राजनीति

झारखंड सरकार गिराने की साज़िश: दो आरोपियों ने भाजपा नेताओं का नाम लिया, उन्होंने इनकार किया

बीते 24 जुलाई को एक कांग्रेस विधायक की शिकायत पर झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने की साज़िश रचने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. तीन में से दो आरोपियों ने पुलिस को दिए अपने बयान में महाराष्ट्र के दो भाजपा नेताओं के साथ सत्ताधारी गठबंधन के तीन विधायकों, बिचौलिओं और फाइनेंसरों का नाम लिया है.

हेमंत सोरेन. (फोटो: पीटीआई)

दुमका: झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार को गिराने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार तीन आरोपियों में से दो ने पुलिस को दिए अपने बयान में दो भाजपा नेताओं का नाम लिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आरोपियों के बयान के अनुसार, झारखंड में सत्ताधारी गठबंधन के तीन विधायक कथित तौर पर तीनों आरोपियों के साथ दिल्ली गए थे, जहां वे कथित साजिश के तहत महाराष्ट्र के दो भाजपा नेताओं और अन्य से मिले थे.

महाराष्ट्र में नागपुर जिले आने वाले दोनों भाजपा नेताओं- कामठी से पूर्व विधायक और पूर्व राज्य ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और कटोल से पार्टी के पार्षद चरण सिंह ठाकुर, ने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

उन्होंने कहा कि वे कभी झारखंड नहीं गए या राज्य के बारे में इतना जानते हैं कि इस तरह की किसी साजिश के बारे में सोच भी नहीं सकते.

महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा, ‘राज्य भाजपा और उसके नेताओं के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं. आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है. यहां तक कि झारखंड के विधायकों ने भी आरोपों से इनकार किया है.’

गिरफ्तार आरोपी अभिषेक दुबे, जो झारखंड में एक ठेकेदार के रूप में काम करता है और निवारण प्रसाद महतो, जिन्होंने बोकारो से 2019 राज्य का चुनाव लड़ा था, ने 22 जुलाई को झारखंड पुलिस को दिए अपने बयान में कहा था कि उन्हें गिरफ्तार किए गए तीसरे आरोपी अमित सिंह ने सोरेन सरकार को अस्थिर करने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त का हिस्सा बनने के लिए संपर्क किया था.

उनके बयानों में सत्तारूढ़ गठबंधन के तीन विधायकों का नाम नहीं है.

बीते 22 जुलाई को पुलिस ने बेरमो (जिला बोकारो) से कांग्रेस के विधायक कुमार जयमंगल की तीनों के साजिश में शामिल होने वाली शिकायत पर कोतवाली पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किए जाने के दो दिन बाद 24 जुलाई को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था.

पुलिस को दिए अपने बयान में अभिषेक दुबे और निवारण प्रसाद महतो ने कहा था कि वे 15 जुलाई को झारखंड के तीन विधायकों के साथ रांची से निकले और जय कुमार बेलखेड़े नामक बिचौलिये के साथ दिल्ली में चंद्रशेखर बावनकुले और चरण सिंह ठाकुर से मिले.

आरोपी अभिषेक दुबे के बयान में कहा गया है कि तीनों विधायक दिल्ली के द्वारका के एक होटल में गए और कथित तौर पर वरिष्ठ नेताओं से 15 मिनट तक मुलाकात की.

दुबे के अनुसार, अगले दिन 16 जुलाई को तीनों विधायकों को एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया. उन्होंने पुलिस को बताया कि कोई पैसा नहीं मिलने पर वे दिल्ली से रांची वापस आ गए.

अपने बयान में महतो ने कहा, ‘हमारे दोस्त बनने के बाद उन्होंने (चरण सिंह ठाकुर) मुझसे कुछ विधायकों के साथ बैठक तय करवाने के लिए कहा. हम 15 जुलाई को दिल्ली के लिए निकले और बैठक के बाद वे चले गए. हम 17 जुलाई को रांची के लिए निकले थे, जबकि अभिषेक दुबे बेलखेड़े के साथ दिल्ली में रुके थे.’

गिरफ्तार आरोपी निवारण प्रसाद महतो ने कहा कि वह बोकारो के लिए चला गया. उसने अपने बयान में कहा, ‘हमारे अलावा जय कुमार बेलखेड़े, महाराष्ट्र के विधायक, बिचौलिए और फाइनेंसर्स इस साजिश में शामिल थे.’

पुलिस ने अभी तक केवल एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि तीनों आरोपियों ने कहा है कि वे सरकार के खिलाफ साजिश में शामिल थे और इसे अस्थिर करने की योजना बना रहे थे.

आरोपों को खारिज करते हुए चंद्रशेखर बावनकुले ने नागपुर में मीडिया से कहा, ‘मैं बहुत छोटा (भाजपा) कार्यकर्ता हूं. मैं महाराष्ट्र में पार्टी के महासचिव के रूप में काम करता हूं. मेरा झारखंड से कोई संबंध नहीं है. मैं झारखंड भी नहीं गया हूं. मेरे पास वहां की सरकार गिराने की औकात नहीं है.’

इसे भाजपा को बदनाम करने की साजिश बताते हुए बावनकुले ने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि इस मामले में मेरा नाम कैसे आया. पुलिस जांच करेगी.’

चरण सिंह ठाकुर ने कहा, ‘मैं कटोल का एक छोटा आदमी हूं, जहां मैं नगर परिषद में सिर्फ एक पार्टी समूह का नेता हूं. मैं शायद ही कभी कटोल से बाहर निकलता हूं. मैंने झारखंड को भी नहीं देखा.’

बता दें कि राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की गठबंधन वाली सरकार है.

81 सदस्यों वाले विधानसभा में सत्ताधारी गठबंधन के पास 51 विधायक हैं, जिसमें उपरोक्त तीनों दलों के साथ एनसीपी और भाकपा-माले भी शामिल है. वहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले विपक्ष में 30 विधायक हैं, जिसमें 26 भाजपा के और दो आजसू और दो निर्दलीय हैं.