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पेट्रोल-डीज़ल के दाम एक महीने में 17वीं बार बढ़े, मुंबई में पेट्रोल की कीमत न्यूयॉर्क से दोगुनी

देश में पेट्रोल की कीमत 17 बार में 4.09 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 4.65 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है. राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले में कीमतें देश में सबसे ज़्यादा हैं, जहां पेट्रोल 105.52 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल 98.32 रुपये प्रति लीटर है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: वाहन ईंधन कीमतों में एक महीने में 17वीं बार बढ़ोतरी के बाद देश भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें मंगलवार को नई ऊंचाई पर जा पहुंचीं. हाल ये है कि मुंबई में पेट्रोल के दाम अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की तुलना में दोगुने हो गए हैं.

सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों की मूल्य अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 26 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 23 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई है.

दिल्ली में पेट्रोल 94.49 रुपये प्रति लीटर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जबकि डीजल की कीमत 85.38 रुपये प्रति लीटर है.

मूल्य वर्धित कर (वैट) और माल ढुलाई शुल्क जैसे स्थानीय करों की वजह से ईंधन की कीमतें एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न होती हैं. राजस्थान देश में पेट्रोल पर सबसे अधिक मूल्य वर्धित कर (वैट) लगाता है, इसके बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान आता है.

पेट्रोल की कीमत पहले ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में 100 रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी थी. इसके बाद से मंगलवार को दूसरी बार कीमतों में वृद्धि हुई है.

मुंबई में पेट्रोल की कीमत अब 100.47 रुपये (1.39 डॉलर) प्रति लीटर और डीजल 92.69 रुपये प्रति लीटर है. पेट्रोल की यह कीमत यह कीमत अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर की तुलना में करीब दोगुनी है. न्यूयॉर्क राज्य ऊर्जा अनुसंधान और विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के आधार पर समाचार वेबसाइट ब्लूमबर्ग ने बताया है कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 0.79 डॉलर है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय ईंधन की कीमतें पिछले एक साल में काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने सार्वजनिक वित्त को मजबूती प्रदान करने के लिए बार-बार बिक्री कर में बढ़ोतरी की है. कर अब खुदरा मूल्य का लगभग 60 प्रतिशत हो गए हैं और पेट्रोल तथा डीजल पर संघीय कर 2013 के बाद से लगभग छह गुना बढ़ गए हैं.

मंगलवार को कीमतों में वृद्धि चार मई के बाद से 17वीं वृद्धि है. पेट्रोल की कीमत 17 बार में 4.09 रुपये प्रति लीटर और डीजल 4.65 रुपये प्रति लीटर बढ़ी है.

पेट्रोलियम कंपनियां पिछले 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेंचमार्क ईंधन की औसत कीमत और विदेशी विनिमय दरों के आधार पर प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल की दरों में संशोधन करती हैं.

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में कीमतें देश में सबसे ज्यादा हैं, जहां पेट्रोल 105.52 रुपये प्रति लीटर और डीजल 98.32 रुपये प्रति लीटर है.

मालूम हो कि पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है. इन्हीं मानकों के आधार पर पेट्रोल और डीजल के दाम रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं.

कोरोना वायरस संक्रमण की खतरनाक दूसरी लहर को रोकने के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण मांग प्रभावित होने से मई में पेट्रोल और डीजल की बिक्री में एक महीने पहले की तुलना में करीब 17 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है. यही एक प्रमुख वजह है कि इन पर टैक्स बढ़ाया गया है.

सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन विक्रेता कंपनियों के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोल की बिक्री मई में गिरकर 17.9 लाख टन रह गई, जो पिछले एक साल का सबसे निम्न स्तर है.

हालांकि, पिछले साल मई के मुकाबले यह खपत लगभग 13 प्रतिशत अधिक रही, लेकिन यह कोविड के पहले 2019 में 24.9 लाख टन के स्तर से 28 प्रतिशत कम रही.

देश में पिछले साल मार्च में लगाया गया लॉकडाऊन दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन में से एक था, जिसमें सभी तरह की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को लगभग ठप कर दिया गया था.

इस साल हालांकि संक्रमण दर बहुत गंभीर है, लेकिन प्रतिबंध स्थानीय रहे हैं. लोगों का आवागमन पिछले साल की तरह उतना बाधित नहीं हुआ. कई राज्यों में कारखाने खुले रहे, जबकि राज्यों के बीच माल की आवाजाही भी उतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई.

देश में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन- डीजल की मांग मई 2021 में गिरकर 48.9 लाख टन रह गई, जो इससे पिछले महीने से 17 प्रतिशत और मई 2019 के मुकाबले 30 प्रतिशत कम रही है.

एयरलाइंस ने कम क्षमता के साथ परिचालन करना जारी रखा, लेकिन मई में जेट ईंधन (एटीएफ) की बिक्री 248,000 टन रही, जो अप्रैल 2021 की तुलना में 34 प्रतिशत और मई 2019 की तुलना में 61.3 प्रतिशत कम थी. मई 2020 में जेट ईंधन की बिक्री 109,000 टन रही थी.

मई 2021 में रसोई गैस सिलेंडर की बिक्री मात्रा साल-दर-साल छह प्रतिशत घटकर 21.6 लाख टन रही, लेकिन यह मई 2019 में बेचे गए 20.3 लाख टन की तुलना में छह प्रतिशत अधिक थी.

एलपीजी एकमात्र ईंधन रहा, जिसने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान वृद्धि दर्ज की थी, क्योंकि सरकार ने कोविड -19 राहत पैकेज के हिस्से के रूप में मुफ्त सिलेंडर दिए थे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)