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वैज्ञानिक और शायर गौहर रज़ा को ‘देशद्रोही’ बताने के लिए ज़ी न्यूज़ पर एक लाख का जुर्माना

मुशायरे को बताया था ‘अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा’, न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी ने दिया चैनल पर माफ़ीनामा प्रसारित करने का आदेश.

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मार्च, 2016 में ज़ी न्यूज़ पर हुए प्रसारण का स्क्रीन शॉट.

एक मुशायरे में नज़्म पढ़ने वाले वैज्ञानिक व शायर गौहर रज़ा के ख़िलाफ़ अपमानजनक प्रसारण करने वाले ज़ी न्यूज पर न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी (एनबीएसए) ने एक लाख का ज़ुर्माना लगाया है. साथ ही अथॉरिटी ने चैनल से कहा है कि वह मार्च 2016 में हुए इस प्रसारण के लिए माफ़ीनामा प्रसारित करे.

गौहर रज़ा ने शंकर-शाद मुशायरे में एक नज़्म पढ़ी थी, जिसमें सत्ता पर कुछ सवाल थे. इसके बाद ज़ी न्यूज़ ने ‘अफ़जल प्रेमी गैंग का मुशायरा‘ शीर्षक से एक कार्यक्रम प्रसारित किया था जिसमें गौहर रज़ा को ‘देशद्रोही’ बताते हुए उन्हें संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरु का समर्थक कहा था.

इस प्रसाारण के बाद ज़ी न्यूज़ के ख़िलाफ़ गौहर रज़ा ने न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी में शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में उनके साथ अशोक वाजपेयी, शुभा मुद्गल, शर्मिला टैगोर और सईदा हमीद जैसे नामी कलाकार भी थे. मशहूर वकील वृंदा ग्रोवर ने गौहर रज़ा की तरफ से एनबीएसए में उनका पक्ष रखा.

एनबीएसए ने अपने आदेश में कहा कि एक नागरिक के तौर पर गौहर रज़ा के बोलने के अधिकार को नहीं रोका जा सकता. ज़ी न्यूज़ गौहर रज़ा के ख़िलाफ़ ग़लत, दुर्भावनापूर्ण और तोड़मरोड़ कर कवरेज किया, जिसके लिए वह जवाबदेह है.

एनबीएसए ने अपने आदेश में कहा है कि आठ सितंबर को शाम 9 बजे चैनल को हिंदी में बड़े फॉन्ट में फुल स्क्रीन पर माफ़ी मांगनी होगी. प्रसारण साफ आवाज़ में और धीमी स्पीड से प्रसारित किया जाएगा.

इसके अलावा चैनल को सात दिन के अंदर एक लाख रुपये का ज़ुर्माना भी भरना होगा. इस आदेश में एनबीएसए ने कहा कि बड़े चैनल नागरिकों के बोलने के अधिकार को रौंद नहीं सकते.