केंद्र ने छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना की घोषणा की

राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना के तहत यात्री ट्रेन, रेलवे स्टेशन से लेकर सड़क जैसे अलग-अलग बुनियादी ढांचा क्षेत्रों का मौद्रिकरण शामिल है. यानी सरकार मौद्रिकरण के ज़रिये इन क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्रों को बेचेगी. कोविड लॉकडाउन और उसके बाद की मंदी ने निजीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है, सरकार को अभी भी चालू वित्त वर्ष से मार्च 2022 तक इस तरह की बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.

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The Union Minister for Finance and Corporate Affairs, Smt. Nirmala Sitharaman chairing the Pre-Budget consultations with the experts of water and sanitation sectors, through video conferencing, in New Delhi on December 18, 2020.

राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना के तहत यात्री ट्रेन, रेलवे स्टेशन से लेकर सड़क जैसे अलग-अलग बुनियादी ढांचा क्षेत्रों का मौद्रिकरण शामिल है. यानी सरकार मौद्रिकरण के ज़रिये इन क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्रों को बेचेगी. कोविड लॉकडाउन और उसके बाद की मंदी ने निजीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है, सरकार को अभी भी चालू वित्त वर्ष से मार्च 2022 तक इस तरह की बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (फाइल फोटो: पीआईबी)

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते सोमवार को छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना (एनएमपी) की घोषणा की है.

इसके तहत यात्री ट्रेन, रेलवे स्टेशन से लेकर हवाई अड्डे और सड़कें जैसे अलग-अलग बुनियादी ढांचा क्षेत्रों का मौद्रिकरण शामिल हैं. इसका मतलब है कि सरकार मौद्रिकरण के जरिये इन क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बेचेगी.

इन बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निजी कंपनियों को शामिल करते हुए संसाधन जुटाए जाएंगे और संपत्तियों का विकास किया जाएगा.

राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना के तहत वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 तक चार साल की अवधि में केंद्र सरकार की मुख्य संपत्तियों के माध्यम से छह लाख करोड़ रुपये की निवेश संभावनाओं का अनुमान है.

सरकार ने मौद्रिकरण के लिए कुल 400 रेलवे स्टेशनों, 90 यात्री रेलगाड़ियों, रेलवे के कई खेल स्टेडियम और कॉलोनियों के साथ ही प्रसिद्ध कोंकण और पहाड़ी रेलवे की पहचान की है.

सड़क के बाद रेलवे दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, जिसे महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना में शामिल किया गया है. वित्त वर्ष 2025 तक चार वर्षों में रेलवे की ब्राउनफील्ड अवसंरचना संपत्तियों का मौद्रिकरण कर 1.52 लाख करोड़ रुपये से अधिक हासिल किए गाएंगे.

ब्राउनफील्ड संपत्तियों से आशय ऐसी अवसंरचनाओं से है, जो फिलहाल उपयोग में नहीं हैं और उन्हें विकसित किया जाना है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा सोमवार को जारी की गई छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना (एनएमपी) में रेलवे की संपत्ति का 26 प्रतिशत योगदान होगा.

निजी निवेश हासिल करने के लिए चेन्नई, भोपाल, वाराणसी एंव वडोदरा सहित भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) के करीब 25 हवाई अड्डे, 40 रेलवे स्टेशनों, 15 रेलवे स्टेडियम और कई रेलवे कॉलोनी की पहचान की गई है. इन्हें निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित किया जाएगा.

योजना के तहत निजी कंपनियां इन्विट (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) मार्ग का इस्तेमाल करके एक निश्चित मुनाफे के लिए परियोजनाओं में निवेश कर सकती हैं. इसके अलावा इन परिसंपत्तियों को सरकारी एजेंसी को वापस करने से पहले एक निश्चित अवधि के लिए परिसंपत्तियों का संचालन और विकास कर सकती हैं. इसके तहत गोदाम और स्टेडियम जैसी कुछ संपत्तियां भी संचालन के लिए लंबी अवधि के पट्टे पर दी जा सकती हैं.

सीतारमण ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘संपत्ति मौद्रिकरण पाइपलाइन के जरिये एनआईपी (नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन) को अगले चरण में ले जाया गया है, जहां आप सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पर ध्यान देंगे.’

उन्होंने यह भी कहा कि संपत्तियों के मौद्रिकरण में जमीन को बेचा नहीं जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा, ‘एनएमपी ब्राउनफील्ड (मौजूदा) बुनियादी ढांचा संपत्तियों से संबंधित है, जहां निवेश पहले हो चुका है, जहां एक पूर्ण संपत्ति है, जो या तो बेकार पड़ी है या जिसमें संभावनाओं का पूरा निवेश नहीं पाया है या जिसका क्षमता के अनुरूप इस्तेमाल नहीं हुआ है.’

सीतारमण ने कहा, ‘इसलिए इसमें निजी भागीदारी लाकर हम इसका बेहतर तरीके से मौद्रिकरण करने में सक्षम होंगे, और इसके माध्यम से हासिल होने वाले संसाधनों का बुनियादी ढांचे में और निवेश करने में सक्षम होंगे.’

उन्होंने कहा, ‘बुनियादी ढांचा एनएमपी में पहले से मौजूद संपत्तियों की बात की जा रही है जिनका बेहतर मौद्रिकरण करने की जरूरत है. संपत्ति का स्वामित्व सरकार के पास बना रहेगा और एक निश्चित समय के बाद उनका नियंत्रण लौटाना अनिवार्य होगा.’

