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पैराडाइज़ पेपर्स: 714 ताकतवर भारतीयों के गुप्त निवेश का खुलासा

इन दस्तावेजों में मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा, भाजपा सांसद आरके सिन्हा, अशोक गहलोत, अमिताभ बच्चन, विजय माल्या समेत कई लोगों व कंपनियों के नाम हैं.

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भारत से भाजपा सांसद आरके सिन्हा और केंद्र में मंत्री जयंत सिन्हा का नाम भी पैराडाइज़ पेपर्स में है. (फोटो साभार: आईसीआईजे)

पनामा पेपर्स के बाद कालेधन और टैक्स चोरी को लेकर फिर से एक बड़ा खुलासा हुआ है. इस खुलासे के मुताबिक, दुनिया भर के ताकतवर और अमीर लोग टैक्स हैवेन देशों में गुप्त तरीके से बड़े पैमाने पर निवेश करते हैं. पैराडाइज़ दस्तावेज विदेशों में कर बचाने के लिए किए गए निवेश या बैंकों में जमा संपत्ति की जांच से संबंधित हैं. इनमें भारत के कई कॉरपोरेट, अमीर और प्रभावशाली लोगों के नाम शामिल हैं.

अमेरिका स्थित दुनिया के 96 मीडिया संस्थानों के संगठन इंटरनेशनल कंसोर्टियम आॅफ इनवेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट (आईसीआईजे) ने 1.34 करोड़ दस्तावेज लीक किए हैं. इसी संगठन ने पिछले साल पनामा दस्तावेजों का खुलासा किया था जिसने दुनियाभर की राजनीति में तूफान पैदा किया था.

भारत से अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस इस संगठन का हिस्सा है, जिसने रविवार देर रात अपनी वेबसाइट यह खबर छापी है. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि दुनिया भर के ताकतवर और अमीर लोग टैक्स हैवेन देशों में गुप्त तरीके से निवेश करते हैं. आईसीआईजे ने इन दस्तावेजों को ‘पैराडाइज़ पेपर्स’ कहा जा रहा है.

पत्रकारों के इस अंतरराष्ट्रीय संगठन ने बरमूडा और सिंगापुर स्थित फर्मों के दस्तावेज लीक किए हैं. इनमें 714 भारतीयों के नाम हैं. इनमें मोदी सरकार में मंत्री जयंत सिन्हा, भाजपा सांसद रवींद्र किशोर सिन्हा, अमिताभ बच्चन, संजय दत्त की पत्नी दिलनशीं दत्त, उद्योगपति विजय माल्या, कांग्रेस नेता अशोक गहलोत, डॉ अशोक सेठ, कोचिंग कंपनी फिट्जी, नीरा राडिया आदि के नाम सामने आए हैं.

रिपोर्ट में ओमिदयार नेटवर्क का जिक्र है, जिससे केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिन्हा भी जुड़े थे. इस खुलासे के बाद पत्रकार रवीश कुमार ने PANDO.COM की रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि ‘ओमेदियार नेटवर्क मोदी की जीत के लिए काम कर रहा था. 2009 में ओमेदियार नेटवर्क ने भारत में सबसे अधिक निवेश किया, इस निवेश में इसके निदेशक जयंत सिन्हा की बड़ी भूमिका थी.
2013 में जयंत सिन्हा ने इस्तीफा देकर मोदी के विजय अभियान में शामिल होने का एलान कर दिया. जब मोदी जीते थे तब ओमेदियार नेटवर्क ने ट्वीट कर बधाई दी थी.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पनामा पेपर्स की ही तरह ये दस्तावेज जर्मन अख़बार ज़्यूड डॉयचे त्साइटुंग को हासिल हुए थे, जिसकी जांच आईसीआईजे ने की है. अखबार इस संबंध में 40 लेख प्रकाशित करेगा, जिसमें विस्तार से जानकारियां दी जाएंगी.

यह खुलासा इस बात की तस्दीक करता है कि कैसे ताकतवर लोग, नेता, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, और अमीर लोग फ़र्ज़ी कंपनियों, ट्रस्ट या फाउंडेशन के जरिये कर अधिकारियों से अपनी संपत्ति और सौदों को छुपाकर कर अदा करने से बचते हैं और बड़े पैमाने पर पैसा बनाते हैं.

हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि अधिकतर लेनदेन में किसी तरह की कोई क़ानूनी गड़बड़ी नहीं है. पनामा पेपर्स के बाद यह बड़ा खुलासा हुआ है जिनमें कई भारतीय कंपनियों के नाम हैं.

समाचार एजेंसी भाषा ने खबर दी है कि व्यापक पैमाने पर लीक हुए पैराडाइज़ दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस के रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबियों से जुड़ी कंपनी के साथ कारोबारी संबंध हैं जबकि ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने विदेशों में कर से बचाव करने वाले स्थानों पर निवेश किया हुआ है.

इसमें यह भी खुलासा किया गया है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन त्रुदू के लिए कोष जुटाने वाले और वरिष्ठ सलाहकार स्टीफन ब्रॉन्फमैन ने पूर्व सीनेटर लियो कोल्बर के साथ मिलकर विदेशों में कर पनाहगाहों में करीब 6 करोड़ डॉलर का निवेश कर रखा है.

बहरहाल, इन खुलासों से ऐसे संकेत नहीं मिले हैं कि रॉस, ब्रान्फमैन या महारानी की निजी कंपनी ने गैरकानूनी रूप से निवेश किया. एलिजाबेथ की निजी कंपनी के मामले में आलोचक यह सवाल उठा सकते हैं कि क्या ब्रिटेन की महारानी द्वारा विदेशी कर पनाहगाहों में निवेश करना उचित है.

दस्तावेजों के अनुसार, अरबपति निवेशक रॉस की नेविगेटर होल्डिंग्स में 31 फीसदी हिस्सेदारी है. इस कंपनी की रूस की उर्जा क्षेत्र की बड़ी कंपनी सिबर से साझेदारी है जिसका आंशिक तौर पर मालिकाना हक पुतिन के दामाद और उनके दोस्त के पास है.

बीबीसी और गार्जियन अखबार के अनुसार, दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि महारानी की करीब एक करोड़ 30 लाख डॉलर की निजी धनराशि को केमैन द्वीप और बरमुडा में निवेश किया गया.

पैराडाइज़ दस्तावेजों में कानून कंपनी एप्पलबी के मुख्यत: 1.34 करोड़ दस्तावेज हैं. इस कंपनी के कार्यालय बरमूडा और अन्य जगहों पर हैं.

कोई भी लेनदेन निजी उद्देश्य के लिए नहीं: जयंत सिन्हा

कर से बचने के लिए कर पनाहगाह वाले देशों से संबंधित, लीक हुए पैराडाइज़ दस्तावेजों में केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा का नाम आने पर उन्होंने कहा कि किसी भी निजी उद्देश्य से कोई लेनदेन नहीं किया गया.

पैराडाइज़ दस्तावेजों की जांच पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार सिन्हा भारत में ओमिदयार नेटवर्क के प्रबंध निदेशक रहे हैं और ओमिदयार नेटवर्क ने अमेरिकी कंपनी डी. लाइट डिजाइन में निवेश किया था. डी. लाइट डिजाइन की केमैन द्वीप में अनुषंगी कंपनी है.

सिन्हा ने आज ट्वीटों की एक श्रृंखला में कहा कि लेनदेन वैध और प्रमाणिक हैं. नागर विमानन राज्य मंत्री सिन्हा ने कहा कि मेरी जिम्मेदार भूमिका में यह लेनदेन दुनिया के प्रतिष्ठित संगठनों की ओर से किए गए और यह कार्य ओमिदयार नेटवर्क में सहयोगी और इसकी ओर से डी. लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल में नामित प्रतिनिधि के तौर पर किए गए.

उन्होंने कहा, यह गौर करने की बात है कि यह लेनदेन डी. लाइट डिजाइन के लिए ओमिदयार के प्रतिनिधि के तौर पर किए गए, ना कि किसी निजी उद्देश्य के लिए. केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा पहले एक वेंचर कैपटलिस्ट के तौर पर कार्य करते थे.

उन्होंने कहा कि इन सभी लेनदेनों को आवश्यक नियामकीय जानकारियों के तहत संबद्ध प्राधिकारियों के समक्ष सार्वजनिक ही रखा गया था.

सिन्हा ने कहा, ओमिदयार नेटवर्क को छोड़ने के बाद मुझसे डी. लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशक बने रहने के लिए कहा गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद मैंने डी. लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल से तत्काल इस्तीफा दे दिया था और कंपनी से अपने संबंध तोड़ दिए थे. सिन्हा पहले वित्त राज्य मंत्री थे.