसीलिए, बंदी सरकार के खिलाफ – अगली नस्ल और अगली फसल के लिए, एक नए बिहार के निर्माण के लिए, बिहार की जनता तैयार है.’

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘अब बदलाव की बयार है. क्योंकि बदलाव जोश है, ऊर्जा है, नई सोच है और शक्ति है. अब नई इबारत लिखने का समय आ गया है.’

सोनिया के मुताबिक, बिहार के हाथों में गुण है, हुनर है, ताकत है, निर्माण की शक्ति है, लेकिन बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, भुखमरी ने उनकी आंखों में आंसू और पैरों में छाले दे दिए हैं. जो शब्द कहे नहीं जा सकते, उसे आंसुओं से कहना पड़ता है. भय, डर, खौफ, अपराध के आधार पर नीति और सरकारें खड़ी नहीं की जा सकतीं.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘बिहार भारत का आईना है, एक आशा है. भारत का विश्वास है, जोश है – जुनून है. बिहार के किसान, युवा, मजदूर, भाई और बहनें सिर्फ बिहार में नही बल्कि पूरे भारत और दुनिया के कोने कोने में हैं. आज वही बिहार अपने गांव, कस्बे, शहरों, खेतों और खलिहानों में अपनी शान और भविष्य के लिए नए बदलाव को तैयार है.’

सोनिया ने मतदाआों से अपील की, ‘आज वक्त है- अंधेरे से उजाले की ओर, झूठ से सच की ओर, वर्तमान से भविष्य की ओर बढ़ने का. ज्ञान की धरती कहे जाने वाले बिहार की जनता से मेरी अपील है कि वो महागठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दें और नए बिहार का निर्माण करें.’

पहले चरण में 71 सीटों होंगे मतदान, 1066 प्रत्याशी मैदान में

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए बुधवार को 71 सीटों पर मतदान होंगे और इसमें दो करोड़ अधिक मतदाता 1066 प्रत्याशियों के भविष्य का फैसला करेंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बीच मतदान सुरक्षित मतदान कराने के लिए चुनाव आयोग दिशानिर्देश जारी किए हैं.

इन दिशानिर्देशों के तहत 1600 से 1000 वाले मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या कम करना, मतदान के घंटे बढ़ाना और 80 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों या संक्रमण फैलाने के संदिग्ध लोगों के लिए पोस्टल बैलट की सुविधा उपलब्ध कराना शामिल है.

इसके अलावा, मतदान कर्मियों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का सैनिटाइजेशन, मास्क पहनना और अन्य सुरक्षात्मक उपकरण पहनना और थर्मल स्कैनर, हैंड सैनिटाइजर, साबुन और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.

चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, मतदान करने वाले 2.14 करोड़ मतदाताओं में से 1.01 करोड़ महिलाएं और 599 ट्रांसजेंडर हैं.

उम्मीदवारों में 952 पुरुष और 114 महिलाएं शामिल हैं, अधिकतम संख्या (27) गया टाउन में और बांका जिले के कटोरिया में न्यूनतम (5) हैं.

पहले चरण में जिन 71 सीटों पर मतदान होने जा रहे हैं उनमें नक्सल प्रभावित गया, रोहतास और औरंगाबाद सहित छह जिले शामिल हैं.

पहले चरण की 71 सीटों में प्रमुख पार्टियों में से राजद 42, जदयू 41, भाजपा 29, कांग्रेस 21 और लोजपा 41 सीटों पर चुनाव लड़ रही है.

मालूम हो कि विधानसभा की 243 सीटों के लिए तीन चरणों में 28 अक्टूबर, तीन नवंबर और सात नवंबर को मतदान होगा और मतगणना 10 नवंबर को होगी.

दो तिहाई बहुमत का विश्वास, कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक लाएंगे: तेजस्वी

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को दो तिहाई बहुमत मिलने की उम्मीद जताते हुए मंगलवार को कहा कि सरकार बनने के बाद युवाओं को नौकरियां देना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी तथा विधानसभा के पहले सत्र में केंद्रीय कृषि कानूनों को निष्प्रभावी बनाने के लिए विधेयक पारित किया जाएगा.

महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार ने यह भी कहा कि वह विधानसभा चुनाव में मुद्दा आधारित प्रचार अभियान चला रहे हैं जिससे जनता खुद को जोड़ पा रही है और 10 नवंबर को मतगणना वाले दिन ‘बिहार एक नए सवेरे का साक्षी बनेगा.’

यादव ने कहा कि इतिहास में पहली बार बिहार के युवाओं से यह वादा किया गया है कि कैबिनेट की पहली बैठक में पहली कलम से 10 लाख नौकरियां दी जाएंगी.

यह पूछे जाने पर कि वह 243 सदस्यीय विधानसभा में महागठबंधन के कितनी सीटें जीतने की उम्मीद कर रहे हैं तो उन्होंने कहा, ‘मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान जो जनसमर्थन मिल रहा है, उससे यह विश्वास मिलता है कि हमें बिहार की महान जनता का आशीर्वाद है और उन्होंने हमें बड़ी जिम्मेदारी देने का फैसला किया है.’

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री यादव ने उम्मीद जताई कि इस चुनाव में महागठबंधन को दो तिहाई बहुमत मिलेगा.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘मैं आपको विश्वास के साथ कह सकता हूं कि ज्यादातर सीटों पर राजग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होगी. 10 नवंबर को आइए, बिहार एक नए सवेरे का साक्षी बनेगा.’

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, सत्ता में आने के बाद उनकी पहली सबसे बड़ी प्राथमिकता युवाओं को नौकरियां देने की होगी.

उन्होंने कहा, ‘हमारी सरकार एक जिम्मेदार सरकार होगी जो एक प्रतिक्रियाशील प्रशासन देगी. रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग ऐसे क्षेत्र जिनकी नीतीश कुमार के 15 वर्षों के शासन में उपेक्षा की गई, हम इन क्षेत्रों का पुनरुत्थान और कायापलट करेंगे.’

लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान के साथ चुनाव बाद गठबंधन की संभावना से जुड़े प्रश्न के उत्तर में तेजस्वी यादव ने कहा कि पासवान पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वह भाजपा के साथ हैं और नीतीश की जगह भाजपा का मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं.

एआईएमआईएम, बसपा और रालोसपा के गठबंधन को लेकर उन्होंने कहा कि बिहार में सबसे ज्यादा राजनीतिक जागरुकता है तथा भाजपा के इन ‘ए, बी, सी पैराशूट गठबंधनों’ का इस चुनाव में कोई असर नहीं होगा.

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बनने के बाद वह भी पंजाब की तरह केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ विधेयक लाएंगे तो यादव ने कहा, ‘हां, निश्चित तौर पर हम विधानसभा के पहले सत्र में विधेयक लाएंगे जो इन तीन कृषि कानूनों को निष्प्रभवी करेगा. यह हमारे महागठबंधन के घोषणापत्र में भी है.’

राजद नेता ने यह दावा भी किया कि जनता में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर घोर नाराजगी है और यह स्थिति उनकी ‘सत्ता की लालसा और कोविड महामारी के समय बेरोजगारों, मजदूरों और गरीबों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये’ के कारण पैदा हुई है.

यह पूछे जाने पर कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार करने से राजग को फायदा मिलेगा तो यादव ने कहा कि बिहार की 12 करोड़ से अधिक जनता ने तय कर लिया है कि उन्हें बेरोजगारी, पलायन, भ्रष्टाचार, गरीबी और महंगाई जैसे जीवन के असल मुद्दों पर वोट करना है.

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद, कांग्रेस और वाम दल मिलकर चुनाव मैदान में उतरे हैं. कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ रही है तो राजद 144 और वाम दल 29 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं.

