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तबलीग़ी जमात: अदालत ने विदेशियों को बरी किए जाने के आदेश के ख़िलाफ़ 44 याचिकाएं खारिज़ की

पुलिस ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर कर अनुरोध किया था कि जिन अपराधों में 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया था, उनमें आरोप तय किए जाएं. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तबलीग़ी  जमात के नौ विदेशी सदस्यों के भारत की यात्रा करने पर 10 साल के प्रतिबंध के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को अमान्य कर दिया है.

नई दिल्ली का निज़ामुद्दीन मरकज इलाका. (फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली की एक स्थानीय अदालत ने बृहस्पतिवार को दिल्ली पुलिस द्वारा दायर 44 याचिकाओं को खारिज कर दिया. इन याचिकाओं में मजिस्ट्रेट की अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें विदेशी लोगों को वीजा प्रावधानों का उल्लंघन कर तबलीगी जमात कार्यक्रम में शामिल होने के अपराधों से बरी कर दिया गया था.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने कहा कि पुनरीक्षण याचिकाओं में कोई आधार नहीं है.

मजिस्ट्रेट की अदालत ने 24 अगस्त को भारतीय दंड संहिता और महामारी कानून की विभिन्न धाराओं के तहत 36 विदेशी नागरिकों के खिलाफ आरोप तय किए थे.

इसके अलावा आपदा प्रबंधन कानून के तहत भी आरोप तय किए गए थे.

हालांकि विदेशी नागरिकों को वीजा प्रावधानों के उल्लंघन, जीवन के लिए खतरनाक बीमारी के संक्रमण फैलाने जैसे आरोपों से बरी कर दिया गया था.

जिन अपराधों के लिए उनके खिलाफ आरोप तय किए गए हैं, उनमें छह महीने से लेकर आठ साल तक की कैद की सजा हो सकती है.

पुलिस ने पुनरीक्षण याचिकाएं दायर कर अनुरोध किया था कि जिन अपराधों में 36 विदेशी नागरिकों को आरोपमुक्त किया गया था, उनमें आरोप तय किए जाएं.

पुलिस ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश के खिलाफ भी याचिका दायर की थी, जिसमें छह देशों के आठ विदेशी नागरिकों को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया था.

अदालत ने बृहस्पतिवार को कहा कि आठ विदेशी नागरिकों को बरी किए जाने के संबंध में मजिस्ट्रेट का आदेश पूरी तरह विचार कर दिया गया था और उसमें किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने नौ विदेशी सदस्यों पर 10 साल के यात्रा प्रतिबंध को अमान्य किया

इधर, उच्चतम न्यायालय ने तबलीगी जमात के नौ विदेशी सदस्यों के भारत की यात्रा करने पर 10 साल के प्रतिबंध के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को अमान्य कर दिया है.

ये लोग कोविड-19 के प्रसार की शुरुआत में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे.

जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ इन लोगों में से एक की अपील का संज्ञान लिया और कहा कि भविष्य में यदि वे भारत यात्रा के लिए वीजा आवेदन करते हैं तो उनके आवेदन पर उच्च न्यायालय के आदेश से प्रभावित हुए बिना गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाए.

 

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन पश्चिम स्थित मरकज में 13 मार्च से 15 मार्च तक कई सभाएं हुई थीं, जिनमें सऊदी अरब, इंडोनेशिया, दुबई, उज्बेकिस्तान और मलेशिया समेत अनेक देशों के धर्म प्रचारकों और अन्य लोगों ने भाग लिया था.

देशभर के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में भारतीयों ने भी इसमें हिस्सा लिया था, जिनमें से कई कोरोना संक्रमित पाए गए थे. इस लेकर मुस्लिम समुदाय पर कोरोना फैलाने का आरोप लगाया गया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)