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डॉक्टरों की स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील, कोविड टीकाकरण के बाद हुई 13 मौतों की जांच हो

16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद से अब तक विभिन्न राज्यों में 13 लोगों की जान गई है, इनमें से अधिकतर मौतें टीका लेने के बाद कुछ घंटों से लेकर पांच दिनों के भीतर हुई हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से किसी भी मौत के लिए टीकाकरण के कारण होने को ख़ारिज किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली/अहमदाबाद: कोविड-19 टीकाकरण में शामिल होने के बाद पिछले दो हफ्तों में हुई 13 मौतों के बाद डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधार्थियों के एक समूह ने रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से इन मौतों की तत्काल जांच करवाने और जानकारी को सार्वजनिक किए जाने की मांग की.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को एक पत्र में लिखा, ‘कृपया सभी मौतों, गंभीर और बेहद गंभीर एईएफआई (टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटनाओं) पर पूरी जानकारी कोविड-19 वैक्सीन रोलआउट और उनकी जांच को सार्वजनिक पटल पर रखें. इस जानकारी में संख्या, टीकाकरण की तिथि, एईएफआई का विवरण, स्थान, जांच की स्थिति और परिणाम शामिल होने चाहिए.’

बता दें कि बीते 16 जनवरी को टीकाकरण शुरू होने के बाद से अब तक उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, हरियाणा, ओडिशा, केरल और गुजरात में मौत के मामले सामने आ चुके हैं.

13 में से अधिकतर मौतें टीका लेने के बाद कुछ घंटों से लेकर पांच दिनों के भीतर हुई हैं. मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से अब तक किसी भी मौत के लिए टीकाकरण के कारण होने से खारिज कर दिया है और सभी मौतें हृदय संबंधी समस्याओं या मस्तिष्क आघात के लिए बताई गई हैं.

मुंबई स्थित इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल एथिक्स के संपादक और पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में से एक अमर जेसानी ने कहा, ‘मृत्यु के कारण पर सभी चिकित्सा जानकारी सार्वजनिक विश्वास बढ़ाने के लिए सार्वजनिक डोमेन में होनी चाहिए. हम चिंतित हैं कि इस तरह की पारदर्शिता के बिना लोग वैक्सीन में विश्वास खो सकते हैं.’

हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जानकारी अधिक पारदर्शिता के लिए साझा की गई थी जबकि पूर्ण एईएफआई जांच में एक महीने तक का समय लग सकता है. आमतौर पर पोस्टमार्टम 24-48 घंटों के भीतर किया जाता है.

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद में महामारी विज्ञान और संचारी रोगों के प्रमुख समीरन पांडा ने कहा, ‘जबकि कोई भी मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण है, ऐसी सभी मौतों का निश्चित कारण के लिए पता लगाने की आवश्यकता है. 24-48 घंटों के भीतर मृत्यु की सूचना दी जाती है और एक महीने के भीतर मौत के कारण पता एक महीने में लगाया जा सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘जहां सरकार को जनता की शंकाओं को दूर करने की ओर अधिक उन्मुख होने की आवश्यकता है, लोगों को भी कारण स्थापित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की सराहना करने की आवश्यकता है.’

डॉक्टरों और सार्वजनिक स्वास्थ्य शोधकर्ताओं ने तर्क दिया कि ये सभी मौतें गंभीर स्वास्थ्य एईएफआई के समूह की विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा की श्रेणी में आती हैं और तदनुसार जांच की जानी चाहिए.

उन्होंने लिखा, ‘हालांकि जिला/राज्य के अधिकारियों ने कहा है कि कोई भी मौत टीके से संबंधित नहीं है, इन मौतों और अन्य गंभीर एईएफआई की मूल्यांकन पर जिला, राज्य और राष्ट्रीय एईएफआई समितियों की रिपोर्ट जारी नहीं की गई है.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘मौतों की जांच किसने की और प्रत्येक जांच के लिए किस पद्धति का उपयोग किया गया, इसका कोई विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है. राष्ट्रीय समिति का दायित्व है कि वह इन मौतों के लिए कारकों में संभावित प्रतिमानों की जांच करे.’

