राजनीति

किसान मोर्चा ने किसानों से विधानसभा चुनावों में भाजपा को वोट नहीं देने की अपील की

विधानसभा चुनाव राउंड-अप: भाजपा में शामिल होने के बाद बंगाली थियेटर के अभिनेता को नाटक से हटाया गया. जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ओईशी घोष पश्चिम बंगाल चुनाव मैदान में उतरीं. तमिलनाडु में उम्मीदवारों की सूची फाइनल होने से पहले भाजपा नेता ने नामांकन दाख़िल किया.

(फोटो साभार: फेसबुक)

(फोटो साभार: फेसबुक)

कोलकाता: कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के किसानों और अन्य लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को वोट नहीं देने का अनुरोध किया.

मोर्चा ने कहा कि चुनावी हार केंद्र की भाजपा नीत सरकार को तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर करेगी.

किसान एकता मोर्चा ने भी असम, केरल, पुदुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के किसानों से किसान विरोधी भाजपा और इसके सहयोगियों को वोट न देने की अपील की है.

एसकेएम नेता योगेंद्र यादव ने संवाददाताओं से कहा, ‘हम किसी भी पार्टी का समर्थन नहीं कर रहे हैं या लोगों से यह नहीं कर रहे हैं वे किसे वोट दें लेकिन हमारी एकमात्र अपील है कि भाजपा को सबक सिखाया जाए.’

एक ट्वीट में योगेंद्र यादव ने कहा, ‘किसान आंदोलन ने आगामी चुनावों में बीजेपी को वोट की चोट देने का फैसला किया है. सौ दिन हो गए न यह लोग संविधान की बात सुनते हैं, न कानून की, न यह लोग नैतिकता जानते हैं, न अच्छा-बुरा. यह एक ही भाषा समझते हैं वोट, कुर्सी, सरकार. जब तक इनकी कुर्सी न हिलाओ कोई फर्क नहीं पड़ता.’

एसकेएम ने एक पत्र भी जारी किया, जिसमें राज्य के किसानों से भाजपा को वोट नहीं देने का आग्रह किया गया है. मोर्चा ने पत्र में कहा कि चुनाव में हार से केंद्र सरकार कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए मजबूर होगी.

सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने भाजपा पर देश कुछ कॉरपोरेटों को बेचने की कोशिश करने का आरोप लगाया और लोगों से अपने मताधिकार का प्रयोग सावधानीपूर्वक करने का आग्रह किया.

किसानों के आंदोलन को अपमानित करने के लिए केंद्र की निंदा करते हुए पाटकर ने आरोप लगाया कि ब्रिटिश शासकों ने भी ऐसे कृत्यों का सहारा नहीं लिया जैसा वर्तमान सरकार कर रही है.

उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में कृषि कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए जाने का स्वागत किया.

उल्लेखनीय है कि असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में 27 मार्च से विधानसभा चुनाव की शुरुआत होने जा रही है.

भाजपा में शामिल होने के बाद बंगाली थियेटर के अभिनेता को नाटक से हटाया गया

पश्चिम बंगाल में सामाजिक-आर्थिक विषयों पर नाटकों के मंचन के लिए मशहूर एक थियेटर ग्रुप के एक अभिनेता के भाजपा में शामिल होने के बाद इस ग्रुप ने उन्हें अपने नाटक से बाहर कर दिया है.

सौरभ पालोधी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया कि कलाकार कौशिक कार को भाजपा में शामिल होने के कारण नाटक से हटा दिया गया है.

पालोधी का नाटक ‘घूम नेई’ उत्पल दत्त के क्लासिक नाटक पर आधारित है जिसमें वाम विचारधारा के चश्मे से देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को दर्शाया गया है.

कार को पालोधी के ग्रुप ‘इच्छेमोतो’ ने 2019 में एक किरदार को निभाने के लिए बुलाया था. यह किरदार 2015 के दादरी मामले से प्रेरित था, जिसमें ‘बीफ’ खाने के संदेह में भीड़ ने एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी.