सीतारमण ने कहा, ‘इसलिए ऐसी कोई अस्पष्टतता नहीं रहनी चाहिए कि सरकार कुछ बेच रही है. ऐसा नहीं है. ये मौजूदा संपत्तियां हैं जिन पर सरकार का स्वामित्व बना रहेगा.’

मौद्रिकरण योजना का आधे से अधिक हिस्सा सड़क और रेलवे क्षेत्र से जुड़ा है.

सरकार की योजना सड़क क्षेत्र से 1.6 लाख करोड़ रुपये, रेलवे संपत्ति से 1.52 लाख करोड़ रुपये, बिजली ट्रांसमिशन लाइनों से 45,200 करोड़ रुपये, प्राकृतिक गैस संपत्ति से 39,832 करोड़ रुपये और दूरसंचार परियोजनाओं से 35,100 करोड़ रुपये जुटाने की है.

1.6 लाख करोड़ रुपये इस समय चालू राष्ट्रीय राजमार्गों और नई सड़कों के 26,700 किलोमीटर के मौद्रिकरण से आएगा. इनमें से कुछ संपत्तियों के मौद्रिकरण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इन्विट (इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट या InvIT) का रास्ता अपनाएगा. यानी इन्विट के जरिये इन राजमार्गों के लिए संसाधन जुटाए जाएंगे.

वित्त वर्ष 2022-25 के दौरान मौद्रिकरण के लिए चिह्नित की गई प्रमुख रेल संपत्तियों में 400 रेलवे स्टेशन, 90 यात्री रेलगाड़ियां, 1400 किलोमीटर लंबी रेल की पटरी, कोंकण रेलवे का 741 किलोमीटर लंबा हिस्सा, 15 रेलवे स्टेडियम और चयनित रेलवे कॉलोनियां और चार पहाड़ी रेल शामिल हैं. निजी भागीदारी के जरिये इनका विकास किया जाएगा.

कोंकण रेलवे से 7,281 करोड़ और पहाड़ों पर चलने वाली रेलवे के मौद्रीकरण से 630 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.

बिजली के 28,608 सर्किट किलोमीटर बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के मौद्रिकरण से 45,200 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है और अन्य 39,832 करोड़ रुपये छह गीगावाट की विद्युत उत्पादन संपत्तियों से आएंगे.

दूरसंचार क्षेत्र में भारतनेट फाइबर के 2.86 लाख किलोमीटर और बीएसएनएल एवं एमटीएनएल के 14,917 सिग्नल टावरों के मौद्रिकरण से 35,100 करोड़ रुपये मिलेंगे. इसी प्रकार गोदामों और कोयला खदानों में मौद्रिकरण से 29,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा.

वहीं 8,154 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइनों के मौद्रिकरण से 24,462 करोड़ रुपये और 3,930 किलोमीटर उत्पाद पाइपलाइनों के मौद्रिकरण से 22,504 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.

हवाई अड्डों के मौद्रिकरण से 20,782 करोड़ रुपये और बंदरगाहों से 12,828 करोड़ रुपये मिलेंगे.

नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम सहित दो राष्ट्रीय स्टेडियम और बेंगलुरु एवं जीरकपुर (चंडीगढ़ के पास) में स्थित दो क्षेत्रीय केंद्रों के मौद्रिकरण से 11,450 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है.

दिल्ली में सरोजिनी नगर एवं नौरोजी नगर सहित सात आवासीय कॉलोनियों के पुनर्विकास और साथ ही घिटोरनी में 240 एकड़ भूमि पर आवास/वाणिज्यिक इकाइयों के विकास से भी 15,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का आकलन है.

इस दिशा में बजट में एक राष्ट्रीय मौद्रिकरण योजना तैयार करने का भी प्रावधान किया गया. ढांचागत क्षेत्र के मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श कर नीति आयोग ने योजना पर रिपोर्ट तैयार की थी.

ईवाई इंडिया में ढांचागत क्षेत्र पर नजर रखने वाली भागीदार अभ्या अग्रवाल ने योजना की घोषणा को लेकर कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में मौजूदा ढांचागत संपत्तियों के छह लाख करोड़ रुपये के चार साल की राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन से निश्चित रूप से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा. योजना के तहत संख्या, आकार और संपत्ति के प्रकार को लेकर स्पष्टता से निवेशकों को आगे बढ़ने का विश्वास मिलेगा.

कांग्रेस ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की छह लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय मुद्रीकरण योजना (एनएमपी) की घोषणा को लेकर सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आकाश, पाताल और जमीन सब बेच डालेंगे.

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘60 लाख करोड़ रुपये की देश की संपत्ति की सेल- सड़क, रेल, खदान, दूरसंचार, बिजली, गैस, हवाईअड्डे ,बंदरगाह, खेल स्टेडियम… यानी मोदी जी… आसमान, जमीन और पाताल सब बेच डालेंगे. भाजपा है तो देश की संपत्ति नहीं बचेगी.’

हालांकि कोरोना वायरस लॉकडाउन और उसके बाद की मंदी ने निजीकरण की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है, सरकार को अभी भी चालू वित्त वर्ष से मार्च 2022 तक इस तरह की बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.

चालू वित्त वर्ष में सरकार को भारतीय जीवन बीमा निगम को सूचीबद्ध करने और सरकारी स्वामित्व वाली तेल रिफाइनर भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और एयर इंडिया लिमिटेड का निजीकरण करने की उम्मीद है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)