राजनीति

संसद आने के इच्छुक नहीं तो सचिन और रेखा इस्तीफा क्यों नहीं दे देते: नरेश अग्रवाल

सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और अभिनेत्री रेखा सहित राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों के लगातार अनुपस्थित रहने का मुद्दा उठाया.

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राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर और रेखा (फोटो: पीटीआई)

सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और अभिनेत्री रेखा जैसे मनोनीत सदस्यों के सदन में गैर हाज़िर होने पर सवाल उठाया है. उन्होंने यह भी कहा है कि अगर उन लोगों की रुचि नहीं है, तो उन्हें इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के अनुसार, राज्यसभा सांसद अग्रवाल ने कहा कि उन्होंने सचिन तेंदुलकर और रेखा जैसे मनोनीत सदस्यों को सदन की चर्चा में हिस्सा लेते नहीं देखा.

अग्रवाल ने कहा, ‘अगर वो सदन में नहीं आते तो क्या उनकी दिलचस्पी नहीं है ? क्या उनको इस्तीफ़ा देना चाहिए?’ नरेश अग्रवाल ने यह सवाल सदन में ‘पॉइन्ट ऑफ़ आर्डर’ के तहत उठाया है.

राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन ने अग्रवाल के सवाल को ‘पॉइंट ऑफ़ आर्डर’ न मानते हुए उन्हें सलाह दी है कि वो खुद अपने स्तर पर मनोनीत सदस्यों को समझाएं कि वो सदन में कुछ दिनों के लिए हाज़िर रहें.

अग्रवाल ने इस पर कहा कि वो मनोनीत सदस्यों को पत्र लिखेंगे.

बता दें कि राज्यसभा में 12 सदस्य विभिन्न क्षेत्रों से मनोनीत किए जाते हैं. इन लोगों को साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक क्षेत्रों से राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है.

सचिन तेंदुलकर और रेखा के अलावा संभाजी छत्रपति, रूपा गांगुली, मैरीकाम, नरेंद्र जाधव, स्वप्न दास गुप्ता, केटीएस तुलसी, अनु आगा, पी परासरण, गोपी सुरेश और सुब्रमण्यम स्वामी मनोनीत सदस्य हैं.

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब सचिन और रेखा का सदन में गैरहाजिर होना मुद्दा बना है. इससे पहले सीपीएम सांसद पी. राजीव ने इनके सदन में अनुपस्थित रहने पर सवाल उठाया था.

उन दौरान उपसभापति कुरियन ने कहा कि दोनों ने सदन के नियम का उल्लंघन नहीं किया है. कुरियन के अनुसार सदन में 60 दिनों तक बिना नोटिस गैर हाज़िर रहने पर कार्यवाही होती है. अब तक सचिन ने सदन में 3 बार दिखे हैं तो रेखा सात बार उपस्थित रही हैं.

 

  • Rajat Tiwari

    Also see the work that sachin has done in his adopted village under Sansad adarsh gram yojna. he must attend the parlimament but it is worthless when you are not giving back to your constituencies.