पालोधी वामपंथी विचारधारा के हैं. उन्होंने तीन दिन पहले फेसबुक पर पोस्ट किया, ‘हम लोग कौशिक कार को ‘घूम नेई’ से तत्काल प्रभाव से हटा रहे हैं क्योंकि वह भाजपा में शामिल हो गए हैं. इस वक्त उन्हें नाटक से हटाने का यह कारण पर्याप्त है. कामकाजी वर्ग के नाटक में सांप्रदायिक तत्वों के लिए कोई जगह नहीं हो सकती है.’

थियेटर ग्रुप जल्द ही ‘घूम नेई’ के अगले शो की तारीख की घोषणा करेगा.

इस पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं.

आरका रॉय ने कहा, ‘क्या यह किसी कलाकार की आजादी का उदाहरण है? क्या यह लोकतांत्रिक अधिकार है? क्या एक कलाकार को वामपंथी या दक्षिणपंथी विचारधारा के आधार पर परखा जाना चाहिए? कोई व्यक्ति किस राजनीतिक पार्टी में जाना चाहता है, यह उस पर छोड़ देना चाहिए. किसी को इसमें दखल देने का अधिकार नहीं है.’’

पालोधी ने कहा कि वह अपने फैसले पर अटल हैं क्योंकि यह नाटक भाजपा की विचारधारा के उलट है और उस पार्टी से जुड़ा कोई व्यक्ति ‘घूम नेई’ का हिस्सा नहीं बन सकता.

उन्होंने कहा, ‘कौशिक कार की मौजूदा राजनीतिक पहचान को जानते हुए नाटक से उनका जुड़े रहना नाटक की मूल भावना तथा जिस कामकाजी वर्ग के लिए इसे बनाया गया है, उसके साथ अन्याय होगा.’

इस पूरे घटनाक्रम को ‘वामपंथी फासीवाद की अभिव्यक्ति’ बताते हुए कार ने कहा, ‘कोई अनुभवहीन व्यक्ति जिसका जनता से कोई जुड़ाव नहीं है और जो प्रगतिवादी सांस्कृतिक इतिहास को नहीं जानता हो, वह सांप्रदायिकता पर भाषण दे रहा है और ऐसा व्यक्ति ही इस तरह का फैसला कर सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं इस एकतरफा फैसले से हैरान हूं.’

तृणमूल ने सत्ता में आने के बाद लोगों का विश्वास तोड़ा: शुभेंदु अधिकारी

हल्दिया: नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरे भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को लोगों से ‘बाहरी’ को वोट नहीं करने की अपील की और पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी पर लोगों से विश्वासघात करने का आरोप लगाया.

West Midnapore: Union Home Minister Amit Shah (R) with Subhendu Adhikary (2L), former TMC leader who joined BJP, during an election rally ahead of West Bengal Assembly polls 2021, in West Midnapore district, Saturday, Dec. 19, 2020. (PTI Photo)(PTI19-12-2020 000181B)

शुभेंदु अधिकारी बीते साल दिसंबर में भाजपा में शामिल हुए थे. (फोटो: पीटीआई)

तृणमूल से भाजपा में शामिल हुए अधिकारी हाल में पूर्वी मिदनापुर जिले के कांठी से नंदीग्राम के प्रत्याशी बने हैं. उन्होंने शुक्रवार को इस सीट से अपना नामांकन पत्र दाखिल किया.

अधिकारी ने बनर्जी का नाम लिए बगैर कहा, ‘मैं आप सभी से अपील करता हूं कि अपना वोट किसी बाहरी को देकर इसे बर्बाद नहीं करें, जिसने 2011 में सत्ता में आने के बाद आपके विश्वास और आपकी आकांक्षाओं का हनन किया किया है.’

उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बन गई है, जहां अन्य नेताओं की न तो कभी पार्टी के नीति निर्माण में और न ही राज्य सरकार में पूछ होती है.’

अधिकारी ने कहा, ‘बुआ और भतीजे (ममता और तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी) के अलावा पार्टी में हर कोई मूरत की तरह है.’

बनर्जी के अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ने के फैसले के बाद नंदीग्राम सीट हाई प्रोफाइल बन गई है.

अधिकारी बीते साल दिसंबर में ही तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं. तृणमूल की टिकट पर 2016 में अधिकारी ने नंदीग्राम से भाकपा के उम्मीदवार को 81,230 मातों के अंतर से मात दी थी.

