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श्रीनगर लोकसभा सीट के 90 मतदान केंद्रों पर किसी के वोट न डालने की सूचना

श्रीनगर लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें हैं. सूत्रों ने बताया कि ईदगाह, खनयार, हब्बा कदल और बटमालू इलाकों में स्थित मतदान केंद्रों पर किसी ने वोट नहीं डाला. महाराष्ट्र के उस्मानाबाद ज़िले के दो गांवों के लोगों ने भी सड़क और पुनर्वास की मांग को लेकर चुनाव का बहिष्कार किया.

Chennai: Workers carry boxes containing Electronic Voting Machines (EVM) and Voter Verified Paper Audit Trail machines (VVPATs) at a distribution centre, ahead of the second phase of the 2019 Lok Sabha elections, at Nandhanam Arts College in Chennai, Wednesday, April 17, 2019. (PTI Photo/R Senthil Kumar)(PTI4_17_2019_000108B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर/किश्तवाड़: श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र के लिए गुरुवार को हुए चुनाव में इस सीट के करीब 90 मतदान केंद्रों पर किसी भी वोटर ने वोट नहीं डाला. इन 90 में से ज़्यादातर मतदान केंद्र श्रीनगर के मुख्य इलाके में स्थित हैं.

श्रीनगर लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें हैं.

सूत्रों ने बताया कि जिन मतदान केंद्रों पर किसी ने वोट नहीं डाला वे ईदगाह, खनयार, हब्बा कदल और बटमालू इलाकों में हैं.

सोनावर विधानसभा क्षेत्र, जहां पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला ने वोट डाले, को छोड़कर अन्य सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत इकाई अंक में दर्ज किया गया. ईदगाह विधानसभा क्षेत्र में 3.3 फीसदी मतदान हुआ.

सोनावर विधानसभा क्षेत्र में 12 फीसदी मतदान हुआ.

पड़ोसी गंदेरबल ज़िले, जो श्रीनगर लोकसभा सीट का हिस्सा है, में 27 मतदान केंद्रों पर किसी ने वोट नहीं डाले.

बडगाम के 13 मतदान केंद्रों पर भी कोई वोट डालने नहीं आया. बडगाम इलाके के चडूरा में पांच विधानसभा क्षेत्रों में सबसे कम 9.2 फीसदी मतदान हुआ जबकि चरार-ए-शरीफ़ में सबसे अधिक 31.1 फीसदी मतदान हुआ.

श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में 12,95,304 पंजीकृत वोटर और 1716 मतदान केंद्र हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर में वोटिंग प्रतिशत 2014 के लोकसभा चुनाव से काफी घट गया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में श्रीनगर में वोटिंग प्रतिशत 26 प्रतिशत था, जो 2019 के चुनाव में घटकर 14.8 प्रतिशत हो गया.

इस बीच श्रीनगर में साल 2017 के उपचुनाव में सिर्फ़ 7.14 प्रतिशत वोटिंग ही रिकॉर्ड की गई थी.

नेशनल कॉन्फ्रेंस के संरक्षक फ़ारूक़ अब्दुल्ला श्रीनगर लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार हैं. वह पिछले चुनाव में भी इसी सीट से जीते थे.

पीडीपी ने इस सीट पर आगा सैयद मोहसिन, भाजपा ने ख़ालिद जहांगीर और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने इरफ़ान अंसारी को अपना उम्मीदवार बनाया है.

नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी कांग्रेस ने श्रीनगर सीट पर अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है.

इस बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दिवंगत नेता चंद्रकांत शर्मा की मां ने अपने परिजन के साथ किश्तवाड़ के एक मतदान केंद्र पर जाकर वोट डाला और कहा कि उनके वोट चंद्रकांत शर्मा के क़ातिलों को सज़ा दिलाने के लिए है.

बीते नौ अप्रैल को किश्तवाड़ के एक स्वास्थ्य केंद्र के भीतर आतंकवादियों ने गोली मारकर आरएसएस नेता चंद्रकांत और उनके सुरक्षा गार्ड की हत्या कर दी थी.

इसके बाद अधिकारियों ने इलाके में कर्फ्यू लगा दिया था और सांप्रदायिक तौर पर संवेदनशील इस क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सेना को बुला लिया गया था.

चंद्रकांत की मां विद्या देवी ने परिवार के सात सदस्यों के साथ जाकर पशु चिकित्सालय में बने मतदान केंद्र में अपने वोट डाले.

महाराष्ट्र के उस्मानाबाद ज़िले में दो गांवों ने किया चुनाव का बहिष्कार

मुंबई: महाराष्ट्र में उस्मानाबाद ज़िले के दो गांवों ने गुरुवार को लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करते हुए कहा कि सरकार ने उनकी मांगों पर कभी ध्यान नहीं दिया इसलिए वह मतदान नहीं करेंगे.

भूम तहसील के जेजला गांव और तुलजापुर तहसील के धानेगांव के निवासियों ने मतदान का बहिष्कार किया.

तेजला गांव में करीब 1,000 मतदाता हैं लेकिन दोपहर एक बजे तक मतदान केंद्र वीरान पड़ा था.

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय निवासी सागर भोसले का कहना है, ‘हम अच्छी सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकारी अधिकारी और नेता हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देते.’

उन्होंने कहा, ‘कुछ महीने पहले हमारे गांव के एक बीमार व्यक्ति की सिर्फ इसलिए मौत हो गई क्योंकि हम उसे वक्त पर अस्पताल नहीं ले जा सके. हमें महज ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित अस्पताल तक पहुंचने में 45 मिनट का वक्त लग गया. इसलिए गांव के सभी लोगों ने मतदान के बहिष्कार का फैसला लिया है.’

भोसले ने अपने गांव के लोगों की ओर से एक बयान भी जारी किया. गांव की सरपंच सुमित्राबाई होगाले से इस संबंध में बातचीत नहीं हो सकी.

होगाले के क़रीबियों ने बताया कि वह लगातर सड़कों की दशा को लेकर सरकारी अधिकारियों से मिल रही थीं, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी.

धानेगांव के लोगों ने पुनर्वास की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार किया. ग्रामीणों का कहना है कि हम लंबे वक्त से तकलीफ झेल रहे हें. हमारा वर्षों पहले पुनर्वास हुआ था, लेकिन ज़मीन अभी तक हमारे नाम पर स्थानांरित नहीं हुई है. हम किसी उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते क्योंकि कोई हमारी मदद को सामने नहीं आया.

उस्मानाबाद कलेक्ट्रेट के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)