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‘वीराना’, ‘बंद दरवाज़ा’, ‘तहख़ाना’ जैसी हॉरर फिल्मों के निर्देशक तुलसी रामसे का निधन

भारतीय सिनेमा में हॉरर श्रेणी की फिल्मों में सबसे लंबे समय तक रामसे ब्रदर्स का दबदबा था. तुलसी रामसे एफयू रामसे के पुत्र थे और सात भाइयों में एक थे. ज़ी टीवी पर प्रसारित हुए बहुचर्चित ‘ज़ी हॉरर शो’ का भी किया था निर्देशन.

फिल्म निर्देशक तुलसी रामसे. (फोटो साभार: फेसबुक/Anirudh Shrotriya‎)

फिल्म निर्देशक तुलसी रामसे. (फोटो साभार: फेसबुक/Anirudh Shrotriya‎)

मुंबई: ‘वीराना’, ‘बंद दरवाज़ा’, ‘तहख़ाना’ और ‘पुरानी हवेली’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने वाले तुलसी रामसे का शुक्रवार को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया.

उनके परिवार के एक सदस्य ने बताया, ‘उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की जिसके बाद उनका बेटा उन्हें मुंबई स्थित कोकिलाबेन अस्पताल ले गया. अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. उनका निधन तड़के करीब ढाई बजे हुआ.’

भारतीय सिनेमा में हॉरर श्रेणी की फिल्मों में सबसे लंबे समय तक रामसे ब्रदर्स का दबदबा था. तुलसी रामसे एफयू रामसे के पुत्र थे और सात भाइयों (कुमार, श्याम, केशु, अर्जुन, गंगू और किरण) में एक थे. इन्हें रामसे ब्रदर्स के नाम से जाना जाता था.

लाइव मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, सातों भाइयों ने मुंबई में पहले इलेक्ट्रॉनिक की दुकान खोली थी, लेकिन हिंदी सिनेमा के ग्लैमर ने उन्हें अपनी ओर खींच लिया.

पुराना मंदिर और पुरानी हवेली फिल्म का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/Prithviraj Dumasia)

पुराना मंदिर और पुरानी हवेली फिल्म का पोस्टर. (फोटो साभार: फेसबुक/Prithviraj Dumasia)

80 और 90 के दशक में उन्होंने ‘दो गज़ जमीन के नीचे’, ‘होटल’, ‘पुराना मंदिर’ जैसी हॉरर फिल्मों के अलावा टीवी श्रृंखला ‘ज़ी हॉरर शो’ का भी निर्देशन किया था.

1993 में लॉन्च हुए ‘ज़ी हॉरर शो’ ने भारतीय टीवी के इतिहास में हॉरर शो के चलन को शुरू किया था. इस शो की सफलता के बाद ही कई दूसरे चैनलों ने अपने हॉरर शो लॉन्च किए थे.

लाइव मिंट के अनुसार, 1971 में आई फिल्म ‘दो गज़ जमीन के नीचे’ से रामसे ब्रदर्स को सफलता मिली. यह फिल्म 3.5 लाख रुपये के बजट से 40 दिनों में 15 लोगों की टीम ने तैयार की थी. इस फिल्म ने 50 लाख रुपये का कारोबार किया था.

रामसे ब्रदर्स छोटी बजट की भूतिया फिल्मों के निर्माण के लिए जाने जाते हैं. साल 2014 में फिल्मी पत्रिका स्टारडस्ट को दिए एक इंटरव्यू में तुलसी ने कहा था, ‘लोग खाने के लिए एक पूरी थाली चाहते हैं. एक फिल्म में आपको सब कुछ देना होता है, थोड़ा सा एक्शन, रोमांस, गाना और सेक्स सीन भी. आप पूरी तरह से एक डार्क फिल्म नहीं बना सकते हैं. दर्शकों को डर से थोड़ी देर के लिए राहत भी देने की ज़रूरत होती है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)