भारत

लेखक गीता मेहता ने चुनाव नज़दीक होने का हवाला देकर पद्मश्री सम्मान लेने से इनकार किया

लेखक और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की गीता मेहता ने कहा कि आम चुनाव नज़दीक हैं और पुरस्कार को देने के समय से समाज में गलत संदेश जाएगा, जो मेरे और सरकार दोनों के लिए शर्मिंदगी की बात होगी.

लेखक गीता मेहता. (फोटो साभार: फेसबुक/Newswire)

लेखक गीता मेहता. (फोटो साभार: फेसबुक/Newswire)

नई दिल्ली: उड़िया मूल की लेखक गीता मेहता ने शुक्रवार को पद्मश्री पुरस्कार लेने इनकार कर दिया. साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें यह पुरस्कार देने की घोषणा की गई थी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मेहता ने कहा कि यह पुरस्कार लेने का सही समय नहीं है क्योंकि चुनाव आने वाले हैं. कई किताबें लिखने वाली मेहता अमेरिका में रहती हैं.

मेहता ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की बहन और पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की बेटी हैं.

न्यूयॉर्क से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए मेहता ने कहा,  ‘मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रही हूं कि भारत सरकार ने मुझे पद्मश्री जैसे सम्मान के लायक समझा, लेकिन अफसोस के साथ मुझे इसे लेने से इनकार करना पड़ रहा है. देश में आम चुनाव नजदीक हैं और पुरस्कार को देने के समय से समाज में गलत संदेश जाएगा, जो मेरे और सरकार दोनों के लिए शर्मिंदगी की बात होगी. इसका मुझे हमेशा अफसोस रहेगा.’

गीता मेहता ने कर्म कोला (1979), राज (1989), द रिवर सूत्र (1993), स्नेक्स एंड लैडर्स: ग्लिम्प्स ऑफ मॉडर्न इंडिया, लंदन एंड वारबर्ग (1997) और इटरनल गणेशा: फ्रॉम बर्थ टू रिबर्थ (2006) जैसी किताबें लिखीं हैं.

इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन, यूरोप और अमेरिका के लिए 14 टीवी डॉक्यूमेंट्री का निर्माण और निर्देशन किया है. 1970 71 में वह अमेरिकी टीवी चैनल एनबीसी के लिए वॉर कोरेस्पॉन्डेंट के तौर पर काम कर चुकी हैं.

शुक्रवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरस्कारों की घोषणा की. इस बार कुल 112 पद्म पुरस्कार घोषित किए गए. इसमें से 94 लोगों को पद्मश्री, 14 हस्तियों को पद्म भूषण और चार लोगों को पद्म विभूषण के लिए चुना गया.

ये पुरस्कार कला, सामाजिक सेवा, विज्ञान, इंजीनियरिंग, ट्रेड एंड इंडस्ट्री, चिकित्सा, साहित्य और शिक्षा, खेल और नागरिक सेवा के लिए क्षेत्र में अहम योगदान देने के लिए दिए जाते हैं.

लोकसभा चुनावों के अलावा, मुख्यमंत्री के रूप में लगातार पांचवां कार्यकाल चाहने नवीन पटनायक भाजपा के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं. वहीं ओडिशा में दूसरी विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने कई बार नवीन के नेतृत्व वाली बीजद और भाजपा के बीच मौन सहमति होने का आरोप लगाया है.

शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दावा किया था कि ओडिशा में हुए चिट फंड घोटाले के कारण मुख्यमंत्री नवीन पटनायक नरेंद्र मोदी के हाथों की कठपुतली हो गए हैं.

राहुल ने कहा था, ‘जब मोदी बटन दबाते हैं तब नवीन पटनायक उठ और बैठ जाते हैं. जब संसद में कोई विधेयक पास कराना होता है तो चौकीदार बटन दबाता है और नवीन उसे पास करना देते हैं.’

उन्होंने कहा था, ‘पूरा देश नोटबंदी को बेवकूफी वाला काम बताता है. नवीन पटनायक भी इसे गलत मानते हैं. लेकिन तभी चौकीदार एक बटन दबाता है और नवीन उसे अच्छा कदम बताने लगते हैं.’

गांधी ने कहा था कि ओडिशा, दिल्ली और नागपुर से चल रहा है. वहीं राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए बीजद ने इसे कांग्रेस की बौखलाहट बताया था.

नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक वरिष्ठ बीदज नेता ने कहा था, नैतिक और व्यावहारिक दोनों नजरिए से इस पुरस्कार के लिए मना कर उन्होंने (गीता मेहता) अच्छा किया. पुरस्कार को स्वीकार करने से कांग्रेस के झूठे दावों को बल मिलता.