राजनीति

मोदी सरकार ने चार साल में दलितों के लिए कुछ नहीं किया: भाजपा सांसद

उत्तर प्रदेश के नगीना क्षेत्र से भाजपा के दलित सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि अदालतों में दलित समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है, जिस कारण अदालतें उनके अधिकारों को ख़त्म कर रही हैं.

सांसद डॉ यशवंत सिंह और नरेंद्र मोदी (फोटो: लोकसभा/पीटीआई)

सांसद डॉ यशवंत सिंह और नरेंद्र मोदी (फोटो: लोकसभा/पीटीआई)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दलितों की अनदेखी करने का आरोप पर लगाया है. मोदी को लिखे पत्र में उन्‍होंने कहा है कि पिछले चार साल में केंद्र सरकार ने दलितों के लिए कुछ भी नहीं किया है.

एनडीटीवी की खबर के अनुसार, सांसद ने अपने पत्र में मोदी सरकार पर यह आरोप भी लगाया है कि प्रमोशन में आरक्षण, बैक लॉग पूरा करना और निजी क्षेत्र में आरक्षण पर कुछ नहीं किया है.

भाजपा के दलित सांसद डॉ. यशवंत सिंह ने कहा कि सरकार विशेष भर्ती अभियान के जरिये नौकरियों में बैकलॉग पूरा कराए, प्रमोशन में आरक्षण दिलाए और निजी क्षेत्र में आरक्षण हो.

एबीपी न्यूज़ के अनुसार, सांसद सिंह ने कहा, ‘जब मैं चुनकर आया था उसी समय मैंने स्वयं आपसे (पीएम मोदी) मिलकर प्रमोशन में आरक्षण हेतु बिल पास कराने का आग्रह किया था. समाज के विभिन्न संगठन दिन-रात हम लोगों को इस प्रकार का अनुरोध करते हैं. परन्तु चार वर्ष बीत जाने के बाद भी इस देश के लगभग 30 करोड़ दलितों के प्रत्यक्ष हित हेतु आपकी सरकार द्वारा एक भी कार्य नहीं किया गया. जैसे- बैकलॉग पूरा कराना, आरक्षण बिल पास कराना, प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण दिलाना आदि आदि.’

अदालतों में दलित समाज का प्रतिनिधित्व न होने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी चिट्ठी में कहा, ‘कोर्ट में इस समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है. जिस कारण कोर्ट हर समय पर हमारे विरुद्ध नए निर्णय (एससी-एसटी कानून) देकर हमारे अधिकारों को खत्म कर रही है. इस देश की 70 प्रतिशत संपत्ति एक प्रतिशत लोगों के पास है. जो सरकार का संरक्षण प्राप्त करते हैं.’

अपने पत्र में सिंह ने एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा, ‘आज की स्थिति में दलित समाज रोज-रोज की प्रताड़ना का शिकार है. हम बीजेपी के दलित सांसद… हमारा जबाव देना मुश्किल है. कृपया दलित समाज के हितों को विशेष ध्यान रखते हुए बिल पास कराएं. एससी/एसटी एक्ट में कोर्ट के फैसले के खिलाफ पैरवी करके इस निर्णय को पलटवायें.’

तीन दलित संसद पहले ही जता चुके हैं नाराजगी

यह पहली घटना नहीं है कि किसी दलित सांसद ने पत्र लिखकर सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की हो. इससे पहले बहराइच से भाजपा की दलित सांसद सावित्री बाई फुले ने लखनऊ में एक अप्रैल को रैली कर अपने ही सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया.

समाचार चैनल न्यूज़ 18 से बातचीत में भाजपा सांसद फुले ने बीते 28 मार्च को कहा था, ‘आरक्षण को ख़त्म करने के लिए साज़िश रची जा रही है और केंद्र सरकार इसे लेकर कुछ नहीं कर रहा है.’

भाजपा में आरक्षण का विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ उन्होंने एक अप्रैल को लखनऊ में रैली आयोजित करने को भी कहा था. उन्होंने कहा था, ‘संविधान की समीक्षा और आरक्षण को लेकर लगातार बहस जारी है. यह आरक्षण ख़त्म करने का गुप्त प्रयास है. पिछले साल बहराइच के नानपारा में मैंने इसके ख़िलाफ़ रैली की थी अब मैं लखनऊ कांशीराम स्मृति उपवन में आरक्षण बचाओ रैली करने जा रही हूं.’

उन्होंने कहा था कि आरक्षण ख़त्म करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ़ वह एड़ी चोटी का ज़ोर लगा देंगी.

फुले के अनुसार, इस बात से मुझे फ़र्क नहीं पड़ता कि लोग या मेरी पार्टी क्या कहेगी, मैं समाज के पिछड़े लोगों के लिए काम करना जारी रखूंगी. अगर आरक्षण का ख़त्म किया गया तो देश के पिछड़े लोगों को समाज में उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकेगा. इस मुद्दे को लेकर आज की सरकार बिल्कुल भी परेशान नज़र नहीं आ रही है.

फुले के बाद भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के रॉबर्ट्सगंज से दलित सांसद छोटेलाल खरवार ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की शिकायत कर कहा है कि विभिन्न मुद्दों को लेकर वह दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने गए थे लेकिन योगी ने उन्हें डांटकर भगा दिया था.

भाजपा के ही एक अन्य दलित सांसद अशोक दोहरे ने भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि दो अप्रैल के भारत बंद के बाद उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों मेंएससी/एसटी वर्ग के लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है और जातिसूचक गलियां देकर गिरफ्तारी की जा रही है. अशोक दोहरे इटावा से सांसद हैं.

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