बनर्जी ने बुधवार को नंदीग्राम से नामांकन दाखिल किया था. वाम नेतृत्व वाले महागठबंधन ने माकपा की युवा नेता मीनाक्षी मुखर्जी को यहां से मैदान में उतारा है.

चुनाव आयोग को पता लगाना चाहिए कि ममता बनर्जी पर किसने हमला किया: टीएमसी

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को पता लगाना चाहिए कि नंदीग्राम में दस मार्च को चुनाव प्रचार के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमले के षड्यंत्रकारी कौन हैं.

टीएमसी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि हमला उन लोगों ने किया जो उनकी लोकप्रियता से डरे हुए हैं.

चटर्जी ने कहा, ‘हमने ईसीआई की जिम्मेदारी और निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. आयोग ने राज्य के डीजीपी और एडीजी को बदल दिया है. वे ऐसा कर सकते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन ममता बनर्जी जैसी लोक हस्तियों के उचित सुरक्षा प्रबंधों में ढील को दुरुस्त करने को लेकर क्या किया जा रहा है.’’

टीएमसी नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा में इतना भी शिष्टाचार नहीं बचा है कि वे देश में एकमात्र महिला मुख्यमंत्री की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में पूछ लें.

नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों के कथित हमले में बनर्जी घायल हो गई थीं.

पश्चिम बंगाल में तैयारियों का मुआयना करने पहुंचे दो चुनाव पर्यवेक्षक

नंदीग्राम: पश्चिम बंगाल में तैयारियों का मुआयना करने दो विशेष चुनाव पर्यवेक्षक शुक्रवार को पूर्व मेदिनीपुर जिला पहुंचे.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विशेष पर्यवेक्षक अजय नायक और विशेष पुलिस पर्यवेक्षक विवके दुबे पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम के जिला मजिस्ट्रेट, एसपी और चुनाव अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे.

अधिकारी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के घायल होने की घटना के बाद हमें अधिक एहतियात बरतने की जरूरत है. प्रधानमंत्री, गृह मंत्री जैसे कई वीवीआईपी चुनाव से पहले जिले में प्रचार के लिए आने वाले हैं और हमें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है.’

पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से विधानसभा चुनाव शुरू हो रहे हैं. यहां आठ चरणों में चुनाव संपन्न होगा.

बंगाल चुनाव मैदान में उतरीं जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ओईशी घोष

नई दिल्ली: माकपा के टिकट पर पश्चिम बंगाल की जमुरिया सीट से विधानसभा चुनाव मैदान में उतरीं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रसंघ अध्यक्ष ओईशी घोष का कहना है कि जेएनयू उनके दिल और दिमाग में बसा रहेगा.

ओईशी घोष. (फोटो: पीटीआई)

ओईशी घोष. (फोटो: पीटीआई)

विधानसभा चुनाव लड़ने वाली जेएनयूएसयू की पहली वर्तमान पदाधिकारी घोष से जब जेएनयू से राष्ट्रीय राजनीति में आने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘यह एक बड़ी जिम्मेदारी है, लेकिन मेरी राजनीति में कोई बदलाव नहीं होगा.’

घोष ने कहा, ‘जेएनयू में हमने जिन मुद्दों पर लड़ाई लड़ी, वो देश में जो हो रहा है, उसी का विस्तार है. चाहे वह आरक्षण और सांप्रदायिकता का मुद्दा हो या बेरोजगारी, बेहतर शिक्षा, बेहतर रहन-सहन की परिस्थितियों को लेकर हमारी लड़ाई हो. देश में हर जगह मुद्दे एक जैसे ही हैं. मैं पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए उन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ूंगी जिनको लेकर हमने जेएनयू में लड़ाई लड़ी.’

उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल का युवा नौकरी और बेहतर रहन-सहन की परिस्थितियों के बारे में पूछ रहा है. यहां तक कि उच्च शिक्षा के लिए युवाओं को राज्य से बाहर का रुख करना पड़ रहा है.’

ईवीएम हैकिंग संबंधी फर्जी खबर को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई: चुनाव आयोग

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने बृहस्पतिवार को कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को हैक किए जाने संबंधी एक फर्जी खबर को लेकर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. इंटरनेट पर प्रसारित इस खबर में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति का हवाला दिया गया है.

