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किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिर का पुजारी बन सकता है: उत्तराखंड हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पूरे प्रदेश में ऊंची जाति का कोई पुजारी अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी व्यक्ति की तरफ से पूजा करने से इनकार नहीं कर सकता है.

Haridwar Har Ki Pauri Reuters

प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि योग्यता पूरी करने वाला किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिर का पुजारी बन सकता है और मंदिर में नियुक्त ऊंची जाति का कोई पुजारी अनुसूचित जाति या जनजाति के किसी व्यक्ति की तरफ से पूजा करने से इनकार नहीं कर सकता है. कोर्ट अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यक्तियों के मंदिरों में जाने और धार्मिक गतिविधियों के अधिकारों से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई कर रही है.

 2016 में राजस्थान के रहने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति के लोगों ने कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर के मांग की कि हरिद्वार में रविदास मंदिर के बगल में लगी सीढ़ी को न हटाया जाए. दरअसल हरिद्वार प्रशासन सीढ़ी को हटाकर कहीं और शिफ्ट करना चाहता था लेकिन याचिका में कहा गया है कि अगर ऐसा होता है तो मंदिर को बहुत नुकसान पहुंचेगा. जस्टिस राजीव शर्मा की बेंच ने इसी याचिका पर फैसला दिया है.

कोर्ट का ये आदेश मंदिरों में ऊंची जाति के लोगों के वर्चस्व को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 जुलाई की तारीख तय की है. कोर्ट ने इस दिन गढ़वाल आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद रहने के भी निर्देश दिया है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि हरिद्वार में ऊंची जाति वाले पुजारी निचली जाति वाले लोगों से भेदभाव करते हैं और उनकी तरफ से धार्मिक गतिविधियां जैसे कि आरती करने, प्रसाद चढ़ाने इत्यादि से मना करते हैं. इस पर अदालत ने ऊंची जाति वाले पुजारियों से सभी मंदिरों में निचली जातियों के सदस्यों की तरफ से पूजा समारोह और धार्मिक कार्य कराने से इनकार न करने के निर्देश दिया है.

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूरे प्रदेश में किसी भी जाति से संबंधित सभी व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के मंदिर में जाने की अनुमति है और किसी भी जाति का प्रशिक्षित और योग्य व्यक्ति मंदिरों में पुजारी हो सकता है. कोर्ट ने ये आदेश 15 जून को ही दिया था लेकिन कल यानि कि कल इस आदेश को जारी किया गया.

बता दें कि मंदिरों में दलितों के साथ भेदभाव और दुर्व्यवहार के कई सारे मामले सामने आते रहे हैं. कुछ दिन पहले ही देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर में वहां के पंडो ने उनके साथ अभद्रता की थी. आरोप है कि पुरी मंदिर के सेवादारों ने रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी सविता कोविंद को दलित होने की वजह से मंदिर के गर्भगृह तक जाने से रोक दिया था. ये मामला 18 मार्च का है और तीन महीने बाद पिछले महीने जून में इस बात का खुलासा हुआ था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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