भारत

किसान आंदोलन: तीन और लोगों की मौत, अब तक कम से कम 10 व्यक्तियों की जान गई

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ बीते 14 दिनों से किसान दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. वे इन क़ानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर किसान बीते 14 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर किसान बीते 14 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

सोनीपत/जींद: केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ बीते 14 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. मंगलवार को किसानों में भारत बंद आह्वान किया था, इस दौरान कम से कम तीन लोगों की मौत की सूचना सामने आई है.

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर तीन नए कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर धरने के लिए आए एक किसान की मंगलवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. पुलिस ने यह जानकारी दी.

सोनीपत के थाना कुंडली प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि हमें सूचना मिली थी कि टीडीआई के सामने बरोदा के रहने वाले 32 वर्षीय किसान अजय सिंह की मौत हो गई है.

पुलिस ने बताया कि अजय बीते कुछ दिनों से सिंघू बॉर्डर पर किसानों के धरने में शामिल थे. उन्होंने कहा कि सात दिसंबर की देर रात खाना खाकर अपनी ट्राली के नीचे सो रहे थे, लेकिन सुबह जब उसके साथियों ने उन्हें उठाया तो वह नहीं उठे. किसानों ने इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को दी. स्वास्थ्यकर्मियों ने मौके पर जाकर जांच की तो वह दम तोड़ चुके थे.

हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सोनीपत के एक अस्पताल में भिजवा दिया.

पुलिस ने बताया है कि प्रथम दृष्टया ठंड से मौत का मामला लग रहा है, हालांकि पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही खुलासा हो पाएगा की मौत कैसे हुई.

नवभारत टाइम्स के मुताबिक किसान आंदोलन के दौरान मंगलवार को बीबी गुरमैल कौर की मौत हो गई है. वह धरने में शामिल किसानों के लिए रोजाना रोटियां बना रही थीं.

वहीं, हरियाणा के जींद में धरने पर बैठे किसान की हृदय गति रुकने से मौत हो गई.

केंद्र के तीन कृषि कानून के विरोध में किसानों के ‘भारत बंद’ के आह्वान पर जींद जिले के गांव उझाना तथा गढ़ी के बीच धरने पर बैठे एक किसान की कथित तौर पर हृदय गति रुकने से मौत हो गई. गढ़ी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है.

गांव उझाना निवासी 60 वर्षीय किसान किताब सिंह मंगलवार सुबह गांव के निकट गढ़ी मार्ग पर चल रहे धरने की अगुवाई कर रहे थे. दोपहर को किताब सिंह की तबीयत खराब हो गई और वह बेसुध होकर गिर गए.

साथी किसान सिंह को उपचार के लिए नरवाना अस्पताल लेकर गए. वहां चिकित्सकों ने सिंह को मृत घोषित कर दिया.

सिंह के बेटे जितेंद्र ने बताया, ‘मेरे पिता धरने के लिए पहुंचे थे वहां दोपहर को हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई.’

पुलिस सूत्रों के अनुसार घटना की सूचना पाकर गढ़ी थाना प्रभारी नरवाना जनरल अस्पताल पहुंचे और हालात का जायजा लिया. फिलहाल गढ़ी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली के टिकरी बॉर्डर में पंजाब के एक 49 वर्षीय किसान की बीते सात दिसंबर को मृत्यु हो गई थी. पुलिस ने कहा था कि अभी मौत के कारणों का पता नहीं चला है.

झज्जर पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मृतक किसान की पहचान पंजाब के मोगा जिले के मेवा सिंह के रूप में हुई थी.

बहादुरगढ़ के डीएसपी पवन कुमार ने कहा था, ‘उसकी तबियत बिगड़ने के बाद बहादुरगढ़ जनरल अस्पताल ले जाया गया था, जहां उसे मृत घोषित कर दिया. मौत के कारण स्पष्ट नहीं है. उनके साथियों ने कहा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है.’

बता दें कि इससे पहले किसान आंदोलन के दौरान अलग-अलग कारणों से कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है.

बीते तीन दिसंबर को टिकरी बॉर्डर पर चल रहे प्रदर्शन में शामिल एक किसान की मौत कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ने से हो गई थी. मृतक की पहचान बठिंडा के रहने वाले लखवीर सिंह के रूप में हुई थी. वह बीते 28 नवंबर को दिल्ली आए थे और टिकरी बॉर्डर पर लंगर सेवा में ड्यूटी कर रहे थे.

बीते दो नवंबर की सुबह पंजाब के मानसा जिले कि 60 वर्षीय गुरजंत सिंह की मौत भी टिकरी बॉर्डर पर हो गई थी. वह मानसा जिले के बछोअना गांव के रहने वाले थे. वह भी बीकेयू (उग्रहण) के साथ प्रदर्शन में भाग ले रहे थे. एक दिसंबर की देर रात वह अचानक बीमार हो गए थे. उन्हें एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.

इसी तरह बीते एक दिसंबर की देर रात 32 वर्षीय बलजिंदर सिंह की कुरुक्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. वह दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन स्थल से वापस लौट रहे थे. बलजिंदर लुधियाना के झम्मत गांव के रहने वाले थे.

बीते 29 नवंबर की रात को लुधियाना के 55 वर्षीय किसान गज्जन सिंह की बहादुरगढ़ के पास दिल्ली बॉर्डर पर मौत हो गई. उनके साथ के किसानों ने बताया कि हार्ट अटैक के चलते उनकी मृत्यु हुई है.

29 नवंबर को ही एक गाड़ी में आग लगने के चलते 55 वर्षीय मैकेनिक जनक राज अग्रवाल की मौत हो गई. अग्रवाल इसी गाड़ी में आराम कर रहे थे.

पंजाब के बरनाला जिले के धनौला में मैकेनिक का काम करने वाले जनक ट्रैक्टर ठीक करने वाले तीन अन्य लोगों के साथ आंदोलन में शामिल किसानों के ट्रैक्टर और ट्रकों को रिपेयर करने के लिए टिकरी बॉर्डर आए थे.

‘दिल्ली चलो’ प्रदर्शन के दौरान सबसे पहली मौत पंजाब के मानसा जिले के रहने वाले 45 वर्षीय किसान धन्ना सिंह की हुई थी. बीते 27 नवंबर को हरियाणा के भिवानी में एक सड़क दुर्घटना में सिंह की मृत्यु हुई.

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब, हरियाणा और अन्य क्षेत्रों के हजारों किसान पिछले 14 दिनों (26 नवंबर) से दिल्ली की सीमा के पास धरना दे रहे हैं. उनका मानना है कि नए कृषि कानूनों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा, जिससे वे कॉरपोरेट घरानों की ‘दया’ पर रह जाएंगे.

किसानों का कहना है कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्ली आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)