आयोग ने एक बयान में कहा कि उसके निर्देश पर दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है.

इसके मुताबिक, ‘इस मामले में जांच शुरू हो चुकी है. ऐसे शरारती तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया की छवि खराब करने के लिए फर्जी खबर जारी की.’

आयोग ने कहा, उसके संज्ञान में आया कि कुछ सोशल मीडिया मंचों पर ईवीएम हैक करने संबंधी एक पुरानी फर्जी खबर प्रसारित की जा रही थी.

उन्होंने कहा कि 21 दिसंबर 2017 की तारीख वाली इस खबर में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएस कृष्णमूर्ति के हवाले से दावा किया गया था कि एक विशेष दल ने ईवीएम हैकिंग के जरिये विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की. इस गलत सूचना का तत्कालीन चुनाव आयुक्त 2018 में ही स्वयं खंडन कर चुके हैं.

चुनाव आयोग ने कहा कि कुछ शरारती तत्व इसी खबर को दोबारा सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं.

कृष्णमूर्ति ने बुधवार को भी ईवीएम हैकिंग संबंधी खबर का खंडन करते हुए बयान जारी किया था और इसे पूरी तरह गलत करार दिया था.

आयोग ने बृहस्पतिवार को जारी अपनी विज्ञप्ति में कृष्णमूर्ति के बयान को भी साझा किया है.

तमिलनाडु: उम्मीदवारों की सूची फाइनल होने से पहले भाजपा नेता ने नामांकन दाखिल किया

चेन्नई: तमिलनाडु भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष एन. नागेंद्रन ने शुक्रवार को तिरूनेलवेली विधानसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल कर हलचल मचा दी. दरअसल पार्टी ने अभी तक उम्मीदवारों की सूची आधिकारिक तौर पर जारी नहीं की है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

अन्नाद्रमुक कैबिनेट में मंत्री रह चुके नागेंद्रन 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे. वह 2001 से 2006 और 2011 से 2016 तक दो बार तिरूनेलवेली विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और दो बार इस सीट से चुनाव हार भी चुके हैं.

उनका यह अचानक कदम ऐसे समय में आया है जब भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के पार्टी प्रमुख एल. मुरुगन के नेतृत्व में आज नई दिल्ली रवाना हुआ, जहां वह पार्टी आलाकमान के साथ विचार-विमर्श करेगा और 20 विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप देगा. भाजपा, अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में यह चुनाव लड़ रही है.

नागेंद्रन ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने नामांकन पत्र दाखिल कर दिया क्योंकि आज शुभ दिन है.’

वह पांचवीं बार यहां से चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले दिन ही उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. चुनाव आयोग के कोविड-19 प्रोटोकॉल के तहत उनके साथ केवल एक व्यक्ति मौजूद था.

भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं को उनके इस कदम की जानकारी थी.

भाजपा के राज्य सचिव केटी राघवन ने कहा, ‘पार्टी के नेता जानते हैं कि वह आज नामांकन दाखिल करेंगे. इसलिए यह गोपनीय या आश्चर्यजनक नहीं है.’

उन्होंने कहा कि नागेंद्रन उन संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं, जिनकी भाजपा ने पहचान की है.

राघवन ने कहा, ‘भाजपा जल्द ही उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करेगी.’

तमिलनाडु: कांग्रेस ने द्रमुक द्वारा दी गईं 25 सीटों पर सहमति जताई

चेन्नई: द्रमुक तथा कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को उन 25 सीटों को लेकर सहमति जताई जिन पर कांग्रेस छह अप्रैल के होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारेगी. इन 25 में से पांच सीटों पर कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से होगा. इनमें कन्याकुमारी की दो सीटें शामिल हैं.

अन्नाद्रमुक ने दो सीटें पूर्व केंद्रीय मंत्री जीके वासन की अगुवाई वाली पार्टी तमिल मानिला कांग्रेस जबकि एक सीट स्थानीय संगठन को दी है. दोनों दल सत्तारूढ़ दल के दो पत्तियों वाले चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं.