बिहार जाति की गोलीबंदी से बाहर निकल चुका है: वशिष्ठ नारायण सिंह

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि राजद नेता तेजस्वी यादव अपने पिता लालू प्रसाद के पदचिह्नों पर चलना चाहते हैं लेकिन बिहार की जनता ‘जाति आधारित गोलबंदी’ से बाहर निकलकर ‘विकास का रास्ता’ अपना चुकी है.

सिंह ने कहा, ‘बिहार उस छाया से निकल चुका है जहां सिर्फ जाति के आधार पर गोलबंदी होती थी. लेकिन तेजस्वी यादव आज भी अपने पिता (लालू प्रसाद) के पदचिह्नों पर चलना चाहते हैं. जातपात करने वाले ऐसे लोगों से प्रदेश के विकास की उम्मीद नहीं की जा सकती है.’

उन्होंने कहा कि आज बिहार की जनता विकास के रास्ते को अपना चुकी है, लोग सामाजिक रूप से जागरूक हुए हैं और हर चीज की विवेचना करने के बाद निर्णय करते हैं .

नीतीश कुमार के प्रति लोगों की नाराजगी के बारे में एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा, ‘नाराजगी नहीं है. कोई काम करता है तब उसी से लोगों की अपेक्षा रहती है, काम नहीं करने वाले से कोई अपेक्षा नहीं रहती है. नीतीश कुमार से लोगों की अधिक अपेक्षाएं हैं. समाज और सरकार में जब रिश्ता मजबूत हो जाता है, तब लोगों की सरकार से ऐसी ही अपेक्षाएं हो जाती हैं.’

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष ने राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि वह समय चला गया जब सरकार पोषित गुंडागर्दी होती थी, लूटपाट, अपहरण और फिरौती का कारोबार होता था .

तेजस्वी यादव की रैलियों में भारी भीड़ जुटने के बारे में पूछे जाने एक सवाल के जवाब में वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा, ‘भीड़ को वोट का पैमाना मानें तब नीतीश कुमार की रैली में भी कम भीड़ नहीं है. आज लोग अपने जीवन से जुड़ी सुविधाओं को देखते हैं, दिन प्रतिदिन के जीवन में होने वाले प्रभावों के आधार पर आकलन करते हैं.’

उन्होंने कहा कि कई बार नेताओं को देखने और सुनने की उत्सुकता में भी लोग रैली में चले जाते हैं .

तेजस्वी यादव के रोजगार देने के वादे के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जब से नीतीश कुमार की सरकार बनी है, तब से रोजगार मिले हैं और मुख्यमंत्री ने बिहार को इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है कि अब बिहार विकास की तरफ और तेजी से बढ़ेगा.

जदयू के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘नीतीश कुमार ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया. हर तबके के विकास के लिये काम किया. अब हर खेत तक सिंचाई के लिये पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा है जो राज्य में खुशहाली लाने का काम करेगा.’

उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में भारी बहुमत के साथ राजग की सरकार बनेगी.

नीतीश के हेलीकॉप्टर पर फेंकी गई चप्पल

मुजफ्फरपुर के सकरा में एक चुनावी रैली के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हेलीकॉप्टर की तरफ सोमवार को किसी व्यक्ति ने चप्पल फेंक दी. हालांकि, चप्पल हेलीकॉप्टर तक नहीं पहुंची.

पुलिस उपाधीक्षक (मुजफ्फरपुर पूर्वी) मनोज पांडेय ने बताया कि रैली के दौरान हेलीपैड पर खड़े मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की तरफ चप्पल फेंकी गई. उस समय मुख्यमंत्री मंच पर थे.

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की रैली में व्यवधान पैदा करने के आरोप में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है. चप्पल फेंकने की घटना के समय कुछ लोग नारेबाजी भी कर रहे थे.

गौरतलब है कि सकरा की रैली से पहले भी मुख्यमंत्री को कुछ रैलियों में विरोध की स्थिति का सामना करना पड़ा है. कुछ स्थानों पर कुमार ने शोरशराबा करने वालों पर नाराजगी भी व्यक्त की और उन पर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की शह पर काम करने का आरोप लगाया तथा कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है.

