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ओआईसी में ‘मानवाधिकार हनन’ की आलोचना पर भारत ने कहा- जम्मू कश्मीर हमारा आंतरिक मामला

इस्लामिक सहयोग संगठन का 46वां सत्र शनिवार को अबू धाबी में समाप्त हो गया. भारत ने पहली बार इसमें हिस्सा लिया था.

ओआईसी की बैठक को संबोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज. (फोटो साभार: ट्विटर/@OIC_OCI)

ओआईसी की बैठक को संबोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज. (फोटो साभार: ट्विटर/@OIC_OCI)

नई दिल्ली: इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) ने शनिवार को दक्षिण एशिया में तनाव कम करने और लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए हल करने की अपील की. ओआईसी मुस्लिम बहुल 57 देशों का संगठन है. यह आमतौर पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है और कश्मीर पर अक्सर उसका पक्ष लेता है.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद (सीएफएम) के 46वीं सत्र के उद्घाटन सत्र में हिस्सा लिया था. वह ओआईसी की सभा को संबोधित करने वाली पहली भारतीय मंत्री हैं.

शनिवार को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अबू धाबी में सीएफएम का 46वां सत्र समाप्त हो गया. इसमें एक प्रस्ताव पारित किया गया है जिसमें कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया गया है.

पाक विदेश मंत्रालय ने दावा किया, ‘इस प्रस्ताव में ओआईसी के सदस्य राष्ट्रों ने दोहराया है कि जम्मू कश्मीर पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद का अहम मामला है. दक्षिण एशिया में अमन के ख्वाब को साकार करने के लिए इसका हल होना जरूरी है.’ उसने दावा किया कि प्रस्ताव में, कश्मीर में कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर गहरी चिंता जताई.’

विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कश्मीर विवाद पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के लागू करने के लिए उनके दायित्व को भी याद दिलाया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, ‘जम्मू कश्मीर पर प्रस्ताव के बारे में हमारी स्थिति अडिग और पूर्व परिचित है. हमारा जोर देकर कहना है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह मुद्दा भारत की आंतरिक सुरक्षा से संबंधित है.’

पाकिस्तान का कहना है कि क्षेत्र में मौजूदा अस्थिर हालात के सदंर्भ में, ओआईसी के सदस्यों देशों ने पाकिस्तान की ओर से लाए गए एक नए प्रस्ताव को स्वीकार किया जिसमें भारत द्वारा पाकिस्तान हवाई क्षेत्र के उल्लंघन पर गहरी चिंता जताई गई है. पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार की पुष्टि की है और भारत से धमकाने या ताकत के इस्तेमाल पर संयम बरतने का अनुरोध किया है.’

विदेश विभाग ने कहा कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता और शांति पर ओआईसी के प्रस्ताव में भारत के साथ बातचीत के पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की नई पेशकश को और सद्भावना के तहत भारतीय पायलट को रिहा करने का भी स्वागत किया गया है. प्रस्ताव में तनाव कम करने और लंबित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए हल करने की अपील की.

इससे पहले, शुक्रवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हिस्सा लेने के कारण पाकिस्तान ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी आबु धाबी में हो रही ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) यानी इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक का बहिष्कार कर दिया था.

स्वराज जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच उत्पन्न तनाव की पृष्ठभूमि में इस बैठक में हिस्सा लिया था.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया था कि भारत को संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री एचएच शेख़ अब्दुल्ला बिन ज़ायद अल नाह्यान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)