अन्नाद्रमुक 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा की 189 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उसे दो और सीटें मिलनी अभी बाकी हैं.

द्रमुक और उसके सहयोगी दल वीसीके ने छह सीटों पर सहमति जताई है जहां वीसीके अपने उम्मीदवार उतारेगी. इनमें चार सुरक्षित सीटें भी शामिल हैं.

एमडीएमके के नेता वाइको ने भी द्रमुक द्वारा अपनी पार्टी को दी गईं सभी छह सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी.

द्रमुक और कांग्रेस ने 25 सीटों पर सहमति जताई है जिन पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी. इनमें वे पांच सीटें भी शामिल हैं, जिन पर पिछले चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी.

कन्याकुमारी की दो सीटों कोलाचेल और विलावंकोड़े के अलावा तीन और सीटों पर कांग्रेस का मुकाबला भाजपा से होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने द्रमुक सांसद की याचिका पर तमिलनाडु पुलिस से जवाब मांगा

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने द्रमुक सांसद आरएस भारती की उस याचिका पर तमिलनाडु पुलिस को शुक्रवार को जवाब देने का निर्देश दिया जिसमें कथित तौर पर अनुसूचित जाति के लोगों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने पर उनके खिलाफ दर्ज मामले रद्द करने से इनकार के मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है.

(फोटो: रॉयटर्स)

(फोटो: रॉयटर्स)

जस्टिस एल. नागेशवर राव और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की पीठ ने राज्य सभा सांसद की ओर से पेश अधिवक्ता अमित आनंद की याचिका पर गौर किया और अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त तथा शिकायतकर्ता कल्याण सुंदरम को नोटिस जारी किए.

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुई इस कार्यवाही में पीठ ने पुलिस और शिकायतकर्ता को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया.

इससे पहले बीते 22 फरवरी को मद्रास उच्च न्यायालय ने मामले को रद्द करने का अनुरोध करने वाली सांसद की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि प्रथमदृष्टया उन्होंने अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाले लोगों को ‘‘अपमानित’’ किया है.

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत को बिना देर किए मामले की रोजाना सुनवाई करने के भी निर्देश दिए थे.

उच्चतम न्यायालय में दाखिल याचिका में कहा गया है, ‘इस मामले में याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए बयान अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति के लोगों के प्रति किसी प्रकार के द्वेष, घृणा या दुर्भावना को बढ़ावा नहीं देते. बल्कि याचिकाकर्ता ने केवल उन ऐतिहासिक तथ्यों को रखा कि द्रविड़ विकास आंदोलन, जिससे याचिकाकर्ता वर्ष 1960 से जुड़ा हुआ है, उसने तमिलनाडु में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य वंचित समुदायों के जीवन में सुधार किया है.’

गौरतलब है कि अथि तमिलार मक्कल काच्चि के नेता कल्याण सुंदरम ने द्रमुक नेता के खिलाफ कथित तौर पर पार्टी के एक कार्यक्रम में भाषण देने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

सबरीमला मुद्दे पर मंत्री द्वारा ‘आंसू बहाने’ का कोई तुक नहीं: श्रीधरन

पलक्कड़: ‘मेट्रोमैन’ के नाम से देशभर में चर्चित ई. श्रीधरन ने शुक्रवार को केरल के देवस्वओम मंत्री के सुरेंद्रन के उस बयान पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने सबरीमला मंदिर में उन महिलाओं के प्रवेश पर खेद जताया था जिनका प्रवेश पारंपरिक रूप से वर्जित था.

श्रीधरन ने कहा कि सब कुछ खत्म हो जाने पर ‘आंसू बहाने’ का कोई तुक नहीं है.

हाल में राजनीति में आए और भाजपा में शमिल हुए श्रीधरन ने पत्रकारों से कहा कि वाम सरकार ने अपने कृत्यों से कई लोगों की भावनाओं को आहत किया है.

सुरेंद्रन ने 2018 में सबरीमला मंदिर में प्रतिबंधित उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुई घटना पर एक तरह से बृहस्पतिवार को खेद व्यक्त किया था और कहा कि इससे उन्हें ‘दुख हुआ’ और यह ‘कभी नहीं होनी चाहिए’ थी.

