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राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश नहीं मान रहे रामदेव, रोक के बावजूद प्रोजेक्ट का काम जारी

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 20 जुलाई को प्रोजेक्ट से जुड़ी ज़मीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण करने पर पाबंदी लगाई थी, लेकिन पतंजलि ट्रस्ट की ओर से चारदीवारी और दरवाज़ा बनाने का काम तेज़ गति से चल रहा है.

मंदिर की ज़मीन पर प्रोजेक्ट का शिलान्यास करते हुए राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बाबा रामदेव. (फोटो साभार: फेसबुक/वसुंधरा राजे)

मंदिर की ज़मीन पर प्रोजेक्ट का शिलान्यास करते हुए राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और बाबा रामदेव. (फोटो साभार: फेसबुक/वसुंधरा राजे)

पूर्वी राजस्थान के करौली जिले में प्रस्तावित बाबा रामदेव के विवादित ड्रीम प्रोजेक्ट पर राजस्थान हाईकोर्ट का रोक का आदेश बेअसर साबित हो रहा है. राजस्थान के शीर्ष कोर्ट की पाबंदी के बावजूद प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन पर चारदीवारी और दरवाजा के निर्माण का काम जोर-शोर से चल रहा है.

इस जमीन पर दावा जता रहे लोगों का आरोप है कि वे मौके पर मौजूद पतंजलि ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को कई बार राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश दिखाकर निर्माण कार्य रोकने का अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन वे उल्टा उन्हें ही धमका रहे हैं.

इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले रामकुमार सिंह कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने मेरी याचिका पर स्पष्ट आदेश दिया है कि श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी 729 बीघा विवादित भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाए, लेकिन बाबा रामदेव यहां बाउंड्री और गेट बनवा रहे हैं.’

सिंह आगे कहते हैं, ‘मैंने व्यक्तिगत रूप से कई बार मौके पर मौजूद पतंजलि ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को हाईकोर्ट का आदेश दिखाकर बाउंड्री और गेट का काम बंद करने के लिए कहा, लेकिन वे इसे रोकने के लिए तैयार होने की बजाय मुझे ही चुप रहने की हिदायत देते हुए धमकाते हैं. जो भी आपत्ति जताता है उसे डराया जाता है.’

यदि पतंजलि ट्रस्ट विवादित जमीन की चारदीवारी करने और दरवाजा बनाने में कामयाब हो जाता है तो यहां रहे 250 परिवारों को अपने ही घर आना-जाना बंद हो सकता है. ये मकान खसरा नंबर 415 और इसके आसपास बने हुए हैं, जो पतंजलि ट्रस्ट और श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट के बीच हुई लीज डीड में शामिल है.

खसरा नंबर 415 में चार बीघा नौ बिस्वा जमीन है. राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह जमीन शिवनारायण, दामेादर, प्रकाश, भौंरी, गोपी और बद्री के नाम दर्ज थी, जिसे दिसंबर, 2012 में रामकुमार सिंह ने खरीद लिया. इसके आसपास की जमीन भी कई लोगों ने खरीदी.

थोड़े समय बाद ही इस जमीन पर अरावली कॉलोनी बस गई. वर्तमान में यहां एक हजार से अधिक परिवार रहते हैं. यह कॉलोनी करौली नगर परिषद के वार्ड नंबर 46 में आती है. सरकार की ओर से कॉलोनी में सड़कें बनी हुई हैं और बिजली के कनेक्शन दिए हुए हैं.

पतंजलि ट्रस्ट की ओर से करवाई जा रही चारदीवारी की जद में आने से 250 परिवार दहशत में हैं. यहां रहने वाले केदार मीणा कहते हैं, ‘बाउंड्री और गेट बनने पर हमें उनकी मर्जी से ही अपने घर जा पाएंगे. कल को उन्होंने गेट बंद कर दिया तो हम क्या करेंगे.’

मीणा आगे कहते हैं, ‘बाबा बड़े आदमी हैं. मुख्यमंत्री उनके पैर छूती हैं. पुलिस और प्रशासन भी उनके साथ है. उनके लोगों ने खातेदार किसानों को वहां से भगा दिया. किसानों ने सब जगह शिकायत की मगर कहीं सुनवाई नहीं हुई. हमारे साथ भी यही होता दिख रहा है.’

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राजस्थान हाईकोर्ट के रोक के आदेश के बावजूद विवादित जमीन पर चल रहा निर्माण कार्य. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

शुक्रवार को एक प्रतिनिधिमंडल ने करौली कलेक्टर अभिमन्यु कुमार से मिलकर पतंजलि ट्रस्ट की ओर से करवाए जा रहे निर्माण कार्य को बंद करवाने की मांग की. इसमें शामिल लोगों का आरोप है कि कलेक्टर ने उन्हें कार्रवाई करने का आश्वासन तक नहीं दिया.

इस मामले पर कलेक्टर अभिमन्यु कुमार ने कहा, ‘श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से जुड़ी जमीन के बारे में राजस्थान हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बावजूद बाउंड्री और गेट बनाने की शिकायत मिली है. तथ्यों की पड़ताल की जा रही है. विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.’

करौली जिले भाजपा पदाधिकारी भी विवादित जमीन पर पतंजलि ट्रस्ट की ओर से करवाए जा रहे निर्माण कार्य की खिलाफत कर रहे हैं. वे भी प्रशासन पर बाबा रामदेव के दवाब में काम करने का आरोप लगा रहे हैं.

भाजपा के करौली जिला उपाध्यक्ष ओमप्रकाश सारस्वत कहते हैं, ‘प्रशासन को इसकी जानकारी है कि हाईकोर्ट की ओर से स्टे मिलने के बाद भी पतंजलि ट्रस्ट बाउंड्री और गेट बना रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है. प्रशासन को कानून का पालन करना चाहिए मगर अधिकारी कानून तोडऩे वालों को संरक्षण दे रहे हैं.’

