भारत

बुलेट ट्रेन आम आदमी की पहुंच से बाहर, केवल अमीरों की सवारी: ई श्रीधरन

‘मेट्रो मैन’ के नाम से विख्यात ई श्रीधरन का कहना है कि देश को बुलेट ट्रेन नहीं बल्कि एक स्वच्छ और सुरक्षित रेल प्रणाली की ज़रूरत है. भारतीय रेल में जैव-शौचालयों के अलावा कोई तकनीकी उन्नति नहीं हुई है. भारतीय रेलवे विकसित देशों से 20 साल पीछे है.

मोदी और शिंजो आबे और ई श्रीधन (फोटो: पीटीआई और विकिपीडिया)

मोदी और शिंजो आबे और ई श्रीधरन (फोटो: पीटीआई और विकिपीडिया)

नई दिल्ली: मेट्रो मैन के नाम से प्रख्यात इंजीनियर ई श्रीधरन ने प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन परियोजना को अमीरों की सवारी बताया है.

हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में श्रीधरन ने कहा कि वे नहीं मानते कि भारतीय रेल सेवा में बड़े बदलाव आये हैं.

उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन केवल उच्चवर्गीय समुदाय की ही ज़रूरत पूरी करेगी. यह बेहद महंगी है और आम आदमी की पहुंच से बाहर है. इसकी अपेक्षा भारत को एक आधुनिक, साफ, सुरक्षित और तेज रेल प्रणाली की ज़रूरत है.

भारतीय रेलवे की उन्नति पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि भारतीय रेल ने तेजी से प्रगति की है. जैव-शौचालयों के अलावा कोई तकनीकी उन्नति नहीं हुई है. गाड़ियों की गति में कोई वृद्धि नहीं हुई है. असल में सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों की औसत गति नीचे आ गई है. समय पर चलने को लेकर भारतीय रेल की स्थिति सबसे खराब है. आधिकारिक तौर पर 70% ट्रेनें समय से चल रही हैं, जबकि असल में 50% से कम.’

श्रीधरन ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ट्रेन दुर्घटनाओं के रिकॉर्ड में कोई सुधार नहीं हुआ है. कई उपनगरों में अब भी लोग क्रॉसिंग और पटरियों पर जान गंवा रहे हैं. सालाना पटरियों पर लगभग 20,000 मारे जाते हैं. मुझे लगता है कि भारतीय रेलवे विकसित देशों से 20 साल पीछे है.

यह पूछे जाने पर कि वे देश का क्या भविष्य देखते हैं पर 86 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर ने कहा कि जिस गति से देश बढ़ रहा है, उससे मैं थोड़ा विचलित हूं. आज़ादी के 70 साल बाद भी हमारी आबादी का एक तिहाई गरीबी रेखा से नीचे है. भौतिक विकास को छोड़ दें तो मैं देश में नैतिकता, मूल्यों और सिद्धांतों में तेज़ी से आ रही गिरावट को लेकर निराश हूं. हमारे नेता राजनीतिक महत्वाकांक्षा से चलते हैं न कि मूल्यों या सही-गलत के हिसाब से. देश को एक संपूर्ण सुधार की ज़रूरत है.

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