राजनीति

एमके स्टालिन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली

तमिननाडु की राजधानी चेन्नई स्थिति राजभवन में डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के अलावा 34 मंत्रियों ने भी शपथ ली. स्टालिन ने दुरईमुरुगन जैसे वरिष्ठ नेताओं को अपने मंत्रिमंडल में बरक़रार रखा है, साथ ही 15 सदस्य पहली बार मंत्री बनेंगे.

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने शुक्रवार चेन्नई स्थित राजभवन में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. (फोटो: पीटीआई)

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने शुक्रवार चेन्नई स्थित राजभवन में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. (फोटो: पीटीआई)

चेन्नई: विधानसभा चुनाव में द्रमुक (द्रविड़ मुनेत्र कषगम- डीएमके) को मिली भारी जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष मुथुवेल करुणानिधि (एमके) स्टालिन ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.

राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने 68 वर्षीय स्टालिन को राजभवन में आयोजित साधारण समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. स्टालिन पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं.

उनके साथ 34 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण की.

समारोह में स्टालिन की पत्नी दुर्गा स्टालिन, बेटे उदयनिधि और दामाद सबारीसन भी मौजूद थे. विपक्ष के नेताओं में पूर्व उप मुख्यमंत्री और एआईएडीएमके समन्यवयक ओ. पन्नेरसेल्वम, मक्कल निधि माइम के नेता कमल हासन, तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष एल. गणेशन, एकआईएसएमके नेता शरतकुमार, कांग्रेस के पी. चिदंबरम समेत गठबंधन के नेता, एमडीएमके अध्यक्ष वाइको और राज्य के शीर्ष अधिकारी  समारोह में शामिल हुए.

शपथ ग्रहण समारोह कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए आयोजित किया गया था और सभी ने मास्क लगाया हुआ था.

द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन के मंत्रिमंडल में उनके सहित 34 सदस्य होंगे. स्टालिन ने दुरईमुरुगन जैसे वरिष्ठ नेताओं को अपने मंत्रिमंडल में बरकरार रखा है, साथ ही 15 सदस्य पहली बार मंत्री बनेंगे.

बीते बृहस्पतिवार को राजभवन ने जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि निर्वाचित मुख्यमंत्री स्टालिन द्वारा मंत्रियों के रूप में नियुक्ति के लिए दी गई व्यक्तियों की सूची को राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने मंजूरी दे दी है.

पहली बार मुख्यमंत्री बने स्टालिन गृह के अलावा सार्वजनिक एवं सामान्य प्रशासन सहित अखिल भारतीय सेवाएं, जिला राजस्व अधिकारी, विशेष कार्यक्रम कार्यान्वयन और दिव्यांगों के कल्याण विभाग को भी संभालेंगे.

द्रमुक के वरिष्ठ नेता एवं पार्टी महासचिव दुरईमुरुगन जल संसाधन मंत्री होंगे. वह 2006 से 2011 के बीच द्रमुक सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे.

दुरईमुरुगन उन 18 पूर्व मंत्रियों में शुमार हैं, जिन्हें इस बार भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई है.

चेन्नई के पूर्व मेयर एम. सुब्रमण्यन और उत्तर चेन्नई से पार्टी के नेता पीके सेकरबाबू उन व्यक्तियों में शामिल होंगे, जो पहली बार मंत्री बनेंगे. सुब्रमण्यन और सेकरबाबू को क्रमशः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ प्रबंधन विभाग आवंटित किए गए हैं.

पूर्व निवेश बैंकर पी. त्यागराजन को वित्त विभाग सौंपा गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे युवा विधायकों में से एक अन्बिल महेश पोय्याममोझी स्कूल शिक्षा मंत्री होंगे. मंत्रिमंडिल में दो महिला सदस्य- गीता जीवन और एन. कायलविझी सेल्वाराज भी होंगी, जिन्हें क्रमश: समाज कल्याण और महिला सशक्तिकरण मंत्री तथा अदि द्रवीडार कल्याण मंत्री का पद दिया गया है.

स्टालिन ने दुरईमुरुगन, टीआर बालू और केएन नेहरू सहित डीएमके के वरिष्ठ सदस्यों के साथ बीते बुधवार को राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से बुधवार को राजभवन में मुलाकात की थी, ताकि सरकार बनाने का दावा पेश किया जा सके.

बीते दो मई को हुई मतगणना में द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने 2019 लोकसभा चुनाव के अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराते हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में बेहतरीन जीत हासिल की थी.

विधानसभा चुनाव में द्रमुक ने 133 सीट जीत ली हैं. द्रमुक की सहयोगी कांग्रेस को 18 सीटें मिली हैं, जिसके बाद 234 सदस्यीय विधानसभा में इन दोनों पार्टियों को कुल 151 सीटें हो गई हैं.

विधानसभा की दो तिहाई सीटों पर जीत हासिल कर 68 वर्षीय स्टालिन ने 2019 में लोकसभा चुनाव के अपने शानदार प्रदर्शन को दोहराया है. द्रमुक और उसके सहयोगियों ने लोकसभा में राज्य की 39 में से 38 सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके बाद पार्टी ने 2019 के अंत में ग्रामीण निकाय चुनावों में भी अच्छा प्रदर्शन किया था.

सत्तारूढ़ अन्ना द्रमुक (एआईएडीएमके) को इस विधानसभा चुनाव में 66 सीटों पर जीत मिल सकी थी. वहीं, उसकी सहयोगी भाजपा को सिर्फ चार सीटों पर संतोष करना पड़ा है.

अलागिरि ने अपने भाई स्टालिन को जीत की बधाई दी

द्रमुक के निष्कासित नेता एमके अलागिरि ने अपने छोटे भाई एमके स्टालिन को बृहस्पतिवार को बधाई दी. अलागिरी की ओर से उनके पुत्र दयानिधि अलागिरी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे.

पार्टी सूत्रों ने बताया कि अलागिरि ने स्टालिन से बात कर उन्हें द्रमुक को जीत दिलाने तथा मुख्यमंत्री बनने की बधाई दी.

साल 2014 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते अलागिरि को द्रमुक से निष्कासित कर दिया गया था. इस साल की शुरुआत में अलागिरि ने दावा किया था कि स्टालिन कभी भी मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)