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खुदरा मुद्रास्फीति 18 माह के निचले स्तर पर, खाद्य वस्तुएं सस्ती होने से संकट में किसान

सब्ज़ियों, फलों और प्रोटीन वाले सामान मसलन अंडों के दाम में कमी आई है. हालांकि, मांस, मछली और दालों के दामों में मामूली बढ़ोतरी हुई है. उद्योग संघों ने आरबीआई से ब्याज घटाने को कहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर, 2018 में घटकर 2.19 प्रतिशत पर आ गई है. यह इसका 18 महीने का निचला स्तर है. फल, सब्जियां और ईंधन कीमतों में गिरावट से मुद्रास्फीति घटी है. सब्जियों वगैरह के दामों में गिरावट आने का मतलब है कि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. इसकी वजह से किसानों को संकट का सामना करना पड़ सकता है.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों की आय के मामले में पिछले दो दशकों के मुकाबले साल 2018-19 सबसे बुरा साल हो सकता है.

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी किए गए दिसंबर महीने के आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई- होलसेल प्राइस इंडेक्स) के अनुसार प्राथमिक खाद्य वस्तुओं के लिए डब्ल्यूपीआई उप-घटक जुलाई 2018 से शुरू होने वाले लगातार छह महीनों के लिए नकारात्मक रहा है. इसका मतलब है कि इन खाद्द वस्तुओं कीमतें गिर रही हैं.

खुदरा मुद्रास्फीति घटने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक के पास अगले महीने पेश की जाने वाली मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बन सकती है. इसके अलावा सोमवार को जारी एक अन्य आंकड़े के अनुसार दिसंबर महीने में थोक मुद्रास्फीति भी घटकर आठ माह के निचले स्तर 3.80 प्रतिशत पर आ गई है.

वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई- कन्ज्यूमर प्राइस इंडेक्स) आधारित मुद्रास्फीति नवंबर में 2.33 प्रतिशत तथा दिसंबर, 2017 में 5.21 प्रतिशत पर थी. इससे पहले जून, 2017 में मुद्रास्फीति 1.46 प्रतिशत के निचले स्तर पर थी.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति दिसंबर में नकारात्मक बनी रही. यह शून्य से 2.51 प्रतिशत नीचे रही. नवंबर में खाद्य मुद्रास्फीति नकारात्मक 2.61 प्रतिशत पर थी.

समीक्षाधीन महीने में सब्जियों, फलों और प्रोटीन वाले सामान मसलन अंडों की मूल्यवृद्धि घटी. हालांकि, मांस, मछली और दालों की मुद्रास्फीति मामूली बढ़ी.

दिसंबर में ईंधन और लाइट की मुद्रास्फीति 4.54 प्रतिशत रही. यह नवंबर में 7.39 प्रतिशत पर थी. पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कमी से इन उत्पादों की मूल्यवृद्धि घटी.

सरकार ने रिजर्व बैंक के लिए मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत के करीब रखने का लक्ष्य दिया है. केंद्रीय बैंक मौद्रिक समीक्षा में कोई निर्णय लेने के लिए खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ही गौर करता है.

नए गवर्नर शक्तिकान्त दास की अगुवाई में रिजर्व बैंक अगली द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा की घोषणा 7 फरवरी को करेगा. उद्योग को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती करेगा.

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने इन आंकड़ों पर कहा कि मुद्रास्फीति के आंकड़े केंद्रीय बैंक के मध्यम अवधि के लक्ष्य के भीतर हैं. इससे केंद्रीय बैंक अपने नरम नीतिगत रुख को आगे बढ़ा सकता है जिससे निवेश चक्र सुधरेगा. साथ ही केंद्रीय बैंक ऋण की लागत घटाकर वृद्धि को भी प्रोत्साहन दे सकता है.

एक अन्य उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि इन आंकड़ों के बाद रिजर्व बैंक को अपनी नीतिगत रुख को नरम करना चाहिए.

दिसंबर की मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ने हालांकि ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था लेकिन यह भरोसा दिलाया था कि यदि मुद्रास्फीति के ऊपर की ओर जाने का जोखिम सामने नहीं आता है तो वह ब्याज दरों में कटौती करेगा.

यस बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री शुभदा राव ने कहा कि आगे चलकर मुद्रास्फीति 3.5 से 3.7 प्रतिशत के दायरे में आएगी.

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति भी दिसंबर में घटकर आठ महीने के निचले स्तर 3.80 प्रतिशत पर आ गई. इसकी अहम वजह ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतें कम होना है.

नवंबर में थोक मुद्रास्फीति 4.64 प्रतिशत थी. जबकि दिसंबर 2017 में यह 3.58 प्रतिशत थी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में खाद्य पदार्थों में 0.07 प्रतिशत महंगाई घटी है. जबकि नवंबर में इसमें अवस्फीति (डिफ्लेशन) 3.31 प्रतिशत थी.

इसी तरह सब्जियों में भी अवस्फीति देखी गई. दिसंबर में यह 17.55 प्रतिशत रही, हालांकि नवंबर में यह 26.98 प्रतिशत थी.

ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र में दिसंबर में मुद्रास्फीति घटकर 8.38 प्रतिशत रही जो नवंबर की 16.28 प्रतिशत मुद्रास्फीति के मुकाबले लगभग आधी है. इसकी अहम वजह दिसंबर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आना है.

अलग-अलग देखें तो दिसंबर में पेट्रोल कीमतों की मुद्रास्फीति 1.57 प्रतिशत और डीजल कीमतों की 8.61 प्रतिशत रही है. वही एलपीजी में यह 6.87 प्रतिशत रही.

खाद्य वस्तुओं में पिछले महीने के मुकाबले आलू दिसंबर में सस्ते हुए. दिसंबर में आलू कीमतों में मुद्रास्फीति की दर 48.68 प्रतिशत रही जो नवंबर में 86.45 प्रतिशत थी. प्याज कीमतों में दिसंबर में 63.83 प्रतिशत अवस्फीति दर्ज की गई जो नवंबर में 47.60 प्रतिशत थी.

दालों में मुद्रास्फीति की दर 2.11 प्रतिशत रही, वहीं अंडा, मांस और मछली में यह दर 4.55 प्रतिशत रही.

दिसंबर की 3.80 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर पिछले आठ महीनों में सबसे कम है. इससे पहले अप्रैल में यह 3.62 प्रतिशत पहुंची थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)