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ट्रांसफर किए गए सीबीआई अफसर का आरोप, नागेश्वर राव के ख़िलाफ़ शिकायत की थी इसलिए तबादला हुआ

सूत्रों के मुताबिक सीबीआई एसपी टी. राजा बालाजी ने अपने ट्रांसफर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बालाजी ने यह भी दावा किया है कि उनके खिलाफ अंतरिम निदेशक एम. नागेश्वर राव के ख़िलाफ़ सबूत हैं.

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: हाल ही में अंतरिम सीबीआई निदेशक एम. नागेश्वर राव द्वारा दिल्ली से बाहर ट्रांसफर किए गए सीबीआई एसपी टी. राजा बालाजी ने राव पर आधिकारिक पद का दुरुपयोग और द्वेष एवं पक्षपात करने का आरोप लगाया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक बालाजी ने आरोप लगाया है कि उनके साथ ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने राव के खिलाफ मार्च, 2017 में तत्कालीन सीबीआई निदेशक से कदाचार की शिकायत की थी.

दिल्ली में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा से गाजियाबाद के सीबीआई अकादमी में अपने ट्रांसफर के अगले दिन 22 जनवरी को राव को लिखे पत्र में बालाजी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में उनकी तैनाती ‘मानवीय आधार पर’ उनकी मां के कारण की गई थी, क्योंकि उनकी मां कैंसर से पीड़ित हैं और एम्स में उनका इलाज चल रहा है.

बालाजी ने यह भी कहा कि इसी आधार पर सरकार ने उन्हें पूर्वी किदवई नगर में आवास दिया था, जो कि एम्स अस्पताल से नजदीक है. सूत्रों ने कहा कि बालाजी ने अपने तबादले को चुनौती देने वाली याचिका के साथ सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है. याचिका में कहा गया है कि अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव के खिलाफ भी उनके पास सबूत हैं.

बालाजी ने राव को लिखे पत्र में कहा, ‘आप मुझसे बेहतर जानते हैं कि आप सम्मान के लायक व्यक्ति नहीं हैं.’ अंग्रेजी लेखक शेक्सपीयर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘बुराई में भी कुछ अच्छाई बसी होती है. मैं आसानी से स्वीकार करता हूं कि मुझमें ये काबीलियत नहीं है कि मैं आपमें अच्छाई ढूंढ सकूं. लेकिन मैं आपसे गुजारिश करता हूं कि आप अपने दिल की गहराईयों में झांकें और इस तथ्य को मानें कि आपकी दुश्मनी मुझसे है न कि एक बीमार महिला से. मैं आपसे पूर्णत: मानवीय आधार पर इस उम्मीद में अनुरोध करता हूं कि आप वास्तव में अपनी मानवता दिखा सकते हैं. जीवन में फिर से एक अच्छा आदमी बनने में कभी देर नहीं होती. मुझ पर विश्वास कीजिए. अपने बेहतर मूल्यों पर भरोसा करें.

बालाजी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में उनका चार बार तबादला हुआ था और आखिरी बार उनका तबादला उनकी गुजारिश पर बीते एक अगस्ता 2018 को दिल्ली में किया गया था. उन्होंने कहा कि उनका ट्रांसफर इसी आधार पर किया गया था ताकि वे अपनी मां का देखभाल कर सकें जिनके कैंसर का इलाज एम्स में चल रहा है.

राव के खिलाफ अपने आरोपों का ब्योरा देते हुए बालाजी ने पत्र में लिखा, ‘यह एक ज्ञात तथ्य है कि मैंने 11 मार्च, 2017 को तत्कालीन सीबीआई निदेशक को आपके कदाचार के बारे में शिकायत की थी. अब, आपने संस्थागत और सार्वजनिक हित की कीमत पर मेरे खिलाफ खुद की व्यक्तिगत निंदनीय दुर्भावना और पक्षपात के कारण आपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया है.’

बालाजी ने राव को याद दिलाया कि सीबीआई निदेशक का पद सिर्फ संस्थागत और जनहित के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

बालाजी पहले चेन्नई और फिर बैंगलोर में तैनात थे जब नागेश्वर राव संयुक्त निदेशक के रूप में चेन्नई क्षेत्र की कमान संभाल रहे थे. वह उन प्रमुख मामलों की जांच से भी जुड़े हैं जिनमें मधुमिता शुक्ला हत्याकांड और हैदराबाद की मक्का मस्जिद विस्फोट मामला शामिल है. बैंगलोर में, वह बैंक धोखाधड़ी के मामलों की देखभाल कर रहे थे.

बालाजी ने 10 जनवरी को आलोक वर्मा को पद से हटाने के बाद अंतरिम निदेशक द्वारा सीबीआई के भीतर किए जा रहे सामूहिक तबादलों पर भी आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि जब चयन समिति नए निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया में थी, तो अंतरिम निदेशक राव द्वारा तर्कसंगत आधार पर केवल आवश्यक ट्रांसफर पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए था.

मालूम हो कि 10 जनवरी के बाद अंतरिम निदेशक के पद पर आने के बाद नागेश्वर राव ने करीब 40 तबादले किए हैं.