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भारत में आज़ादी, शोषित वर्ग अधिकार और सुरक्षा ख़तरे में हैं: तीस्ता सीतलवाड़

सिटीज़न फॉर जस्टिस एंड पीस की संस्थापक तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि उनका संगठन आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के साथ कानूनी संसाधन प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करेगा.

तीस्ता सेटलवाड़ (फोटो: फेसबुक)

तीस्ता सेटलवाड़ (फोटो: फेसबुक)

नई दिल्ली: आपराधिक न्याय प्रणाली में सुधार के लिए काम करने वाला सिटीज़न फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) अब मानवाधिकार और कानूनी संसाधन प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करेगा.

2002 में शुरू हुए संगठन ने शुरुआती दिनों में आपराधिक न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे थे, लेकिन अब यह पूर्ण रूप से मानवाधिकार और कानूनी संसाधन प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा.

सीजेपी की सह-संस्थापक और सचिव तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है, ‘संवैधानिक मूल्य, जिसकी बुनियाद पर भारत की स्थापना हुई है, उसकी सुरक्षा करने की जरूरत है. यह भारत के अस्तित्व के लिए जरूरी है जो इसे एक प्रतिनिधिक लोकतंत्र बनाता है.’

सीजेपी पीड़ित अल्पसंख्यक और ख़ास तौर पर दंगा पीड़ित लोगों के लिए काम करता था. लेकिन संगठन अब आदिवासी, दलित, महिला, बाल और समलैंगिक लोगों के अधिकार के लिए भी काम करेगा.

तीस्ता आगे कहती हैं, ‘भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी, आदिवासी और दलितों का मूल अधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा खतरे में हैं. इन्हीं सभी चीज़ों पर काम करने के लिए सीजेपी की स्थापना हुई है.’

मानवाधिकार के संघर्ष पर तीस्ता कहती हैं, ‘जो लोग मानवाधिकार, दलित, आदिवासी, महिलाएं, बच्चे, अल्पसंख्यक और समलैंगिकों के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें एक जुट होना होगा.’