सुरेंद्रन ने कहा था, ‘साल 2018 में सबरीमला में हुई घटना ऐसी थी, जिसने हम सभी को दुख पहुंचाया. इसे नहीं होना चाहिए था. इसने मुझे भी दुख पहुंचाया था.’

ई. श्रीधरन. (फोटो: पीटीआई)

ई. श्रीधरन. (फोटो: पीटीआई)

माकपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्रन, जो विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, का बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी कांग्रेस और भाजपा ने मार्क्सवादी सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सबरीमला मुद्दे को उठाने को लेकर उसकी तरफ से कोई प्रयास नहीं किया गया.

श्रीधरन ने कहा, ‘सबकुछ खत्म हो जाने पर आंसू बहाने का क्या तुक है. हम नहीं जानते कि वह वास्तविक है या नहीं. वे जान बूझकर दो महिलाओं को पुलिस सुरक्षा में मंदिर में ले गए और उनमें से एक महिला यहां तक हिंदू भी नहीं थी. अब वह कह रहे हैं कि वह गलती थी. उन्होंने कई लोगों की भावनाओं को आहत किया है.’

उच्चतम न्यायालय ने 28 सितबंर 2018 को दिए फैसले में कहा था कि 10 से 50 साल की महिलाओं को भी पहाड़ी पर स्थित मंदिर में प्रवेश का अधिकार है, जो पहले वहां नहीं जा सकती थी. इस फैसले को राज्य की वाम सरकार ने लागू कराने की कोशिश की, जिसका बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं और दक्षिणपंथी संगठनों ने विरोध किया था.

फैसले के कुछ महीने बाद जनवरी 2019 में अब तक वर्जित रहे आयुवर्ग की दो महिलाओं बिंदू अमिनी एवं कनकदुर्गा ने अयप्पा स्वामी मंदिर में प्रवेश किया.

सबरीमला घटना के बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में राज्य की एलडीएफ नेतृत्व वाली सरकार को काफी नुकसान भी उठाना पड़ था. पार्टी को कुल 20 सीटों में से 19 पर हार का सामना करना पड़ा था.

श्रीधरन ने कहा कि छह अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा द्वारा उन्हें पलक्क्ड़ से उम्मीदवार बनाए जाने की उम्मीद है.

भाजपा कार्यालय आए श्रीधरन ने कहा, ‘पलक्कड़ विधानसभा सीट से भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार के नाम की घोषणा अब तक नहीं की गई है. मुझे पलक्कड़ के बारे में अध्ययन करना है लेकिन मोटे तौर पर दो साल में पलक्कड़ को केरल का सबसे बेहतर शहर और तीन से चार साल में देश का सबसे बेहतर शहर बनाने का लक्ष्य है.’

असम: पहले चरण के लिए 284 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाए गए

गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 47 सीटों के लिए 284 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र वैध पाये गए हैं.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने बृहस्पतिवार को यहां बताया कि 27 मार्च को पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन पत्रों की जांच के बाद 284 उम्मीदवारों के नामांकन वैध पाए गए हैं.

सत्तारूढ़ भाजपा से जिन प्रमुख उम्मीदवारों के नामांकन पत्र सही पाए गए है, उनमें मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (माजुली), विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्र नाथ गोस्वामी (जोरहाट), मंत्री रंजीत दत्ता (बेहाली) और संजय किशन (तिनसुकिया) शामिल हैं.

राजग गठबंधन के सहयोगी एजीपी मंत्री अतुल बोरा (बोकाखाट) और केशव महंत (कलियाबोर) के नामांकन पत्र भी वैध पाए गए.

असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रिपुन बोरा (गोहपुर), कांग्रेस विधायक दल के नेता देवव्रत सैकिया (नाजिरा) और कांग्रेस सचिव भूपेन बोरा (बिहपुरिया) के भी नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं.

पहले चरण के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख नौ मार्च थी और नामांकन पत्रों की जांच बुधवार को हुई. नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 12 मार्च है.

असम विधानसभा की 126 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान होगा. दूसरे चरण में 39 सीटों के लिए एक अप्रैल और तीसरे चरण में 40 सीटों के लिए छह अप्रैल को मतदान होगा.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)