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महाराष्ट्र: अभिनेता सोनू सूद के दफ़्तरों पर ‘सर्वे’ के बाद उनके घर पहुंचे आयकर अधिकारी

बताया जा रहा है कि अभिनेता सोनू सूद के घर पर की जा रही जांच टैक्स चोरी के आरोपों और लखनऊ में किए गए एक संपत्ति सौदे से जुड़ी है. इससे पहले बुधवार को आयकर विभाग के अधिकारी कथित कर चोरी मामले की जांच के सिलसिले में सूद से जुड़े मुंबई के कुछ परिसरों में पहुंचे थे.

सोनू सूद. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: आयकर अधिकारियों द्वारा अभिनेता सोनू सूद से संबंधित दफ्तरों का ‘सर्वे’ करने के एक दिन बाद अधिकारी गुरुवार 16 सितंबर को मुंबई के जुहू में उनके घर पर पहुंचे.

रिपोर्ट्स के अनुसार, वे लखनऊ की एक रियल एस्टेट कंपनी के साथ किए गए संपत्ति सौदे की जांच के लिए पहुंचे थे.

एनडीटीवी ने जांच से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया है कि उनके घर पर की जा रही जांच टैक्स चोरी के आरोपों और संबंधित संपत्ति सौदे से जुड़ी है.

दैनिक भास्कर के अनुसार, बुधवार शाम से गुरुवार सुबह तक सूद के कार्यालयों और परिसरों में आयकर विभाग की टीमों ने लगातार 20 घंटे तक वित्तीय रिकॉर्ड्स की जांच की थी.

अखबार के अनुसार, अधिकारियों ने अभिनेता के घर पर मौजूद उनके परिवार और स्टाफ से भी पूछताछ की, साथ ही वे यहां से कुछ दस्तावेज भी अपने साथ ले गए हैं.

उल्लेखनीय है कि जिस तरह अभिनेता ने मार्च 2020 में कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान कई प्रवासी श्रमिकों की मदद की थी, उन्हें ‘प्रवासियों के मसीहा’ के नाम से पहचाना जाने लगा था. उन्होंने विभिन्न शहरों में फंसे सैकड़ों किलोमीटर पैदल जाने को तैयार प्रवासियों को उनके गांवों-कस्बों तक पहुंचाने के लिए हवाई जहाज बुक किए थे और बसें किराये पर ली थीं.

माना जा रहा है ये ‘छापे’ (जिन्हें अधिकारी सर्वे बता रहे हैं) इसी के मद्देनजर उनके खिलाफ छेड़े गए ‘विच-हंट’ का हिस्सा हैं.

ये छापे (‘सर्वे’) दिल्ली सरकार द्वारा स्कूली छात्रों के ‘देश का मेंटर’ कार्यक्रम के लिए सोनू सूद को ब्रांड एंबेसडर घोषित करने के कुछ दिनों बाद हो रहे हैं. इस कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों का उनके करिअर को लेकर मार्गदर्शन दिया जाएगा.

हाल ही में सूद ने अरविंद केजरीवाल से भी मुलाकात की थी, जिससे अटकलें लगाई जा रही थीं कि उन्हें आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया जा सकता है, हालांकि उन्होंने ऐसी किसी योजना से इनकार किया है.

सूद द्वारा की जाने वाली मदद केवल प्रवासी श्रमिकों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से सूचना मिलने पर उन्होंने देश भर के कई लोगों की मदद भी की.

हाल ही में उन्होंने भविष्य में अधिक लोगों तक पहुंचने के उद्देश्य से एक चैरिटी संगठन भी शुरू किया है. अपने दान के लिए नेताओं और विभिन्न दलों से तारीफ पाने के बावजूद उन्होंने हमेशा यह कहा है कि उनके कामों का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है.

उधर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की इस बात को लेकर आलोचना होती रही है कि वह आयकर विभाग के साथ-साथ सीबीआई, एनआईए और ईडी जैसी सरकारी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं और सरकार की आलोचना करने वाले किसी भी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए करती रही है.