भारत

ऑस्कर में असमी भाषा की फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार’ भारत का प्रतिनिधित्व करेगी

असम की फिल्म निर्देशक रीमा दास की फिल्म विलेज रॉकस्टार ने पद्मावत, राज़ी, अक्टूबर, पैडमैन, लव सोनिया जैसी 29 फिल्मों को पछाड़कर बनाई जगह.

फिल्म विलेज रॉकस्टार का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/@villageRockstars)

फिल्म विलेज रॉकस्टार का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/@villageRockstars)

मुंबई: फिल्म निर्देशक रीमा दास की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ को 91वें अकादमी पुरस्कारों में विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है.

फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) ने शनिवार को इसकी घोषणा की. 91वां आॅस्कर अवार्ड समारोह 24 फरवरी 2019 को आयोजित होने वाला है.

यह फिल्म असम के छायगांव, जो कि फिल्मकार रीमा दास का अपना गांव भी है, में रहने वाली गरीबी में पली-बढ़ी लड़की धुनू की कहानी है जो एक रॉक बैंड बनाने और किसी दिन अपना इलेक्ट्रॉनिक गिटार हासिल करने के अपने सपने से पीछे नहीं हटती.

फिल्म में बनीता दास, बसंती दास और मानबेंद्र दास ने मुख्य भूमिकाओं में हैं. असमी भाषा की यह फिल्म पिछले साल ही बनकर तैयार हो गई थी और तकरीबन एक साल बाद इस महीने की 28 तारीख़ का रिलीज़ होने वाली है.

संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’, आलिया भट्ट अभिनीत ‘राज़ी’, रानी मुखर्जी अभिनीत ‘हिचकी’, शूजित सरकार की ‘अक्टूबर’, तबरेज़ नूरानी निर्देशित ‘लव सोनिया’, अक्षय कुमार की ‘पैडमैन’, अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर की ‘102 नॉट आउट’, ‘तुम्बड़’, ‘हल्का’, ‘कड़वी हवा’, ‘गुलाबजाम’, ‘महानति’, ‘पीहू’, ‘भोगड़ा’, ‘रीवा’, ‘बाइस्कोपवाला’, ‘भयानकम’, ‘अज्जी’, ‘न्यूड’, ‘गली गुलियां’ और हाल में प्रदर्शित नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी की ‘मंटो’ उन 29 फिल्मों की सूची का हिस्सा थी, जिसे अगले साल के ऑस्कर के लिए सौंपा गया था.

इस घोषणा से खुश दास कहती हैं कि ‘विलेज रॉकस्टार’ के चुने जाने से पूर्वोत्तर के फिल्म निर्माताओं की एक बड़ी पहचान मिली है.

दास ने कहा, ‘बहुत अच्छा लग रहा है. इसे बताने के लिए मेरे पास ज़्यादा शब्द नहीं हैं. पूरी यात्रा किसी परी कथा के समान है. यह पूर्वोत्तर के लिए एक बड़ी पहचान है और मुझे लगता है कि चयनित होने वाली यह पहली असमिया फिल्म है. इसलिए मेरा मानना है कि इससे क्षेत्र के फिल्मकारों के लिए बड़ा बदलाव आएगा.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे हमेशा से उम्मीद थी. मैं हमेशा ऐसे फेस्टिवल्स में जाना और पुरस्कार पाना चाहती थी. लेकिन मेरे लिए सबसे अहम यह है कि लोग इस फिल्म से ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस करें. इस फिल्म के ज़रिये मुझे उसी प्रकार का भावनात्मक जुड़ाव मिला है.’

इसकी घोषणा एफएफआई की ऑस्कर पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष एसवी राजेंद्र सिंह बाबू ने की.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘यह मानवीय पहलू पर बनी तकनीकी रूप से अच्छी फिल्म है जो विश्वभर में लोगों को पसंद आएगी. हम ऐसी फिल्म को सम्मान दे रहे हैं जो ऑस्कर के मंच पर पहुंचने की हक़दार है. हमें इस बात की उम्मीद है कि लोग इसे देखेंगे और इसे सम्मान देंगे.’

फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) 2017 में हुआ था और 70 से अधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में यह फिल्म दिखाई जा चुकी है.

इसके अलावा यह फिल्म मुंबई फिल्म फेस्टिवल, 2018 में प्रदर्शित हो चुकी है. इस फिल्म को अब तक 44 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अवॉर्ड मिल चुके हैं, जिसमें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी शामिल हैं.

विलेज रॉकस्टार को सर्वश्रेष्ठ फीचर, सर्वश्रेष्ठ संपादन, आॅडियोग्राफी और बाल कलाकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है.

किसी भी भारतीय फिल्म ने अब तक ऑस्कर पुरस्कार नहीं जीता है. विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में अंतिम पांच में जगह बनाने वाली आख़िरी भारतीय फिल्म आशुतोष गोवरीकर निर्देशित ‘लगान’ थी.

अमित मसूरकर निर्देशित और राजकुमार राव अभिनीत हिंदी फिल्म ‘न्यूटन’ पिछले साल ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)