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मध्य प्रदेश: शिक्षा मंत्री का फरमान, यस मैम की बजाय ‘जय हिंद’ बोलें स्कूली बच्चे

शिक्षा मंत्री विजय शाह का कहना है कि बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाने के लिए यह फैसला लिया गया है.

School Children PTI

प्रतीकात्मक फोटो (पीटीआई)

देशभक्ति सिखाने के अपने उद्देश्य की शुरुआत भाजपा अब छोटी उम्र से करने को लेकर प्रतिबद्ध हो चुकी है. बीते साल स्कूलों में राष्ट्रगान गाने और तिरंगा फहराने को अनिवार्य करने के फैसले के बाद अब मध्य प्रदेश सरकार ने देशभक्ति का पाठ पढ़ाने के लिए बच्चों से अटेंडेंस में ‘यस मैम/सर’ की जगह ‘जय हिंद’ कहलवाने का निर्णय लिया है.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक इस ‘पाठ’ की शुरुआत राज्य के सतना ज़िले से होगी, जहां प्रयोग के बतौर 1 अक्टूबर से महीने भर के लिए यह नियम लागू किया जाएगा. इसके बाद यदि इसे कैबिनेट की मंजूरी मिल जाती है तो इसे 1 नवंबर से राज्य के सभी स्कूलों में लागू कर दिया जाएगा.

इस नियम पर स्कूली शिक्षा मंत्री विजय शाह के अनुसार बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है. उनका कहना है, ‘जय हिंद सभी धर्मों के विद्यार्थियों द्वारा स्वीकार्य है, इसलिए मैंने ये फैसला किया है. हम अपनी संस्कृति को जीवित रखना चाहते हैं, जिसे ये नई पीढ़ियां भूलती जा रही हैं.’

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए शाह ने कहा कि अगर (सतना में) ये प्रयोग सफल होता है तो मुख्यमंत्री की इजाज़त से इसे पूरे मध्य प्रदेश के विद्यालयों के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा. अभी ये केवल (सतना के निजी स्कूलों के लिए ) सुझाव ही है, हमें उम्मीद है कि वे इसका पालन करेंगे क्योंकि ये देशभक्ति से जुड़ा है.

गौरतलब है कि विजय शाह देशभक्ति की भावनाएं जाग्रत करने के इस अभियान में लंबे समय से लगे हुए हैं. बीते साल स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज फहराने को अनिवार्य करने के फैसले के पीछे भी शाह ही थे.

तब शाह ने आदेश दिया था कि अगर स्कूल इस नियम का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें फटकार तो लगेगी ही, साथ ही उनकी मान्यता ख़ारिज या कुछ समय के लिए रद्द भी की जा सकती है.

शाह के इस निर्णय पर मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष कुणाल चौधरी का कहना है, ‘हमें जय हिंद बोलने से कोई परेशानी नहीं है, लेकिन स्कूली शिक्षा विभाग का मुख्य काम विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाना है और वे इसमें असफल हैं. विद्यार्थियों को क्या पहनना या बोलना चाहिए या कौन-सी संस्कृति का पालन करना चाहिए पर ध्यान देने के बजाय सरकार को स्कूलों और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति सुधारनी चाहिए.’