भारत

गांधी और नेहरू की तरह सावरकर के नाम को क़ानूनी संरक्षण देने की मांग

हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत से जुड़े एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि सावरकर का नाम प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग रोकथाम) क़ानून में शामिल हो ताकि उन पर किसी तरह का आक्षेप न लगाया जा सके.

(फोटो: savarkarsmarak.com)

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नई दिल्ली: महात्मा गांधी की हत्या की साजिश में विनायक दामोदर सावरकर की किसी भी तरह की भूमिका को नकारने वाले उच्चतम न्यायालय के हालिया आदेश के बाद मुंबई के एक निवासी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सावरकर के नाम का दुरुपयोग और किसी अन्य तरह के विवाद में खींचे जाने से बचाने की अपील की.

प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में मुंबई के एक हिंदूवादी संगठन अभिनव भारत से जुड़े एक शोधकर्ता एवं न्यासी डॉक्टर पंकज फडनीस ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 28 मार्च के आदेश में अब जब सावरकर के नाम को क्लीन चिट दी जा चुकी है तो जरूरत है कि सावरकर के नाम को प्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग रोकथाम) कानून 1950 में शामिल किया जाए ताकि आगे उन पर किसी तरह का आक्षेप न लगाया जा सके.

अभी तक इस कानून के तहत केवल महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और छत्रपति शिवाजी के नाम शामिल हैं. फडनीस ने सोमवार को सावरकर की 135 वीं जयंती के मौके पर उच्चतम न्यायालय के आदेश की वह प्रति मीडिया के सामने जारी की जिसमें उन पर लगे आरोपों को खारिज किया गया. वीर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को हुआ था.

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