बता दें कि टीकाकरण के बाद मौत के दो हालिया मामले तेलंगाना और गुजरात से रविवार को सामने आए हैं.

 टीकाकरण के 11 दिन बाद तेलंगाना में 55 वर्षीय आंगनवाड़ी शिक्षिका की मौत

तेलंगाना के मंचिर्याल जिले में 55 वर्षीय एक आंगनवाड़ी शिक्षिका की टीकाकरण के 11 दिन बाद एक सरकारी अस्पताल में मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग ने यह जानकारी दी.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनकी मौत का संबंध टीका लेने से जुड़ा नहीं है. उनकी मौत शनिवार को निजाम्स इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई. उन्हें 19 जनवरी को टीके की खुराक दी गई थी.

मंचिर्याल जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एम नीरजा ने बताया, ‘वह उच्च रक्तचाप की मरीज थीं तथा फेफड़े की बीमारी से भी जूझ रही थीं. हमारा मानना है कि उनकी मौत टीका लगने की वजह से नहीं हुई.’

सुशीला की हालत बिगड़ने पर इस अस्पताल में दो दिन पहले ही भर्ती किया गया था. इसी बीच तेलंगाना के स्वास्थ्य मंत्री ई. राजेंद्र ने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों को टीके के संबंध में परामर्श देने और उनकी आशंकाओं को दूर करने के लिए एक व्यवस्था बनाई है.

गुजरात में टीका लगवाने के कुछ ही घंटों में 30 वर्षीय सफाई कर्मचारी की मौत

गुजरात के वड़ोदरा जिले में रविवार को कोविड-19 का टीका लगवाने के कुछ ही घंटे बाद 30 वर्षीय सफाई कर्मचारी की मौत हो गई.

अधिकारियों ने बताया कि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पोस्टमॉर्टम का आदेश दिया गया है. सफाई कर्मचारी के परिजन को संदेह है कि कोविड-19 टीके के कारण उसकी मौत हुई है.

अधिकारियों ने बताया कि संभवत: उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है क्योंकि उसे 2016 से हृदय रोग था और वह दवा भी नहीं ले रहा था.

जिग्नेश सोलंकी वड़ोदरा महानगर पालिका में सफाई कर्मचारी थे. अधिकारियों ने बताया कि सोलंकी को रविवार सुबह टीका लगा था. कुछ घंटे बाद वह अपने घर पर बेहोश हो गए और उन्हें शहर के एसएसजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत लाया हुआ (brought dead) घोषित कर दिया.

सोलंकी की पत्नी दिव्या का कहना है, ‘मुझे नहीं पता था कि वह टीका लगवाने जा रहे हैं. हमारी इस बारे में कोई बात नहीं हुई थी. टीका लगवाने के बाद वह घर लौटे और बेटी के साथ खेलने के दौरान बेहोश हो गए. हमें संदेह है कि कोविड-19 टीके के कारण उनकी अचानक मौत हुई है.’

एसएसजी अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक डॉक्टर रंजन अय्यर ने बताया कि सोलंकी को नगर निकाय के टीकाकरण केंद्र पर टीका लगाया गया और आधे घंटे उसके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई.

डॉक्टर अय्यर ने कहा, ‘उस दौरान सोलंकी के शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं दिखा. उसे एसएसजी अस्पताल में मृत लाया गया घोषित किया गया.’

उन्होंने बताया, ‘हमें पता चला है कि करीब छह महीने पहले सोलंकी के सीने में दर्द हुआ था और उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. संभव है कि उसकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई हो, क्योंकि उसे हृदय रोग था. हम मौत की कारण का पता लगाने के लिए पैनल द्वारा पोस्टमॉर्टम कराएंगे.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)