दुनिया

वेनेज़ुएला में सियासी संकट, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के ख़िलाफ़ प्रदर्शन में 26 लोगों की मौत

वेनेज़ुएला में पिछले हफ़्ते सियासी संकट तब गहरा गया जब विपक्ष के नेता जुआन ग्वाइदो ने ख़ुद को देश का जायज़ राष्ट्रपति बताते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को चुनौती दी थी. अमेरिका समेत कई देशों ने ग्वाइदो का समर्थन किया है, जिसके बाद मादुरो ने अमेरिका से रणनीतिक संबंध ख़त्म कर लिए हैं.

Supporters of the Venezuelan opposition marching in Caracas on Wednesday, the anniversary of the 1958 uprising that overthrew the military dictatorship.CreditCreditAdriana Loureiro/Reuters

वेनेज़ुएला की राजधानी कराकस में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के विरोध में जुटी भीड़. (फोटो: रॉयटर्स)

कराकस: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला ने सियासी संकट गहरा गया है. इस संकट की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने एक बार फिर चुनावों में जीत दर्ज कर ली. उन पर वोटों की धांधली करने का आरोप लगा था.

तेल समृद्ध लेकिन आर्थिक रूप से ख़स्ताहाल वेनेज़ुएला में बीती 23 जनवरी को उस समय अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी, जब नेशनल असेंबली के प्रमुख 35 वर्षीय जुआन ग्वाइदो ने स्वयं को ‘जायज़ राष्ट्रपति’ घोषित कर दिया था.

विपक्ष के नेता जुआन ग्वाइदो द्वारा देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सीधी चुनौती दिए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उनका समर्थन कर दिया. ग्वाइदो को अमेरिका और ब्राजील, अर्जेंटीना और कोलंबिया समेत कम से कम 12 क्षेत्रीय ताकतों ने समर्थन दिया, जबकि रूस और चीन मादुरो के साथ हैं. मादुरो को तुर्की, मेक्सिको, क्यूबा और बोलोविया का भी समर्थन प्राप्त है.

इस बीच राजधानी कराकस में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के ख़िलाफ़ लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. चार दिन पहले शुरू हुए प्रदर्शनों में 26 लोगों के मारे जाने की ख़बरें आ रही हैं.

बहरहाल, जुआन ग्वाइदो द्वारा ख़ुद को वेनेज़ुएला का राष्ट्रपति घोषित करने के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने मादुरो के प्रशासन को ‘अवैध’ करार दिया. इसके तुरंत बाद मादुरो ने अमेरिका से रणनीतिक गठबंधन तोड़ दिया. मादुरो ने अमेरिका में वेनेज़ुएला के दूतावास और महावाणिज्य दूतावास को बंद करने की घोषणा की है.

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ख़ुद को वेनेज़ुएला का राष्ट्रपति घोषित करने वाले जुआन ग्वाइदो. (फोटो: रॉयटर्स)

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ख़ुद को वेनेज़ुएला का राष्ट्रपति घोषित करने वाले जुआन ग्वाइदो. (फोटो: रॉयटर्स)

मादुरो के दोबारा राष्ट्रपति बनने को विपक्ष ने चुनौती दी है. इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई थी, लेकिन देश की शक्तिशाली सेना 56 वर्षीय समाजवादी नेता निकोलस मादुरो के प्रति वफादार बनी हुई है.

सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ मौजूद देश के रक्षा मंत्री एवं जनरल व्लादिमीर पाद्रिनो ने घोषणा की कि मादुरो ‘वैध राष्ट्रपति’ हैं और उन्होंने ‘तख़्तापलट’ की कोशिश के खिलाफ मादुरो का साथ देने का संकल्प लिया.

इसके बाद आठ अन्य जनरलों ने मादुरो के प्रति अपनी ‘पूर्ण वफादारी’ दोहराई. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने भी मादुरो के ‘वैध अधिकार’ की पुन: पुष्टि की.

सुप्रीम कोर्ट के अध्यक्ष माइकल मोरेनो ने आरोप लगाया, ‘वेनेज़ुएला में विदेशी सरकारों की सहमति से तख़्तापलट की कोशिश हो रही है.’

इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमेरिकन स्टेट्स में एक भाषण में कहा, ‘बहस का समय खत्म हो गया है. पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सत्ता अवैध है.’

उधर, ट्रम्प ने भी ट्वीट करके कहा है, ‘वेनेज़ुएला के लोगों को मादुरो के अवैध कार्यकाल में काफ़ी सहना पड़ा है. आज मैं वेनेज़ुएलेन नेशनल असेंबली के राष्ट्रपति जुआन ग्वाइदो को अंतरिम राष्ट्रपति के रूप आधिकारिक रूप से स्वीकृति प्रदान करता हूं.’

दूसरी ओर, मादुरो ने अमेरिकी राजनयिकों को 72 घंटे के अंदर देश से जाने को कहा है और सभी वेनेज़ुएलाई राजनयिकों को अमेरिका से वापस बुलाया है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने गैर आपात स्टाफ को वेनेज़ुएला से आने का आदेश दिया है लेकिन उसने मादुरो के आदेश का पूर्ण पालन करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह ‘राष्ट्रपति जुआन ग्वाइदो’ के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखेगा.

इस बीच ट्रंप ने वेनेज़ुएला में सैन्य हस्तक्षेप पर सार्वजनिक तौर पर विचार करने की बात कहते हुए कहा, ‘हम अभी किसी ख़ास विकल्प पर विचार नहीं कर रहे हैं लेकिन सभी विकल्पों पर चर्चा हो रही है.’ विश्लेषकों ने वेनेज़ुएला में आर्थिक प्रतिबंध कड़े करने का सुझाव दिया है.’

इस संबंध में रिपब्लिक पार्टी को डेमोक्रेटिक पार्टी का भी समर्थन मिला है.

इस बीच ऑब्ज़रवेट्री ऑफ सोशल कॉन्फ्लिक्ट ने बीते 24 जनवरी को कहा कि मादुरो के विरोध में सैनिकों के एक समूह द्वारा राजधानी कराकस के उत्तर में एक कमान चौकी पर क़ब्ज़ा करने के बाद शुरू हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की संख्या पहले 16 थी जो बढ़कर 26 हो गई है.

प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए सैन्य बलों ने कुछ स्थानों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ की गोलियां दागीं. कुछ प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)