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उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में कर्मचारियों की हड़ताल पर पाबंदी छह माह के लिए फ़िर बढ़ाई

इस क़ानून के लागू होने के बाद अब सरकारी और आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी 25 मई 2021 तक हड़ताल पर नहीं जा पाएंगे. इससे पहले बीते  22 मई को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण क़ानून (एस्मा) लागू कर हड़ताल पर रोक लगा दी थी.

योगी आदित्यनाथ. (फोटोः पीटीआई)

योगी आदित्यनाथ. (फोटोः पीटीआई)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शासकीय, अर्द्धशासकीय तथा किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन कर्मचारियों के हड़ताल करने पर छह माह तक पाबंदी लगा दी है. राज्य सरकार ने बुधवार को आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) की अवधि को बढ़ा दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से अनुमति लेने के बाद इसे लागू किया गया है और इस संबंध में एक अधिसूचना अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकुल सिंघल ने जारी की है.

कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघल ने बुधवार को बताया कि सरकार ने उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं के अनुरक्षण अधिनियम, 1966 के अधीन अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए हड़ताल पर छह महीने की अवधि के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं.

सिंघल ने बताया कि राज्य के कार्य-कलापों से संबंधित किसी लोक सेवा और राज्य सरकार के स्वामित्व तथा नियंत्रण वाली किसी सेवा तथा किसी स्थानीय प्राधिकरण के अधीन किसी सेवा के कर्मचारियों के लिए हड़ताल निषिद्ध की गई है.

पीटीआई के मुताबिक, अधिसूचना में कहा है कि, कराज्यपाल के मंजूरी के बाद इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से अगले छह महीने की अवधि तक हड़ताल पर रोक रहेगी. इसके दायरे में उत्तर प्रदेश राज्य के कार्यकलापों से संबंधित किसी लोक सेवा, राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले किसी निगम या स्थानीय प्राधिकरण में हड़ताल पर अगले छह महीने के लिए प्रतिबंध लागू कर दिया गया है.’

एस्मा के तहत आवश्यक सेवाओं को लंबी अवधि के लिए हड़ताल पर जाने से रोक दिया गया है. इस कानून के लागू होने के बाद अब सरकारी कर्मचारी 25 मई 2021 तक हड़ताल पर नहीं जा पाएंगे.

गौरतलब है कि आवश्यक सेवा रख-रखाव अधिनियम (एस्मा) लागू होने पर हड़ताल को अवैध माना जाता है. इसमें विभिन्न आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी शामिल किए जाते हैं. जैसे डाक, टेलीग्राफ, रेलवे, हवाई अड्डे और बंदरगाह संचालन आदि क्षेत्रों के कर्मचारी. एस्मा का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को एक साल तक की सजा या जुर्माना या फिर दोनों सजा हो सकती है.

एस्मा लागू होने के बाद पुलिस को यह अधिकार मिल जाता है कि वह कानून का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है.

बता दें कि इससे पहले देश में कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के बीच 22 मई को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) लागू कर दिया था.

श्रमिक संगठनों ने एस्मा लागू किए जाने को कर्मचारी और श्रमिक विरोधी बताया था.