स्वतंत्रता संग्राम से भी बड़ा था राम मंदिर आंदोलनः विश्व हिंदू परिषद

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि 1947 में देश को राजनीतिक आज़ादी मिली पर राम मंदिर आंदोलन के ज़रिये धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिली. जैन ने यह भी कहा कि चंदा अभियान ने पूरे देश को साथ लाकर बताया कि राम ही देश को एकजुट कर सकते हैं. धर्मनिरपेक्ष राजनीति ने सिर्फ देश को बांटा ही है.

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(फाइल फोटो: पीटीआई)

विहिप के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि 1947 में देश को राजनीतिक आज़ादी मिली पर राम मंदिर आंदोलन के ज़रिये धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिली. जैन ने यह भी कहा कि चंदा अभियान ने पूरे देश को साथ लाकर बताया कि राम ही देश को एकजुट कर सकते हैं. धर्मनिरपेक्ष राजनीति ने सिर्फ देश को बांटा ही है.

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संयुक्त महासचिव सुरेंद्र जैन ने रविवार को एक अप्रत्यशित बयान में कहा कि राम मंदिर आंदोलन स्वतंत्रता संग्राम से भी बड़ा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विहिप की ओर से जारी बयान में जैन के हवाले से कहा गया है कि 1947 में भारत को राजनीतिक स्वतंत्रता मिली लेकिन राम मंदिर आंदोलन के जरिये हमें हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता मिली. यह स्वतंत्रता संग्राम से भी बड़ा आंदोलन था.

उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर ने ‘रामराज्य के युग की यात्रा शुरू की और मंदिर के निर्माण के बाद भारत का भाग्य बेहतर’ होगा.

जैन ने कहा, ‘मौजूदा सदी राम की है. चंदा अभियान पूरे देश को एकजुट करने का सेतु बन गया. इससे सिद्ध होता है कि सिर्फ राम ही देश को एकजुट कर सकते हैं. धर्मनिरपेक्ष राजनीति ने देश को सिर्फ विभाजित ही किया है.’

इस बीच ‘सब के राम’ शीर्षक से एक किताब के विमोचन के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने रविवार को कहा कि राम मंदिर आंदोलन ने ‘हिंदू समाज को जागृत किया है और यह हिंदुओं के लिए आत्म-अनुभूति  का क्षण’ बन गया.

इस कार्यक्रम का आयोजन विहिप ने किया था.

विहिप के बयान में कुमार के हवाले से कहा गया, ‘जो लोग कह रहे थे कि हिंदुत्व की भावनाएं समाप्त हो रही हैं, उनकी शंकाओं का जवाब राम मंदिर के लिए मिल रहे चंदे से मिल गया है. राम मंदिर आंदोलन हिंदू समाज का आत्म-अनुभूति है. इसने हिंदू समाज को जगाया है. यह आंदोलन प्रतिक्रिया का परिणाम नहीं बल्कि हिंदुओं की प्रतिबद्धता का परिणाम था.’

उन्होंने कहा, ‘हमारा सपना सौहार्दपूण समाज का है. हमारी सहनशीलता हमारी कायरता की वजह से नहीं बल्कि हमारे साहस और उद्यम की वजह से है.’

उल्लेखनीय है कि नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन की शुआत के बाद साल 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था.

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें विवादित भूमि का स्वामित्व सौंपा और मुस्लिम पक्षकारों को अन्य स्थान पर भूमि दिए जाने का निर्देश दिया। इसके बाद बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के आरोपियों को बरी कर दिया गया था.

रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्रे ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे राम मंदिर का निर्माण अभी अंतिम चरण में हैं. इसे 2024 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले दिसंबर 2023 में जनता के लिए खोले जाने की उम्मीद है.