वैशाली के महनार में एक चुनावी सभा को संबोधित हुए नीतीश कुमार ने दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह के साथ अंतिम दिनों में राष्‍ट्रीय जनता दल में हुए व्‍यवहार का मुद्दा उठाकर विपक्षी राजद और उसके नेता तेजस्‍वी यादव को घेरने की कोशिश की तथा कहा कि ऐसे लोग अपने परिवार को छोड़कर और किसी को अपना नहीं मानते हैं.

महनार में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए नीतीश कुमार ने कहा, ‘जो रघुवंश बाबू 1990 से लगातार उनका (राजद) साथ देते रहे, उनके साथ कैसा व्यवहार किया. जब रघुवंश बाबू की तबीयत खराब थी तब उनके साथ कैसा व्‍यवहार किया गया.’

उन्होंने कहा कि रघुवंश बाबू से उनके संबंध जेपी आंदोलन और आपातकाल के समय से थे. केंद्र में मंत्री के तौर पर उन्होंने विशेष काम किया और जो कुछ उनसे संभव हुआ, उन्होंने किया.

सात निश्चय योजना में भ्रष्टाचार, लोजपा आई तो दोषी जाएंगे जेल: चिराग

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख चिराग पासवान ने बिहार सरकार के ‘सात निश्चय कार्यक्रम’ में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि यदि प्रदेश में उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो इस मामले में जो भी लोग दोषी पाए जाएंगे, वे जेल में होंगे.

अरवल में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे चिराग ने कहा कि यह योजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बनाई हुई है.

उन्होंने आरोप लगाया, ‘उनकी नाक के नीचे भ्रष्टाचार हो रहा है. अगर उन्हें (नीतीश को) जानकारी है तो दोषी वह भी हैं और वह भी जेल जाएंगे.’

चिराग ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी के बावजूद शराब की तस्करी जारी है. उन्होंने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, ‘इसकी तस्करी का पैसा मुख्यमंत्री की जेब में जाता है.’

चिराग ने कहा कि मुख्यमंत्री जानते हैं कि उनके द्वारा लागू की गई शराबबंदी विफल है.

रोहतास जिले के नोखा में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए चिराग ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ‘सात निश्चय’ के तहत पाइप के जरिए पेयजल, नाली और गली का निर्माण करने को लेकर ‘झूठ’ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘मुख्यमंत्री कहते हैं कि बिहार में कोई भ्रष्टाचार नहीं है, जबकि सात निश्चय में बिहार के इतिहास में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है.’

उन्होंने कहा, ‘इसलिए, हमने अपनी पार्टी के विजन डॉक्यूमेंट ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’ में उल्लेख किया है कि हमारी सरकार बनने पर सबसे पहले इस योजना के दस्तावेजों की जांच करायी जाएगी और दोषियों की पहचान कर चाहे मुख्यमंत्री या छोटे अधिकारी हों उन्हें जेल भेजा जाएगा.’

नीतीश कुमार ने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के विकास के लिए 2.70 लाख करोड़ रुपये की लागत ‘सात निश्चय योजना’ की घोषणा की थी.

इस योजना का उद्देश्य शिक्षा, कौशल विकास और शिक्षा ऋण के माध्यम से युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भर बनाना, सभी को बिजली कनेक्शन प्रदान करने के अलावा गांवों, हर घर में पानी पहुंचाना आदि है.

बिहार सरकार ने योजना को पांच वर्षों में लागू करने के लिए फरवरी 2016 में इसे मंजूरी दी थी.

उधर जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने चिराग पर राज्य के विपक्षी महागठबंधन का नेतृत्व कर रहे राजद के नेता तेजस्वी यादव के साथ साठ-गांठ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों तुच्छ लोकप्रियता हासिल करने और अपने राजनीतिक आस्तित्व को बचाने के लिए नीतीश कुमार के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने भी चिराग पर निशाना साधा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)