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फोर्ड मोटर के भारत में वाहन निर्माण बंद करने के बाद डीलरों ने सरकार से की दख़ल देने की मांग

अमेरिका की फोर्ड मोटर कंपनी ने भारत में अपने दो संयंत्रों में वाहन उत्पादन बंद करने और केवल आयातित वाहनों को ही बेचने की घोषणा की है. कंपनी के इस फैसले से क़रीब 4,000 कर्मचारी और ऐसे 150 डीलर प्रभावित होंगे, जो लगभग 300 बिक्री केंद्रों का कामकाज संभालते हैं.

(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: अमेरिका की प्रमुख वाहन निर्माता फोर्ड मोटर कंपनी के भारत में अपने विनिर्माण बंद करने के कुछ दिनों बाद ही कंपनी के कर्मचारियों और डीलरों ने पूरी तरह से बंद की योजना को चुनौती देने का फैसला किया है.

उन्होंने कहा कि देश में केवल ‘फोर्ड बिजनेस सॉल्यूशंस’ के कामकाज को चालू रखने और भारत में बिक्री के लिए वाहनों के निर्माण को तुरंत बंद करने के फोर्ड इंडिया का निर्णय सीधे तौर पर हजारों कर्मचारियों और संबंधित क्षेत्रों के सैकड़ों अन्य लोगों को प्रभावित करेगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 की चौथी तिमाही तक साणंद में वाहन असेंबली और वर्ष 2022 की दूसरी तिमाही तक चेन्नई में वाहन और इंजन निर्माण के कार्य को बंद करने के फोर्ड इंडिया के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल्स डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के विंकेश गुलाटी ने कहा कि सरकार को तत्काल प्रभाव से दखल देना चाहिए और उसने जो वाहन बेचे हैं उनसे जुड़ी समयावधि तक फोर्ड इंडिया को सेवा जारी रखने के लिए मजबूर करना चाहिए.

गुलाटी ने कहा कि फोर्ड इंडिया ने वाहन मालिकों के लिए अपनी सेवाएं जारी रखने वाले डीलरों को पर्याप्त मुआवजा देने का वादा किया है.

गुलाटी ने कहा, ‘लेकिन यह वादा डीलरों द्वारा किए गए भारी निवेश की भरपाई नहीं करने वाला है. आदर्श रूप में सरकार को दखल देना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कंपनी एक उचित अवधि के लिए अपनी सेवाएं जारी रखे, क्योंकि वे अभी भी भारत में अपने वाहन बेच रहे हैं.’

एफएडीए सीईओ सहर्ष दमानी ने कहा, ‘फोर्ड ने निश्चित तौर पर कहा है कि वे अपना सेवा सहयोग जारी रखेंगे लेकिन भारत में संचालन बंद करने से इस पर सवाल उठता है. भारत छोड़ते हुए कंपनियां ऐसी बातें कहती हैं लेकिन वे लंबे समय तक काम नहीं करती हैं, क्योंकि स्पेयर पार्ट्स और कार्यबल के मुद्दे खड़े हो जाते हैं.’

एफएडीए ने कहा कि परेशान डीलर पहले से ही उससे गुहार लगाने लगे हैं. दमानी ने कहा, ‘इससे डीलरों, डीलरशिप कर्मचारियों और उनके परिवारों पर प्रभाव पड़ेगा. ऑटो रिटेल के बाहर गुजरात और तमिलनाडु में फोर्ड को आपूर्ति करने वाले कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर्स (मोटर का पार्ट बनाने वाले) भी प्रभावित होंगे.’

एफएडीए के अनुसार, 2,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 170 डीलर और 391 आउटलेट हैं.

उसने कहा, ‘जहां फोर्ड इंडिया में 4,000 लोग कार्यरत हैं, वहीं डीलरशिप में लगभग 40,000 लोग कार्यरत हैं. फोर्ड इंडिया के डीलरों के पास वर्तमान में 1,000 वाहन हैं, जो प्रतिष्ठित भारतीय बैंकों से इन्वेंट्री फंडिंग के माध्यम से 150 करोड़ रुपये हैं. फोर्ड इंडिया ने भी पांच महीने पहले तक कई डीलरों को नियुक्त किया था. ऐसे डीलरों को उनके जीवन का सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.’

रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई में कई फोर्ड कर्मचारी बात करने के लिए अनिच्छुक थे, क्योंकि वे अभी भी अपनी नौकरी और संभावित मुआवजे के पैकेज के बारे में कंपनी के कदम से अनजान थे.

वहीं, फोर्ड के कम से कम दो इंजीनियरों ने कहा कि वे अभी भी भविष्य के बारे में किसी सूचना का इंतजार कर रहे हैं. उनमें से एक ने कहा, ‘या तो उन्हें निकाल दिया जाएगा या कुछ को विदेशी संयंत्रों में चल रहीं परियोजनाओं के हिस्से के रूप में रखा जा सकता है. हमें इंतजार करना होगा और देखना होगा.’

चेन्नई फोर्ड कर्मचारी संघ के आर. सुरेश ने कहा कि सोमवार को कंपनी के प्रतिनिधियों से मिलने पर उन्हें कंपनी की योजना के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल सकती है।

बता दें कि भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए लगभग तीन दशकों के संघर्ष के बाद अमेरिका की प्रमुख वाहन निर्माता फोर्ड मोटर कंपनी ने बीते बृहस्पतिवार (नौ सितंबर) को कहा था कि वह देश के अपने दो संयंत्रों में वाहन उत्पादन बंद कर देगी और केवल आयातित वाहनों को ही बेचेगी.

कंपनी, जिसने अपने चेन्नई (तमिलनाडु) और साणंद (गुजरात) संयंत्रों में लगभग 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया है, उसे विगत 10 वर्षों के दौरान करीब दो अरब डॉलर का एकीकृत परिचालन नुकसान हुआ है.

कंपनी के इस फैसले से करीब 4,000 कर्मचारी और ऐसे 150 डीलर प्रभावित होंगे, जो करीब 300 बिक्री केंद्रों का कामकाज संभालते हैं.