राजनीति

बिहार: नीतीश कुमार एनडीए विधायक दल के नेता चुने गए, लगातार चौथी बार बनेंगे मुख्यमंत्री

नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने राज्यपाल फागू चौहान से बिहार में सरकार बनाने का दावा किया है. उपमुख्यमंत्री के तौर पर अभी आधिकारिक तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक जनसभा. (फोटो साभार: फेसबुक/जदयू)

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की एक जनसभा. (फोटो साभार: फेसबुक/जदयू)

पटना: बिहार के पटना में रविवार को हुई एक बैठक में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार को एनडीए विधायक दल का नेता चुना गया है. इस तरह नीतीश कुमार अब लगातार चौथी बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे.

नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने राज्यपाल फागू चौहान से बिहार में सरकार बनाने का दावा किया है. उपमुख्यमंत्री के तौर पर अभी आधिकारिक तौर पर किसी का नाम नहीं लिया गया है.

नीतीश द्वारा अपने मंत्रालय का इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने और राज्य विधानसभा को भंग करने की सिफारिश के दो दिन बाद यह बैठक हुई.

भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एवं महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस की मौजूदगी में मुख्यमंत्री आवास-एक, अणे मार्ग पर राजग के घटक दलों की संयुक्त बैठक हुई.

इस बैठक में कुमार के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी के चुनाव प्रभारी देवेंद्र फड़णवीस, पार्टी के प्रदेश प्रभारी भूपेंद्र यादव, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) नेता जीतन राम मांझी और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) पार्टी के नेता मुकेश सहनी शामिल हुए.

भाजपा के पर्यवेक्षक बनाये गए वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह पटना पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. इससे पहले भाजपा विधायक दल की बैठक को टाल दिया गया था, जो सुबह 10 बजे होनी थी.

मुख्यमंत्री आवास पर ही भाजपा विधायक दल की बैठक में कटिहार से नवनिर्वाचित विधायक तारकेश्वर प्रसाद को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया है. वहीं रेणु देवी को उपनेता चुना गया.

एनडीए की बैठक से पहले भाजपा विधायकों की राज्य पार्टी अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ पटना में बैठक हुई थी.

जदयू के वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने संवाददाताओं से कहा, ‘कल (सोमवार) का दिन बेहद शुभ है.’ इससे पहले जदयू विधायक दल की बैठक हुई. सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में नीतीश कुमार को जदयू विधायक दल का नेता चुना गया.

इधर, नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए राजद नेता मनोज झा ने कहा कि जनमत उनके खिलाफ है, वो मुख्यमंत्री कैसे बन सकते हैं?

झा ने कहा, ‘कोई भी 40 सीट पाने के बाद कैसे मुख्यमंत्री बन सकता है. जनता का मत उनके खिलाफ है. उनका जनमत बहुत कमजोर है और उन्हें इस पर निर्णय लेना चाहिए. बिहार को अपना विकल्प मिलेगा, जो कि स्वत: स्फूर्त होगा. इसमें एक हफ्ता, दस दिन या एक महीना लग सकता है, लेकिन यह जरूर होगा.’

उन्होंने यह भी कहा, ‘जनता जनार्दन के ‘फैसले’ और प्रशासन द्वारा जारी ‘नतीजों’ के बीच के फासले को समझने के लिए ज़रूरी है कि ‘जनादेश प्रबंधन’ की अद्भुत कला को समझा जाए. ये कला सबको उपलब्ध नहीं है, इसलिए बिहार के युवा, संविदाकर्मी, नियोजित शिक्षक स्तब्ध है. बिहार अभी ‘खुला’ हुआ है.’

मालूम हो कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से प्रदेश में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) यानी कि एनडीए ने 125 सीटें जीती हैं. राजग को बहुमत के आंकड़े से तीन सीटें अधिक मिली हैं, वहीं राजद के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन ने 110 सीट जीती हैं.

बिहार में सत्ताधारी राजग (एनडीए) में शामिल भाजपा ने 74 सीटों पर, जदयू ने 43 सीटों पर, विकासशील इंसान पार्टी ने 4 सीटों पर और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है. बिहार चुनाव में अपने बल पर भाजपा करीब दो दशक के बाद राजग में जदयू को पीछे छोड़ वरिष्ठ सहयोगी बनी है.

जदयू इस बार 71 सीटों से सीधे 43 सीटों तक सिमट कर रह गई. 2005 के बाद से विधानसभा चुनाव में यह उसका सबसे खराब प्रदर्शन था.

वहीं, विपक्षी महागठबंधन में शामिल राजद ने 75 सीटों पर, कांग्रेस ने 19 सीटों पर, भाकपा माले ने 12 सीटों पर, भाकपा एवं माकपा ने दो-दो सीटों पर जीत दर्ज की है.

इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की. राम विलास पासवान के चुनाव से पहले निधन के बाद चिराग पासवान के नेतृत्व में उनकी पार्टी लोजपा सिर्फ एक सीट जीत सकी.

मायावती के नेतृत्व वाली बसपा को भी सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीतने में सफल रहा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)