कहीं कार्रवाई नहीं होती देख प्रभावित लोगों ने मुख्यमंत्री वुसंधरा राजे की ‘राजस्थान गौरव यात्रा’ का विरोध करने का फैसला किया है. उल्लेखनीय है कि 17 अगस्त को राजे की यह यात्रा करौली पहुंचेगी. लोगों की यात्रा का विरोध करने की चेतावनी के बाद से स्थानीय प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं.

वहीं, हाईकोर्ट में इस मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता संजय जोशी कहते हैं, ‘हाईकोर्ट की रोक के बाद भी विवादित जमीन पर बाउंड्री और गेट बनाना कोर्ट की अवमानना है. कोर्ट ने प्रवेश तक पर पाबंदी लगा रखी है. मैं पूरे प्रमाणों को साथ कोर्ट में जल्द ही अवमानना याचिका दायर करूंगा.’

गौरतलब है कि रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट ने करौली के श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट से 11 अगस्त, 2016 को 401 बीघा जमीन तीन साल के लिए लीज पर ली थी. रामेदव यहां योगपीठ, गुरुकुल, आयुर्वेदिक अस्पताल, आयुर्वेदिक दवाइयों का उत्पादन केंद्र और गोशाला बनाना चाहते हैं.

इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 22 अप्रैल को बाबा रामदेव की मौजूदगी में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने किया था. सूत्रों के अनुसार रामदेव चाहते थे कि उनके ट्रस्ट को यह जमीन 20 साल के लिए लीज पर मिल जाए. चर्चा है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने तो इसके लिए हरी झंडी दे दी, लेकिन इसे अमलीजामा पहनाने में कानूनी अड़चनें आड़े आ गईं.

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राजस्थान हाईकोर्ट के रोक के आदेश के बावजूद विवादित जमीन पर चल रहा निर्माण कार्य. (फोटो: अवधेश आकोदिया/द वायर)

इसी बीच ‘द वायर’ ने 20 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में खुलासा किया कि बाबा रामदेव का यह प्रोजेक्ट कैसे नियमों की कब्रगाह बन गया है. इसमें विधि विशेषज्ञों ने विस्तार से साफ किया कि यह लीज डीड कैसे अवैध है. चूंकि जमीन सरकारी रिकॉर्ड में मंदिर के नाम दर्ज है इसलिए ट्रस्ट को यह अधिकार नहीं है कि वह इसे गैर कृषि कार्य के लिए किसी को लीज पर सौंप दे.

इस खुलासे के बाद वसुंधरा सरकार ने प्रोजेक्ट से हाथ खींच लिए. तय हुआ कि पतंजलि ट्रस्ट और श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट के बीच नए सिरे से लीज डीड होगी, जिसमें जमीन का प्रयोग केवल कृषि कार्य के लिए होने का जिक्र होगा.

पतंजलि ट्रस्ट और श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट के बीच नई लीज डीड का मजमून तैयार होता इससे पहले ही ‘द वायर’ ने 28 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में खुलासा किया कि जिस जमीन को मंदिर ट्रस्ट अपनी बता रहा है असल में उस पर उसका हक ही नहीं है. महज पुराने रिकॉर्ड की भूलभुलैया के आधार पर वह इस पर अपना हक जता रहा है.

पतंजलि ट्रस्ट श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट नई लीज डीड तैयार करने में आ रही कानूनी उलझनों से निकलने का रास्ता ही तलाश रहे थे कि इस बीच राजस्थान हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश आ गया. इस आदेश को बाबा रामदेव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

कानून के जानकारों के अनुसार इस जमीन में बड़ा गड़बड़झाला है, जो अब हाईकोर्ट के संज्ञान में आ चुका है. अधिवक्ता संजय जोशी कहते हैं, ‘न्यायालय राजस्व मंडल, अजमेर का 14 सितंबर, 2016 का आदेश यह साफ करता है कि श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट कैसे पुराने रिकॉर्ड की भूलभुलैया के सहारे किसानों की जमीन पर अपना हक जता रहा है.’

जोशी आगे कहते हैं, ‘हाईकोर्ट ने देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है. विभाग पहले ही श्री गोविंद देव जी मंदिर ट्रस्ट की जांच कर चुका है, जिसमें कई गंभीर खामियां सामने आई थीं.’

ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि बाबा रामदेव विवादित जमीन की चारदीवारी और दरवाजे का निर्माण कर क्या हासिल करना चाहते हैं. इस बारे में पतंजलि ट्रस्ट के स्थानीय प्रतिनिधियों से बात की. वे ऑन द रिकॉर्ड तो कुछ नहीं बोले, लेकिन गोपनीयता बरकरार रखने की शर्त पर सब बता दिया.

वे कहते हैं, ‘बाबा रामदेव इस प्रोजेक्ट पर अब तक चार करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं. यह राशि लीज का किराया, कब्जे हटाने और जमीन को समतल करवाने में हुआ. इसकी भरपाई करने के लिए जमीन को अपने कब्जे में रखना जरूरी है.’

दूसरे प्रतिनिधि कहते हैं, ‘कानूनी उलझने सुलझने तक प्रोजेक्ट का काम तो शुरू नहीं हो सकता, लेकिन तक बाबा यहां हर्बल मेडिसन के पौधों की खेती करेंगे. इससे जो खर्चा हो चुका उसे तो निकाला जाएगा. इसके लिए ही बाउंड्री की जा रही है और गेट लगाया जा रहा है.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं और जयपुर में रहते हैं.)

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