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गुजरात: स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के डेली कलेक्शन अकाउंट से 5.25 करोड़ रुपये ग़ायब, केस दर्ज

एचडीएफसी बैंक की वडोदरा शाखा के मैनेजर ने इसके लिए प्रबंधक कंपनी राइटर बिजनेस सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है. कंपनी पर अक्टूबर 2018 से मार्च 2020 के दौरान यह धनराशि निकालने का आरोप है.

Kevadiya: Final touches being given to the Statue of Unity at Kevadiya Colony, about 200 kilometers from Ahmadabad, Thursday, October 18, 2018. The Statue of Unity, a 182-meters tall tribute to Indian freedom fighter Sardar Vallabhbhai Patel, will be inaugurated on Oct. 31 and is slated to be the world's tallest statue. (PTI Photo/Santosh Hirlekar) (PTI10_18_2018_000076B)

(फोटो: पीटीआई)

वडोदराः गुजरात की नर्मदा जिला पुलिस ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और इससे संबंधित परियोजनाओं के दैनिक नकदी अकाउंट से 5.25 करोड़ रुपये की कथित चोरी के लिए इसकी प्रबंधक कंपनियों के कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एचडीएफसी बैंक की वडोदरा शाखा के मैनेजर ने इसके लिए प्रबंधक कंपनी राइटर बिजनेस सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है.

इस संबंध में दर्ज शिकायत में कंपनी पर अक्टूबर 2018 से मार्च 2020 के दौरान यह धनराशि निकालने का आरोप है.

शिकायत में कहा गया है, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (एसओयू) प्रशासन को ऑफलाइन टिकटिंग और पार्किंग शुल्क की सेवाएं प्रदान कराने वाले एचडीएफसी बैंक ने राइट टू बिजनेस की डोरस्टेप कैश कलेक्शन सुविधा को आउटसोर्स किया था.’

केवडिया (नर्मदा जिला) पुलिस थाने ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू कर दी है.

सोमवार को दर्ज कराई गई शिकायत में कहा गया है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के लिए नकदी इकट्ठा करने के लिए ‘राइटर बिजनेस सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड’ कंपनी के साथ बैंक जुड़ा हुआ है.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के एक अधिकारी ने कहा, ‘एसओयू प्रशासन द्वारा रोजाना नकदी इकट्ठा करने के लिए एचडीएफसी बैंक सेवाएं मुहैया करा रहा है और ऑफलाइन टिकटिंग और पार्किंग फीस के माध्यम से इकट्ठा होने वाले शुल्क को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी वडोदरा ब्रांच के अकाउंट में उसे जमा करा रहा है. प्राप्त होने वाली नकदी की रसीद एसओयू प्रशासन को जारी की जाती है.’

कोविड-19 को लेकर लगाई गईं पाबंदियों में ढील दिए जाने के बाद एचडीएफसी बैंक के साथ रसीद मिलान किए जाने के दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के ऑडिटर्स को पता चला कि राइटर बिजनेस कंपनी के अधिकारियों की ओर से जमा की गई रसीदें असल में वास्तिवक प्रविष्टियों (एंट्री) से मेल नहीं खातीं.

एक अधिकारी ने कहा, ‘5.25 करोड़ रुपये की राशि गायब थी. हालांकि, हमारे रिकॉर्ड से पता चलता है कि एचडीएफसी बैंक के एजेंट को यह राशि सौंप दी गई थी. एजेंटों ने एचडीएफसी बैंक के लेटरहेड पर नकदी की रसीद सौंपी. इसके बाद इस मामले को बैंक के समक्ष उठाया गया, जिसने मामले की जांच की.’

नर्मदा जिले के कलेक्टर डीए शाह, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सीईओ भी हैं, ने कहा कि इस कथित चोरी का पता चलने के बाद एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें जिला प्रशासन, एचडीएफसी बैंक, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और एचडीएफसी बैंक के एजेंट शामिल हैं.

शाह ने कहा, ‘नकदी इकट्ठा करने और इसे बैंक अकाउंट में जमा करने के लिए एचडीएफसी बैंक ने राइटर बिजनेस प्रा. लि. को शामिल किया. यह पूरी तरह से उनका आंतरिक प्रबंधन था और इसका एसओयू से कोई लेना-देना नहीं है इसलिए इस लेनदेन की प्रक्रिया के लिए एचडीएफसी बैंक पूरी तरह से जिम्मेदार है.’

उन्होंने कहा, ‘समिति ने रिकॉर्डों की जांच की और यह पता चला कि नकदी बैंक को सौंप दी गई थी, इसलिए समझौते के अनुसार बैंक ने ब्याज के साथ इस धनराशि को एसओयू के अकाउंट में क्रेडिट करना था, जबकि उन्हें अपने एजेंट के साथ इस विवाद को खुद ही सुलझाना होगा.’

केवडिया के पुलिस उपाधीक्षक वाणी दूधत ने कहा, ‘एसओयू दैनिक आधार पर इकट्ठा हो रही धनराशि की रसीदें और लेनदेन की स्लिप बड़ी संख्या में मुहैया कर रहा है, जिसकी हम जांच कर रहे हैं. इस अवधि के दौरान धनराशि का प्रबंधन करने वाले कर्मचारियों की पहचान कर हम उन्हें पूछताछ के लिए बुलाएंगे.’